कोई नज़रें मिलाने भी नही देता है, हमारी नज़रों का रुख देख कर मुँह फेर लेता है । शायद यह सोच कर कि, कहीं उसकी निगाहों की गहराई न नाप लें हम, या कि यह सोच कर की, हमारी निगाहों में भी वही गहराईयाँ न हों । … more →
स्याह इंद्रधनुष और चाँदनी रातेंGrey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 1 year ago: कोई नज़रें मिलाने भी नही देता है, हमारी नज़रों का रुख देख कर मुँह फेर लेता है । शायद यह सोच कर कि, कही … more →
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 1 year ago: ———१———– क्या नाम दिया तुमने मुझको, सारी बस्ती में कर दिया … more →
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 1 year ago: किसी ने लिख भेजी यह, एक छोटे से एस एम एस में, पता नहीं किसने लिखी है पर अच्छी लगी और कहीं भूल न जाऊं … more →
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 2 years ago: गुनाहे कहना हाले दिल आज क्यों कर बैठे, अपने दिल की आवाज़ों को क्यों बाहर निकलने दे बैठे। सुनना ही सबक … more →
sarhashmi wrote 2 years ago: कौन गुज़रा है तमन्नाओं की महफ़िल के क़रीब आज क्यों होती है रह रह के कसक दिल के क़रीब राह्ब … more →