इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम बीच में यह फ़ासले इश्क़ की डोर से हमने जो बाँधे बन्धन क्या ख़बर उन पर गींठ लगी भी इश्क़ के दायरे में खड़े मगर वह साथ नहीं पल-पल बन रहा है कल क्या ख़बर वह हमसे मिलेंगे भी इक तरफ़ वह इक … more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: इक तरफ़ वह इक तरफ़ हम बीच में यह फ़ासले इश्क़ की डोर से हमने जो बाँधे बन्धन क्या ख़बर उन पर गींठ लगी भी … more →