चौराहे पर खड़े पत्थर के बुत पर कंकड़ लगने पर भी लोग भड़क जाते हैं। अगला निशाना खुद होंगे यह भय सताता है या पत्थर के बुत से भी उनको हमदर्दी है यह जमाने को दिखाते हैं। कहना मुश्किल है कि लोग ज्यादा जज्बाती… more →
दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिकाhsonline wrote 3 weeks ago: An article by Dr Tariq Rahman published in Pakistan’s leading English daily “The Dawn … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: मैं क्यों हारूँगा किस्मत से जबकि मुझे ये ऐतबार है मेरी हर हार मैं छिपी खुदा तेरी भी हार है … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: मैं क्यों हारूँगा किस्मत से जबकि मुझे ये ऐतबार है मेरी हर हार मैं छिपी खुदा तेरी भी हार है … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: भारत का शिक्षित वर्ग हमेशा ही मानसिक द्वंद्व में फंसा दिखता है जो पश्चात्य सभ्यता के समर्थन और विरोध … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: लोग है कि मानते नहीं। कहो वह समझते नहीं और हम है कि कहने से बाज नहीं आते। बात केवल इतनी है कि हिंदी … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इत … more →
Rahul Katyayan wrote 1 month ago: बरसों से बिना बात जिससे रूठा रहा, उस मुस्कराहट को खींच कर होठों पे लाने की ये कोशिश है सम्मान मैं इत … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: चौराहे पर खड़े पत्थर के बुत पर कंकड़ लगने पर भी लोग भड़क जाते हैं। अगला निशाना खुद होंगे यह भय सताता है … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: वैसे तो भारतीय संस्कृति और संस्कारों में लोगों को ढेर सारे दोष दिखाई देते हैं पर फिर भी वह उसमें तमा … more →
जगदीश भाटिया wrote 5 months ago: कई दिनों से इसके बारे में लिखने की सोच रहा था मगर आज जब मनीष भाई ने लिखा कि “ क्यूँ हमार … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: आओ ! सब मिलकर अपनी जननी के पुनः चरण स्पर्श करें और प्रभू से विनती करें कि हे !परम पिता हमे हर जन्म म … more →
Rahul Katyayan wrote 7 months ago: मैं जानता हूँ कि इस घुप अंधेरे के पीछे कहीं मेरा सूरज छिपा है बस अभी आजाएगा रौशनी फैलाते हुए मुझे मा … more →
Rahul Katyayan wrote 7 months ago: मैं जानता हूँ कि इस घुप अंधेरे के पीछे कहीं मेरा सूरज छिपा है बस अभी आजाएगा रौशनी फैलाते हुए मुझे मा … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: हिंदी और उर्दू दो अलग भाषायें हैं पर बोली होने की वजह से एक जैसी लगती हैं। यह भाषायें इस तरह आपस में … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: दिल में जब तक मैं-तू नहीं हम हैं घर बिखरने के मौके बहुत कम हैं . कौन खींचेगा भला सेहन में दीवार प्या … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: जिस पर मुझे ज़रूरत से ज्यादा गुमान था दिल उस शख्स का बहुत बेईमान था बिखरा हुआ पड़ा था एक साया उसके प … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: जब भी कोई बात डंके पे कही जाती है न जाने क्यों ज़माने को अख़र जाती है । झूठ कहते हैं तो मुज़रिम करार … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: जो रोज़ चलती रही जि़स्म पर गोलियाँ और मनती रही खून की होलियाँ तो एक दिन हकीकत हम भूल जायेंगे हो … more →
kavideepaksharma wrote 7 months ago: मेरे जेहन में कई बार ये ख्याल आया की ख्वाब के रंग से तेरी सूरत संवारूँ इश्क में पुरा डुबो दूँ तेरा ह … more →