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Blogs about: Visions

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फिर से मौसम बहारों का आने को है

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: फिर से मौसम बहारों का आने को है, फिर से रंगीन ज़माना बदल जायेगा, अबकी बज़्म चरागों सजा लेंगे हम, ये भी … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Ghazal, Jagjit Singh

तेरे निसार सकिया

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: तेरे निसार सकिया जितनी पीयू पिलाए जा, मस्त नज़र का वास्ता मस्त मुझे बनाए जा, तुझको किसी से मर्ज़ क्या … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Ghazal, Jagjit Singh

सर झुकाओगे तो

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: सर झुकाओगे तो पत्थर देवता हो जायेगा, इतना मत चाहो उसे वो बेवफा हो जायेगा, हम भी दरिया हैं हमे अपना ह … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Ghazal, Jagjit Singh

न कह साकी बहार आने के दिन हैं

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: न कह साकी बहार आने के दिन हैं, जिगर के दाग छिल जाने के दिन हैं, अदा से खूब अदा आने के दिन हैं, अभी त … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Ghazal, Jagjit Singh

कुछ न कुछ तो ज़रूर होना है1 comment

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: कुछ न कुछ तो ज़रूर होना है, सामना आज उनसे होना है, तोड़ो फैको रखो करो कुछ भी, दिल हमारा है क्या खिलौन … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Ghazal, Jagjit Singh

कोई दोस्त है न रकीब है

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: कोई दोस्त है न रकीब है, तेरा शहर कितना अजीब है, वो जो इश्क था वो जूनून था, ये जो हिजर है ये नसीब है, … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल, Non Films

कौन आया

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: कौन आया रास्ते आइना खाना हो गए, रात रोशन हो गयी दिन भी सुहाने हो गए, ये भी मुमकिन है के उसने मुझको प … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Ghazal, Jagjit Singh

कल रात जहाँ मैं था1 comment

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: हर गोशा गुलिस्तान था कल रात जहाँ मैं था, एक जशन -ऐ -बहारां था कल रात जहाँ मैं था, नगमें थे हवाओं में … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Ghazal, Jagjit Singh

कभी कभी यूं भी हमने अपने जीं को बहलाया है1 comment

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: कभी कभी यूं भी हमने अपने जीं को बहलाया है, जिन बातों को ख़ुद नहीं समझे औरों को समझाया है, हमसे पूछो … more →

Tags: Álbums, गज़ल, जगजीत सिहँ, Ghazal, Jagjit Singh

झूम के जब रिन्दो ने पिला दी3 comments

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: झूम के जब रिन्दो ने पिला दी, शेख़ ने चुपके चुपके दुआ दी, एक कमी थी ताजमहल में, हमने तेरी तस्वीर लगा … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल

आप आए जनाब बरसों मे

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: आप आए जनाब बरसों मे, हमने पी है शराब बरसों मे, फिर से दिल की कली खिली अपनी, फिर से देखा शबाब बरसों म … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल

ये पीने वाले बहुत ही अजीब होते हैं1 comment

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: ये पीने वाले बहुत ही अजीब होते हैं, जहाँ से दूर ये ख़ुद के क़रीब होते हैं, किसी को प्यार मिले और किस … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल

किसने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: किसने भीगे हुए बालों से ये झटका पानी, झूम के आई घटा टूट के बरसा पानी, कोई मतवाली घटा पीके जवानी की उ … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल

दर्द-ऐ-दिल मे कमी न हो जाए

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: दर्द-ऐ-दिल मे कमी न हो जाए, दोस्ती दुश्मनी न हो जाए, तुम मेरी दोस्ती का दम न भरो, आसमान मुद्दई न हो … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल

आप को देखकर देखता रह गया

Amarjeet Singh wrote 2 years ago: आप को देखकर देखता रह गया, क्या कहूं और कहने को क्या रह गया, उनकी  आंखों मे कैसे छलकने लगा, मेरे होंठ … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल

नज़र नज़र से मिलाकर2 comments

Amarjeet Singh wrote 3 years ago: नज़र नज़र से मिलाकर शराब पीते हैं हम उनको पास बिठाकर शराब पीते हैं। इसीलिए तो अँधेरा है मैकदे में बह … more →

Tags: Jagjit Singh, Ghazal, जगजीत सिहँ, Álbums, गज़ल


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