सिनेमा या टीवी के पर्दे पर चुंबन का दृश्य देखकर लोगों के मन में हलचल पैदा होती है। अगर ऐसे में कहीं किसी प्रसिद्ध हस्ती ने किसी दूसरी हस्ती का सार्वजनिक रूप से चंुबन लिया और उसकी खबर उड़ी तो हाहाकार … more →
*** दीपक भारतदीप की हिंदी सरिता-पत्रिका*** mastram Deepak Bharatdeep ki hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: जिन कहानियों में हर पल क्लेशी पात्र सजाये जाते उसी पर बने नाटक सामाजिक श्रेणी के कहलाते सच है समाज … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फिल्म का नाम था ‘नौकरानी ने बनी रानी’ जोरदार थी कहानी। निर्देशक ने अभिनेत्री से कहा ‘आधी फिल्म में म … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हिंदी और उर्दू दो अलग भाषायें हैं पर बोली होने की वजह से एक जैसी लगती हैं। यह भाषायें इस तरह आपस मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: भारत में अधिकतर लोगों को फिल्म देखने का शौक है और सभी की अपनी वय और समय के अनुसार पंसदीदा फिल्में और … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: अपने वाद्ययंत्रों के साथ सजधजकर वह घर से बाहर निकला और अपनी मां से बोला-‘‘मां, आशीर्वाद दो जंग पर जा … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: सिनेमा या टीवी के पर्दे पर चुंबन का दृश्य देखकर लोगों के मन में हलचल पैदा होती है। अगर ऐसे में कहीं … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: अंतर्जाल वाकई एक बहुत बड़ा मायाजाल है। हिंदी के समस्त ब्लाग एक जगह दिखाये जाने वाले फोरमों पर आपस मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: उसने कल मेरा इसी ब्लाग पर लिखा गया आलेख पढ़ा और इसलिये उसने उसकी कापी नहीं की क्योंकि इसमें उसी पर आ … more →
दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: माशुका ने शायर से कहा ‘बहुत बुरा समय था जब मैंने अपनी सहेलियों के सामने किसी शायर से शादी करने की कस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे एक ऐसा ब्लाग जिस पर मैं ही तीन-तीन महीने जाकर नहीं देखता कि वहां क्या हो रहा है? ऐसा ब्लाग जिस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: हर शब्द अपना अर्थ लेकर ही जुबान से बाहर आता है जो मनभावन हो तो वक्ता बनता श्रोताओं का चहेता नहीं तो … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कविता लिखना बहुत सहज है और कोई भी लिख सकता है पर वह पाठक के हृदय में उतर जाये वही कविता उसकी भाषा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे यह ब्लाग/पत्रिका भी आज बीस हजार की पाठक संख्या को पार कर गया। ऐसा करने वाला यह तीसरा ब्लाग/पत्र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पैट्रोल के भाव आज बढ़ेंगे यह मुझे एक जगह टीवी पर समाचार देखने के बाद पता चल गया था। इसके बावजूद हमने … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपनी अलग पहचान के लिये भीड़ से अलग होना ही पड़ता है जब चुनते हैं अपनी अलग राह छोड़नी पड़ती है साथी … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कृतिदेव को यूनिकोड के बदलने वाला टूल आने पर मैंने सोचा था कि प्रतिदिन व्यंग्य लिखा करूंगा। जब यूनिक … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज एक फोरम पर घूमते घामते अपने मित्र समीरलाल ‘उड़न तश्तरी” के ब्लाग पर पहुंच गया। उनका ब्लाग … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मेरे विचार से अब हमें यह तय करना चाहिए कि हम अपनी भाषा के साथ अपना मौलिक जीवन जीना चाहते है या अंग्र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मैंने एक बार एक ब्लाग देखा था जिसके लेखक ंने चार ब्लाग लेखकों के नाम शीर्षक में लिखकर अपना पाठ पूर … more →