हिंदी मैं ब्लॉग देखना और लिखना मेरे लिए नया है और बेहद रोमांचक भी क्यूँकि मुझे पता ही नहीं था की इन्टरनेट पर हिंदी इतनी ज्यादा प्रचलित है. मैं एक विशुद्ध हिन्दीभाषी हूँ और हिंदी में हमेशा लिखता रहा हू… more →
कुछ बात है कि हस्ती मिटती नहीं हमारी: Awakening of Crushed Ambitionsजगदीश भाटिया wrote 6 days ago: कई दिनों से इसके बारे में लिखने की सोच रहा था मगर आज जब मनीष भाई ने लिखा कि “ क्यूँ हमार … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: भारत का शिक्षित वर्ग हमेशा ही मानसिक द्वंद्व में फंसा दिखता है जो पश्चात्य सभ्यता के समर्थन और विरो … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: लोग है कि मानते नहीं। कहो वह समझते नहीं और हम है कि कहने से बाज नहीं आते। बात केवल इतनी है कि हिंदी … more →
amitayu wrote 9 months ago: अप्रैल का महीना था, सर्दी की बर्फ अभी पूरी तरह पिघली नही थी, कहीं कहीं श्वेत बर्फ की चादर अभी भी पडी … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: उस दिन ब्लागर अपने कमरे में बैठा लिख रहा था तभी उसे बाहर से आवाज सुनाई दी जो निश्चित रूप से दूसरे ब् … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: चिल्ला चिल्ला कर वह करते हैं एक साथ होने का दावा यह केवल है छलावा मन में हैं ढेर सारे सवाल जिनका जव … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: हिंदी मैं ब्लॉग देखना और लिखना मेरे लिए नया है और बेहद रोमांचक भी क्यूँकि मुझे पता ही नहीं था की इन् … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: हिंदी मैं ब्लॉग देखना और लिखना मेरे लिए नया है और बेहद रोमांचक भी क्यूँकि मुझे पता ही नहीं था की इन् … more →
kavideepaksharma wrote 1 month ago: आओ ! सब मिलकर अपनी जननी के पुनः चरण स्पर्श करें और प्रभू से विनती करें कि हे !परम पिता हमे हर जन्म म … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इत … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इत … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: मैं जानता हूँ कि इस घुप अंधेरे के पीछे कहीं मेरा सूरज छिपा है बस अभी आजाएगा रौशनी फैलाते हुए मुझे मा … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: मैं जानता हूँ कि इस घुप अंधेरे के पीछे कहीं मेरा सूरज छिपा है बस अभी आजाएगा रौशनी फैलाते हुए मुझे मा … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: मैं क्यों हारूँगा किस्मत से जबकि मुझे ये ऐतबार है मेरी हर हार मैं छिपी खुदा तेरी भी हार है … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: मैं क्यों हारूँगा किस्मत से जबकि मुझे ये ऐतबार है मेरी हर हार मैं छिपी खुदा तेरी भी हार है … more →
Rahul Katyayan wrote 2 months ago: दोस्तों, मैं एक पेड हूँ. नीम का एक विशाल पेड़. कई साल से यहाँ खडा रहने के बावजूद एक लम्बा सफर तय … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हिंदी और उर्दू दो अलग भाषायें हैं पर बोली होने की वजह से एक जैसी लगती हैं। यह भाषायें इस तरह आपस मे … more →
kavideepaksharma wrote 2 months ago: दिल में जब तक मैं-तू नहीं हम हैं घर बिखरने के मौके बहुत कम हैं . कौन खींचेगा भला सेहन में दीवार प्या … more →
kavideepaksharma wrote 2 months ago: जिस पर मुझे ज़रूरत से ज्यादा गुमान था दिल उस शख्स का बहुत बेईमान था बिखरा हुआ पड़ा था एक साया उसके प … more →