दिल की बस्तियाँ जलीं पर उठा नहीं धुँआ बुझाया आँखों से मैंने पर बुझा नहीं धुँआ बहुत देर तक टीस दबाये बैठा रहा मैं चंद अश्क जो आये फिर चुभा नहीं धुँआ दर्द पर्त-दर-पर्त जमता ही रहा बुझाया बहुत मैंने पर ह… more →
तख़लीक़-ए-नज़रPraful wrote 3 months ago: Mukhtar Mai married at a simple ceremony A Pakistani gan … more →
pryas wrote 6 months ago: एक संत किसी गांव में पहुंचे। गांव के लोगों के आग्रह पर वह वहीं एक कुटिया बनाकर रहने लगे। उनका खाना ज … more →
विनय wrote 1 year ago: दिल की बस्तियाँ जलीं पर उठा नहीं धुँआ बुझाया आँखों से मैंने पर बुझा नहीं धुँआ बहुत देर तक टीस दबाये … more →