Blogs about: Vididha

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दूसरे के कहने पर मार्ग बदलना नहीं-आलेख3 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: जब अपने किसी लक्ष्य या उद्देश्य का पता हो और उसी मार्ग पर हमारे कदम बढ़ रहे हों तो किसी के कहने पर आ … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, मस्तराम, शब्द, संवेदना, समाज

बड़ी मछली का छोटी पर शासन तो फिर भी रहा

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कार्ल मार्क्स ने कहा था कि इस दुनियां को सबसे बड़ा सच रोटी है। आर्थिक ढंग से सोचने वालो ने उनकी इस ख … more →

Tags: Blogroll, दृष्टिकोण, Global Dashboard, inglish, अभिव्यक्ति, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat

शाश्वत प्रेम पर एक कविता-hasya kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: न पीडा से न किसी चाहत से न किसी शब्द से वह बहता आता है सहज भाव से अपनी पीडाओं को भुला दो अपनी चाहतों … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, गीत, चरित्र, ताल-बेताल, दृष्टिकोण, प्रतिबिंब, बिंब-प्रतिबिंब

सागर की लहरों जैसा है मन मेरा

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: सागर की तरह मन है मेरा जब भी लहरों से खेलता है कुछ शेर ही जुबान से  कहला कर दम लेता है मैं भी उसे नह … more →

Tags: Blogroll, Vichar, hindi, Kavita, दृष्टिकोण, Global Dashboard, कविता, दर्द बांटते चलो, inglish

अल्फाजों का समन्दर उफनता आने दो

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: तुम रास्ते से हट जाओ अपने ज़ज्बातों को बहकर आने दो अल्फाजों का समंदर है अन्दर उसे उफनते आने दो कहने क … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कविता, गीत, ताल-बेताल, दर्द बांटते चलो, दृष्टिकोण, बिंब-प्रतिबिंब, यकीन, शेर

पहले अपने को ही पहचान ले मेरे मन

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: किसके मन में क्या है कौन जानेगा अपने मन को ही भला कौन जानता है पल-पल हालात के साथ बदलता मन कौन लगाम … more →

Tags: Blogroll, Vichar, hindi, Kavita, दृष्टिकोण, glogbal dashborad, शेर-ओ-शायरी, कविता, दर्द बांटते चलो

आओ सुनो एक फालतू दिखने वाला गम्भीर चिन्तन

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago:                   जीवन में सुख सभी पाना चाहते हैं पर कोइ दुसरे को सुख देना नहीं चाहता । अब बताईये कि … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आचरण, इंडिया, चरित्र, ताल-बेताल, दृष्टिकोण, नज़रिया, प्रतिबिंब, बिंब-प्रतिबिंब

छोटी कविताएँ और हंसिकाएं और कुछ रुलाएं 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: आदमी और कुत्ते पर कविता सुनाकर वह लोगों को हंसाते हैं अपने नाम के आगे हंसी के बादशाह की पदवी लगाते ह … more →

Tags: चरित्र, दर्द बांटते चलो, दृष्टिकोण, नज़रिया, प्रतिबिंब, बिंब-प्रतिबिंब, रात-बेरात, लम्हे, व्यंग्य

बारात का एक दिन, शादी की एक रात-कविता

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: एक दिन की बारात शादी की एक रात आदमी अपनीसारी जिन्दगी की कमाई दाव पर लगाता है दूसरों को खुश कर अपनी … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आचरण, इंडिया, कविता, चरित्र, ताल-बेताल, दर्द बांटते चलो, दृष्टिकोण, नज़रिया

अपने आंसू धीरे-धीरे बहाओ

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: शिष्य के हाथ से हुई पिटाई गुरुजी को मलाल हो गया जिसको पढ़ाया था दिल से वह यमराज का दलाल हो गया गुरु … more →

Tags: अभिव्यक्ति, इंडिया, कविता, दर्द बांटते चलो, दृष्टिकोण, नज़रिया, भारत, यकीन, रात-बेरात

हिंदू धर्म की ताकत है ध्यान और गीता का ज्ञान

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago:                              मैं देश में चल रहे माहौल को जब देखता हूँ जिसमें हिदू धर्म के प्रति लोगो … more →

Tags: अभिव्यक्ति, इंडिया, दृष्टिकोण, नज़रिया, भारत, यकीन, लम्हे, विचार, विश्वास

पाकिस्तान का नया पैंतरा:पानी के लिए जंग

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पाकिस्तान के विदेश मंत्री कसूरी ने कहा है कि पानी को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच युध्द हो सकता है। … more →

Tags: hindi, संपादकीय

कुछ यूं दर्द बांटते चलो: कुछ डांटते...please listen

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: आस्तीन में पाला था तो उसे डसना ही था आख़िर आदमी में भी सांप का बसेरा होता है मगर तुझमें तो इन्सान … more →

Tags: Blogroll, hindi, कविता, दर्द बांटते चलो, inglish

शराब करती है यकीन से दूर :Don't dirink

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पहले शराब पीता है आदमी फिर शराब पीती है आदमी ऐसा कहा जाता है पीने वालों को क्या परवाह वह शराब पियें … more →

Tags: Blogroll, hindi, Kavita

वफ़ा, सच, ईमान और मेरा यकीन

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: खुद में वफ़ा है नहीं दूसरों में ढूँढता है आदमी कोई अपना चेहरा नहीं देखता अपने घर के आईने में सब देखते … more →

Tags: Blogroll, hindi, Kavita, glogbal dashborad

छोटी कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जब सामने वह मेरे होती है मैं खो जाता हूँ पुरानी यादों में जितना भूलना चाहूँ उतना ही ज्यादा आती मेरे … more →

Tags: hindi, Kavita, glogbal dashborad

कसमें, वादे क्या, इन पर भरोसा क्या?

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: दोस्ती निभाने के वा दे  किये नही जाते  निभाए जाते हैं।  जुबान से कहने के  मौक़े आते हैं हर दिन  निभा … more →

Tags: Blogroll, hindi, Kavita


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