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कभी महाबली खली तो कभी राखी सावंत पे विशेष : मीडिया का नया भेष
क्या हो गया है इन न्यूज़ चैनल्स को समझ नहीं आता की मीडिया अपने आप को बर्बाद कर… more »
Apurn
दर्द की बजाय लिखना पसंद है संघर्ष पर
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दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: अंतर्र्जाल पर मैं लिखता हूं इसका अर्थ … more »
यह नहीं बता सकते कि हिट होगा कि फ्लाप-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: फंदेबाज के घर के दौरे पर पहूंचे तो उसक … more »
कभी महाबली खली तो कभी राखी सावंत पे विशेष : मीडिया का नया भेष
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Shubhashish Pandey wrote 1 month ago: क्या हो गया है इन न्यूज़ चैनल्स को समझ … more »
आपसी संपर्क में लिपि बाधक-आलेख
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दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: पिछले दिनों मैंने हिन्दी ब्लोग में पा … more »
जैसा हम चाहें वैसा लिख और दिख:कविता साहित्य
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दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: मेरा लिखा शब्द तेरे लिखे शब्द से भारी … more »
चाणक्य नीति:जिससे कुछ मिलने की आशा हो उससे मधुर व्यवहार करें
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दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: 1.जिसके मन में पाप है, वह सौ बार तीर्थ स् … more »
जिन्दगी की दो छाप, हिट और फ्लॉप
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: हिट होने से होती है खुशी पर चिंताएं भी … more »
सुबह का स्वाध्याय
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: जब पूरे दिन बोलना है टू क्यों नहीं होत … more »
चाणक्य नीति:बिना पढी पुस्तक और कमाया धन किसी दूसरे को न दें
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: 1.क्रोध यमराज के समान है, उसके कारण मनुष … more »
संत कबीर वाणी:मांस खाने वालों की मुक्ति नहीं
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दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: तिल भर मछली खायके, कोटि गऊ दे दान कासी क … more »
इससे तो अकेले में गीत गुनगुनाएं
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: जब पास थे तो ऐसा लगता कि बस हमेशा के लिए … more »
रहीम के दोहे:दृढ़ चरित्र हो तो कुसंगति भी नहीं बिगाड़ सकती
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसं … more »
संत कबीर वाणी: पराई स्त्री से प्रेम करना लहसुन खाने के समान
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दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: पर नारी का राचना, ज्यूं लहसुन की खान को … more »
संत कबीर वाणी:धर्म के नाम पर भ्रम न पालें
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: ‘कबीर’ मन फूल्या फिरै,करता हूँ मैं … more »
चाणक्य नीति:पांच वस्तुओं का संग्रह अवश्य करें
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: १.इस संसार में कुछ प्राणियों के किसी व … more »
कैसा विश्वास जगाते हैं
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: अपने विश्वास पर बहुत इतराते हैं पर चंद … more »
कुछ लोगों के लिए समाज सेवा फैशन है
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: आखिर समाज सेवा है क्या? उसका स्वरूप क् … more »
कौन चाहेगा चेतना की ज्योति जगाना
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: वादे कर भूल जाना अपने कहे से पलट कर कुछ … more »
लेखकीय अधिकार से लिखें अनुयायी बनकर नहीं
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दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: इस देश में स्वतंत्रता के बाद विचार और … more »
