मैं भी भूल गया वो बात, तुम भी भूले ही होगे अपने आप से किए हुए ऐसे वादे, अपना जीवन समर्पित कर देने के । समर्पण, विपन्न बीलकों का जीवन संवार देने में स्वयं का, या आश्रय देने का निराश्रित कई बडे़-बूढों क… more →
स्याह इंद्रधनुष और चाँदनी रातेंGrey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 4 months ago: मैं भी भूल गया वो बात, तुम भी भूले ही होगे अपने आप से किए हुए ऐसे वादे, अपना जीवन समर्पित कर देने के … more →
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 4 months ago: ओ नंगे ! हां तुम…… तुम नंगे, अरे! फिर भी पढ़े जा रहे हो तुम अभद्र नहीं मानोगे क्या तुम ? … more →
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 1 year ago: गंगा तुम क्यों जलती हो, क्या उन पापों से जो धोए तुमने ? या देख कर उन पापों को जो होने को तैयार दिलों … more →
Grey Rainbow - स्याह इंद्रधनुष wrote 1 year ago: यह मेरी लिखी एक कविता है, मेरी ही आवाज़ में जिसकी लिंक नीचे दी गई है : Maut Jab Tu Aana Some Rights R … more →
विनय wrote 1 year ago: कोई तुमसे मुलाक़ात का बहाना ढूँढ़ता है फिर से वही गुज़रा हुआ ज़माना ढूँढ़ता है वह एक पल जो थम के रह गया … more →
विनय wrote 1 year ago: बिन तुम्हारे मैं क्या हूँ तुम न समझोगे आप तन्हाई की सदा हूँ तुम न समझोगे तुम्हारे ग़मे-इश्क़ में जो च … more →
विनय wrote 2 years ago: यादों का सागर गहरा है उसमें डूब जाऊँ तो वक़्त का हर लम्हा ठहरा है कोई काँटा-सा है जो लग गया है इक फाँ … more →
विनय wrote 2 years ago: यह कौन-सा मुक़ाम है? जहाँ आकर सब चेहरे एक-से हो जाते हैं दिल रेत बनकर सीने में गहरा और गहरा धँसने लगत … more →