ख्वाहिशें तो जिंदगी में बहुत होतीं हैं पर सभी नहीं होतीं पूरी जो होतीं भी हैं तो अधूरी पर कोई इसलिए जिन्दगी में ठहर नहीं जाता कहीं रौशनी होती है पर जहाँ होता हैं अँधेरा वीरान कभी शहर नहीं हो जाता कोई … more →
दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ख्वाहिशें तो जिंदगी में बहुत होतीं हैं पर सभी नहीं होतीं पूरी जो होतीं भी हैं तो अधूरी पर कोई इसलिए … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपनी जरूरतों को पूरा करते हुए कर्ज के पहाड़ पर चढा गया ब्याज की सीढियों पर आसमान की तरह बढ़ता गया अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक पत्थर को रंग पोतकर अदभुत बताकर दिखाने की कोशिश लोहे को रंग लगाकर चमत्कारी बताने की कोशिश आदमी के … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने दिल के नगीने से सजाकर कितने भी तौह्फे दे दो इस ज़माने को कद्रदान कभी होगा नहीं खुश रहते हैं वही … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मुख से सिगरेट का धुँआ चहुँ और फैलाते हुए करते हैं शहर में फैले पर्यावरण प्रदूषण की शिकायत शराब के कई … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: तू लिख समाज में झगडा बढाने के लिए लिख शांति की बात लिखेगा तो तेरी रचना कौन पढेगा जहां द्वंद्व न होता … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने लिए बनाते हैं ऐसे सपनों के महल जो रेत के घर से भी कमजोर बन जाते हैं तेज रोशनी को जब देखते देखते … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब खामोशी हो चारों तरह तब भी कोई बोलता हैं हम सुनते नही उसकी आवाज हम उसे नहीं देखते पर वह हमें बैठा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: देश में कई लोग अभी भी टाँगे और बैलगाडी चलाते कई जगह हाथ रिक्शा भी खींचे हुए गरीब पसीना बहाते कई लोगो … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सास ने बहू से कहा ‘तुम्हें आज मायके जाने की अनुमति पर शाम ढलने से पहले घर लौट आना तेरे ससुर और … more →