Blogs about: Vishvaas
अच्छा हुआ खबर नहीं पढ़ी-हास्य व्यंग्य
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: श्रीमतीजी ने रात को पूछा-‘‘क्या खाना ख … more »
चतुराई से मुट्ठी में कर लो-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: हाथ में डंडे और मुहँ में नारे चले हैं स … more »
चलना ज़रा संभल कर-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: चिल्ला-चिल्लाकर करते हैं प्रेम मजे के … more »
सुबह का स्वाध्याय
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: जब पूरे दिन बोलना है टू क्यों नहीं होत … more »
रहीम के दोहे:दृढ़ चरित्र हो तो कुसंगति भी नहीं बिगाड़ सकती
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: जो रहीम उत्तम प्रकृति, का करि सकत कुसं … more »
ब्लोगर नहीं लिख सका प्रेम गीत
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दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: ब्लोगर की प्रेमिका ने भेजा उसे ईमेल … more »
कैसा विश्वास जगाते हैं
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: अपने विश्वास पर बहुत इतराते हैं पर चंद … more »
लेखकीय अधिकार से लिखें अनुयायी बनकर नहीं
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दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: इस देश में स्वतंत्रता के बाद विचार और … more »
संत कबीर वाणी:जीभ का रस सबसे अधिक महत्वपूर्ण
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: दिल का मरहम कोई न मिला, जो मिला मर्जी कह … more »
चाणक्य नीति:प्रीति में चालाकी जरूरी
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: 1.जो नीच प्रवृति के लोग दूसरों के दिलो … more »
रहीम के दोहे:कपटी की संगत से भारी शारीरिक हानि
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: रहिमन लाख भली करो, अगुनी अगुन न जाय राग … more »
चाणक्य नीति: बिना बुलाये किसी के घर न जायें
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दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: 1.आजकल के विद्वान् चारों वेदों और धर्म … more »
रहीम के दोहे:हंसिनी चुनती है केवल मोती
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: मान सहित विष खाप के, संभु भय जगदीश … more »
अगड़म-बगडम लिखते तो हिट हो जाते
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: पहले ब्लॉगर ने उसी मित्र से दूसरे ब्लॉ … more »
हास्य कविता -शांति के प्रवर्तक
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दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: समाज के ठेकेदारों की पड़ती जा रही थी छ … more »
जो सहज वह 'कबीर' जो असहज वह गरीब है
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: भारत में संत कबीर जी का नाम बहुत श्रद् … more »
संत कबीर वाणी: जल-धन बढने लगे तो उसे निकालो
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: जो जल बाढै नाव में, घर में बाढै दाम दोन … more »
संत कबीर वाणी: बिना विचारे बोलना नासमझी
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: मुख आवै सोई कहै, बोलै नहीं विचार हते पर … more »
चाणक्य नीति : दुष्टो की संगत विनाश का कारण
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: 1. बुरे व्यवहार करने वाले कर्मचारियो … more »
