दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: जब अपने किसी लक्ष्य या उद्देश्य का पता हो और उसी मार्ग पर हमारे कदम बढ़ रहे हों तो किसी के कहने पर आ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वैसे तो हम वृंदावन हम कई बार गये हैं पर पिछली बार हम दोनों पति-पत्नी ने गोवर्धन पर्वत की परिक्रमा का … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने जिस्म पर इतराते हैं लोग जिसमें रहते हैं बहुत सारे रोग जीवन की नाव वक्त की लहरों में बहती जाती … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: चिल्ला-चिल्लाकर करते हैं प्रेम मजे के लिए चाहिए जैसे गेम आखों में बसाए रहते हैं पाश्चात्य सभ्यता वाल … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: रहिमन लाख भली करो, अगुनी अगुन न जाय राग सुनत पय पियत हू, सांप सहज धरि खाय कविवर रहीम कहते हैं की अस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इंडियन आइडियल का नशा एक दिन ही चढ़ा दूसरे दिन उतरा बालक को करा रहे थे माता-पिता म्यूजिक की प्रेक्टिस … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: गरीब का जीना क्या मरना क्या अमीर का जीतना क्या हारना क्या इस जीवन को सहज भाव से वही बिता पाते हैं जो … more →