जब अपने किसी लक्ष्य या उद्देश्य का पता हो और उसी मार्ग पर हमारे कदम बढ़ रहे हों तो किसी के कहने पर आकर वहां से हटना निहायत मूर्खता होती है। संभव है जिस व्यक्ति के कहने पर हम अपना मार्ग या लक्ष्य बदल र… more →
***दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिका*** ***Deepak Bharatdeep ki Hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: जब अपने किसी लक्ष्य या उद्देश्य का पता हो और उसी मार्ग पर हमारे कदम बढ़ रहे हों तो किसी के कहने पर आ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कार्ल मार्क्स ने कहा था कि इस दुनियां को सबसे बड़ा सच रोटी है। आर्थिक ढंग से सोचने वालो ने उनकी इस ख … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: न पीडा से न किसी चाहत से न किसी शब्द से वह बहता आता है सहज भाव से अपनी पीडाओं को भुला दो अपनी चाहतों … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: सागर की तरह मन है मेरा जब भी लहरों से खेलता है कुछ शेर ही जुबान से कहला कर दम लेता है मैं भी उसे नह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: तुम रास्ते से हट जाओ अपने ज़ज्बातों को बहकर आने दो अल्फाजों का समंदर है अन्दर उसे उफनते आने दो कहने क … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: किसके मन में क्या है कौन जानेगा अपने मन को ही भला कौन जानता है पल-पल हालात के साथ बदलता मन कौन लगाम … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जीवन में सुख सभी पाना चाहते हैं पर कोइ दुसरे को सुख देना नहीं चाहता । अब बताईये कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: आदमी और कुत्ते पर कविता सुनाकर वह लोगों को हंसाते हैं अपने नाम के आगे हंसी के बादशाह की पदवी लगाते ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: एक दिन की बारात शादी की एक रात आदमी अपनीसारी जिन्दगी की कमाई दाव पर लगाता है दूसरों को खुश कर अपनी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: शिष्य के हाथ से हुई पिटाई गुरुजी को मलाल हो गया जिसको पढ़ाया था दिल से वह यमराज का दलाल हो गया गुरु … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: मैं देश में चल रहे माहौल को जब देखता हूँ जिसमें हिदू धर्म के प्रति लोगो … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पाकिस्तान के विदेश मंत्री कसूरी ने कहा है कि पानी को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच युध्द हो सकता है। … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: आस्तीन में पाला था तो उसे डसना ही था आख़िर आदमी में भी सांप का बसेरा होता है मगर तुझमें तो इन्सान … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: पहले शराब पीता है आदमी फिर शराब पीती है आदमी ऐसा कहा जाता है पीने वालों को क्या परवाह वह शराब पियें … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: खुद में वफ़ा है नहीं दूसरों में ढूँढता है आदमी कोई अपना चेहरा नहीं देखता अपने घर के आईने में सब देखते … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: जब सामने वह मेरे होती है मैं खो जाता हूँ पुरानी यादों में जितना भूलना चाहूँ उतना ही ज्यादा आती मेरे … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: दोस्ती निभाने के वा दे किये नही जाते निभाए जाते हैं। जुबान से कहने के मौक़े आते हैं हर दिन निभा … more →