1. मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथि और इंद्रियां घोड़े है। इनको सावधानी से नियंत्रण करने वाला ही जीवन की इस यात्रा में सुख और आनंद के साथ अपनी यात्रा पूरी कर पाता है 2. जिस तरह अप्रशिक्षित और अनि… more →
दीपक भारतदीप की शब्द- पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 week ago: द्वावेव न विराजेते विपरीतेन कर्मणा। गृहस्थश्च निरारम्भः कार्यवांश्चैव भिक्षुकः।। हिंदी में भावार्थ-न … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद विदुर महाराज कहते है कि अस्तयागात् पापकृतामापापांस्तुल्यो दण्डः स्पृशते मिश्रभावात्। शुष … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: धर्माऽऽख्याने श्मशाने च रोगिणां या मतिर्भवेत्। सा सर्वदैव तिष्ठेयेत् को न मुच्येत बंधानात्।। हिंदी म … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: 1.निरोग रहना, ऋणी न होना, विदेश में रहना, अच्छे लोगों के साथ मेल होना, अपनी वृत्ति से जीविका चलाना औ … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: १. अधर्म से प्राप्त हुए धन के द्वारा जो दोष छिपाया जाता है वह तो छिपता नहीं, उससे भिन्न और नया दोष प … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: संत शिरोमणि कबीरदास जी के अनुसार ————————— … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: 1.संपूर्ण भौतिक पदार्थों की वास्तविकता का जो ज्ञान रखता है तथा सभी कार्यों को संपन्न करने का ढंग तथा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1. मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथि और इंद्रियां घोड़े है। इनको सावधानी से नियंत्रण करने वाला ही … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: १.संसार में धनियों को प्राय: भोजन करने की शक्ति नहीं होती किन्तु दरिद्रों के पेट में लकडी भी पच जाती … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: 1.दूसरों से गाली सुनकर भी स्वयं उन्हें गाली न दे। क्षमा करने वाले का रोका हुआ कोर्ध ही गाली देने वा … more →