Blogs about: Vews

Featured Blog

समाज और खानदान की छबि -दो व्यंग्य क्षणिकायें

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: जिन कहानियों में हर पल क्लेशी पात्र सजाये जाते उसी पर बने नाटक सामाजिक श्रेणी के कहलाते सच है समाज … more →

Tags: अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

बिना मेकअप के अभिनय-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फिल्म का नाम था ‘नौकरानी ने बनी रानी’ जोरदार थी कहानी। निर्देशक ने अभिनेत्री से कहा ‘आधी फिल्म में म … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य

हिंदी भाषा में लेखक का आचरण भी देखा जाता है-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हिंदी और उर्दू दो अलग भाषायें हैं पर बोली होने की वजह से एक जैसी लगती हैं। यह भाषायें इस तरह आपस मे … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, मातृभाषा, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu

ऑस्कर से कोई फिल्म दीवार और अभिनेता अमिताभ बच्चन तो नहीं बन सकता-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: भारत में अधिकतर लोगों को फिल्म देखने का शौक है और सभी की अपनी वय और समय के अनुसार पंसदीदा फिल्में और … more →

Tags: inglish, आलेख, व्यंग्य, India, web dunia, web bhaskar, web navabharat, अभिव्यक्ति, Dashboard

प्रतियोगिता से कहीं अधिक वजन जंग में आता है-लघु व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: अपने वाद्ययंत्रों के साथ सजधजकर वह घर से बाहर निकला और अपनी मां से बोला-‘‘मां, आशीर्वाद दो जंग पर जा … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Life, media, Internet, Bloging, Education

चुंबन का स्वाद न मीठा होता है न नमकीन-हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: सिनेमा या टीवी के पर्दे पर चुंबन का दृश्य देखकर लोगों के मन में हलचल पैदा होती है। अगर ऐसे में कहीं … more →

Tags: hasya -vyangya, hasya vyang, vyangya, writer, aritile in hindi, हिंदी आलेख, हिंदी, hindi article, swad

हिट की परवाह की तो ब्लाग पर लिखना कठिन होगा-संपादकीय7 comments

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: अंतर्जाल वाकई एक बहुत बड़ा मायाजाल है। हिंदी के समस्त ब्लाग एक जगह दिखाये जाने वाले फोरमों पर आपस मे … more →

Tags: आलेख, कला, मस्तराम, समाज, साहित्य, हास्य व्यंग्य, Blogging, Blogroll, Deepak bharatdeep

आखिर उसने इस ब्लाग के पूर्व पाठ की कापी क्यों नहीं की-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: उसने कल मेरा इसी ब्लाग पर लिखा गया आलेख पढ़ा और इसलिये उसने उसकी कापी नहीं की क्योंकि इसमें उसी पर आ … more →

Tags: alekh, arebic, अभिव्यक्ति, आदमी, कला, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, संपादकीय

मेहरबानी कर तोहफे में जल्दी दो जुदाई-हास्य हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: माशुका ने शायर से कहा ‘बहुत बुरा समय था जब मैंने अपनी सहेलियों के सामने किसी शायर से शादी करने की कस … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, कशिश, क्षणिका, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, व्यंग्य कविता

अंतर्जाल पर किसी से द्वेष रखना बेकार-आलेख 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे एक ऐसा ब्लाग जिस पर मैं ही तीन-तीन महीने जाकर नहीं देखता कि वहां क्या हो रहा है? ऐसा ब्लाग जिस … more →

Tags: alekh, अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, देश-विदेश, व्यंग्य, संपादकीय, समाज, हास्य व्यंग्य

शब्द हमेशा हवाओं में लहराते हैं-कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हर शब्द अपना अर्थ लेकर ही जुबान से बाहर आता है जो मनभावन हो तो वक्ता बनता श्रोताओं का चहेता नहीं तो … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, कविता, दीपक भारतदीप, मस्तराम, मातृभाषा, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका

हास्य कविताएं और गंभीर चिंतन है पाठकों की पसंद-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कविता लिखना बहुत सहज है और कोई भी लिख सकता है पर वह पाठक के हृदय में उतर जाये वही कविता उसकी भाषा … more →

Tags: alekh, अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, मस्तराम, मातृभाषा, लघुकथा, व्यंग्य, संपादकीय

अपनी गलतियों से सिखाता हुआ बीस हजार की पाठक संख्या पार कर गया यह ब्लोग2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे यह ब्लाग/पत्रिका भी आज बीस हजार की पाठक संख्या को पार कर गया। ऐसा करने वाला यह तीसरा ब्लाग/पत्र … more →

Tags: alekh, अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, संपादकीय, समाज, हिंदी

आवश्यकता ही अपमान की जननी हैःहास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पैट्रोल के भाव आज बढ़ेंगे यह मुझे एक जगह टीवी पर समाचार देखने के बाद पता चल गया था। इसके बावजूद हमने … more →

Tags: alekh, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, संपादकीय, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका

भीड़ से अलग पहचान के लिए अकेले हो जाते- व्यंग्य कविता 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपनी अलग पहचान के लिये भीड़ से अलग होना ही पड़ता है जब चुनते हैं अपनी अलग राह छोड़नी पड़ती है साथी … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कला, कविता, दीपक भारतदीप, मस्तराम, लघुकथा, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, शायरी

इसलिए आज हमने कोई व्यंग्य नहीं लिखा

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कृतिदेव को यूनिकोड के बदलने वाला टूल आने पर मैंने सोचा था कि प्रतिदिन व्यंग्य लिखा करूंगा। जब यूनिक … more →

Tags: alekh, अभिव्यक्ति, कला, ताल-बेताल, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, सूचना

प्यार और नफरत, दोनों पर यकीन नहीं-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज एक फोरम पर घूमते घामते अपने मित्र समीरलाल ‘उड़न तश्तरी” के ब्लाग पर पहुंच गया। उनका ब्लाग … more →

Tags: alekh, अभिव्यक्ति, क्षणिका, ताल-बेताल, दीपक भारतदीप, दृश्य, मस्तराम, व्यंग्य, व्यंग्य कविता

अपनी मूल भाषा में लिखने से पाठ में आती है स्वाभाविक मौलिकता-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे विचार से अब हमें यह तय करना चाहिए कि हम अपनी भाषा के साथ अपना मौलिक जीवन जीना चाहते है या अंग्र … more →

Tags: alekh, अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, मस्तराम, मातृभाषा, व्यंग्य, संपादकीय, समाज

अंतर्जाल पर पाठ के शीर्षक की अधिक महत्वपर्ण भूमिका है-आलेख3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैंने एक बार एक ब्लाग देखा था जिसके लेखक ंने चार ब्लाग लेखकों के नाम शीर्षक में लिखकर अपना पाठ पूर … more →

Tags: alekh, arebic, अभिव्यक्ति, कला, दीपक भारतदीप, मस्तराम, मातृभाषा, संपादकीय, समाज


Have your say. Start a blog.

See our free features →

Related Tags
All →

Follow this tag via RSS

Find other items tagged with “vews”:
Technorati Del.icio.us IceRocket