Blogs about: Vividha

बुद्धिजीवी समझाते है,पर समाज समझता नहीं-व्यंग्य आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: बहुत दिन से हमारे दिमाग में यह बात नहीं आ रही कि आखिर कौन किसको क्या और क्यों समझा रहा है? कब समझा र … more →

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क्रिकेट मैच और फिल्म से तो अच्छा है ब्लाग लिखना और पढ़ना-आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: क्रिकेट के खिलाड़ी और फिल्म के अभिनेता अभिनेत्रियों के चेहरों और नाम के सहारे ही आजकल देश के सारे सम … more →

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बनते बिगड़ते हैं रंग और इंसान -कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: पल रंग बदलती दुनियां में रिश्ते भी बदलते हैं रंंग जो सारी उमर साथ चलने का एलान करते सरेआम वह कभी नही … more →

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आखिर इसमें खास क्या है-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: जहां तक मेरी जानकारी है खबर में यही था कि अमेरिका में राष्ट्रपति पद उम्मीदवार ओबामा अपनी जेब में रखन … more →

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अपने जिस्म पर इतराते हैं लोग-कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: अपने जिस्म पर इतराते हैं लोग जिसमें रहते हैं बहुत सारे रोग जीवन की नाव वक्त की लहरों में बहती जाती ह … more →

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यहां तो सभी स्वप्रेरणा से लिख रहे हैं-आलेख 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: आज मैंने कुछ अंग्रेजी ब्लाग से सामग्री लेकर अनुवाद टूल पर चिपकाई। हिंदी में कर उसे पढ़ने का विचार कि … more →

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क्रिकेट मैच के दौरान नृत्य कार्यक्रम:एक विचार 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: अभी चल रही प्रतियोगिता में क्रिकेट मैचों के दौरान ‘चीयर गर्ल’ की भूमिका पर अनेक लोग सवाल उठा रहे हैं … more →

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इस ब्लोग (पत्रिका) के बीस हजारिया होने पर विशेष संपादकीय1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: यह ब्लाग (पत्रिका) आज बीस हजारिया हो गया-यानि इसकी पाठक संख्या बीस हजार पार हो गयी थी। इसने दस हजार  … more →

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राय अपनी अपनी-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: हम घर से बाहर निकल कर जैसे सायकल से सड़क पर आये तो  एक सज्जन मिल गये और  हमसे बोले-‘कहां जा रहे हो।’ … more →

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विदुर नीति:शरीर रथ, इन्द्रियां घोडे और बुद्धि होती है सारथि

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: 1. मनुष्य का शरीर रथ है, बुद्धि सारथि और इंद्रियां घोड़े है। इनको सावधानी से नियंत्रण करने वाला  ही … more →

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ब्लोग लिखते हुए उठने लगते हैं कई संशय-आलेख 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: मैं यह पोस्ट पहले भी लिखना चाहता था पर रोमन लिपि में हिंदी लिखना इतना कठिन लगता कि मेरी मनस्थिति ही … more →

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गर्मी के साथ बढ़ती महंगाई-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: जैसे जैसे गर्मी बढ़ती जा रही है वैसे शारीरिक और मानसिक तनाव लोगों में बढ़ता जा रहा है। इस तनाव में ब … more →

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अपना तनाव और थकावट बढाते हैं खुद लोग-आलेख 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: हमारे दर्शन के अनुसार मनुष्य योनि बहुत पुण्य करने पर मिलती है और अगर कोई इस योनि में दान-पुण्य और धर … more →

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संत कबीर वाणी:जो मांगे वह साधू नहीं भांड होता है 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: तिल समान तो गाय है, बछड़ा नौ- नौ हाथ मटकी भरि भरि दुहि लिया, पुँछ अठारह हाथ संत कबीर कहते हैं कि वाणी … more →

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आम लोगों को हिन्दी में लिखने को प्रेरित करें ब्लोगर

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: यह संयोग ही है कि आज मैं ब्लोग के विषय पर लिखने का ही विचार कर रहा था कि मेरी नजर में चिट्ठाकार से आ … more →

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चाणक्य नीति:पांच वस्तुओं का संग्रह अवश्य करें 3 comments

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: १.इस संसार में कुछ प्राणियों के किसी विशेष अंग में विष होता है-जैसे सर्प के दांतों में मक्खी के मस्त … more →

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रहीम के दोहे: बिपति भए धन न रहे

दीपक भारतदीप wrote 5 years ago: बिपति भए धन न रहे, रहे जो लाख करोड़ नभ तारे छिपि जात है, ज्यों रहीम भए भोर कवि रहीम कहते हैं, जैसे प … more →

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ब्रेकिंग न्यूज (हास्य व्यंग्य)

दीपक भारतदीप wrote 4 years ago: चंदा लेकर समाज सेवा करने वाली उस संस्था के समाजसेवी बरसों तक अध्यक्ष रहे। पहले जब वह युवा थे तब उनके … more →

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