हम हम है बाकी सब पानी कम है, आज के नेताओका यही तो धरम है, कुसीँ के खेल के बाजीगर है ये, सच कहु तो यार इनमे बडा दम है, सचाइ से कया हासील है यार यहा तो पैसा भगवान है, हम तो जानवर से रहे गये हे बस वही लो… more →
Manish Pansiniya's Poemspryas wrote 1 year ago: पिछले दिनों मैं महाकवि कालिदास कृत “मेघदूत” पढ रहा था. उसे पढकर मेरे अन्दर का लेखक अँगडा … more →
Manish wrote 1 year ago: हम हम है बाकी सब पानी कम है, आज के नेताओका यही तो धरम है, कुसीँ के खेल के बाजीगर है ये, सच कहु तो या … more →
mehhekk wrote 1 year ago: नयी सहेली वक़्त मिला सोचा बाज़ार जाउँ दो-चार दिन की सब्जी खरीद लाउँ रास्ते में मिली नार नवेली बातों … more →
Manish wrote 1 year ago: न्युज और टीवी , वाह कया रंग दिखलाते है , अच्छे अच्छे पहेलवानो को ये नचाते है , खलि कि खलबलि , देख … more →