Blogs about: Vyangy

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जमीन की जिन्दगी की हकीकत1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ख्वाहिशें तो जिंदगी में बहुत होतीं हैं पर सभी नहीं होतीं पूरी जो होतीं भी हैं तो अधूरी पर कोई इसलिए … more →

Tags: Blogroll, Hindi Poem, Hindi hasya, Hindi friends, hindi epatrika, web duniya, web dunia, hindi nai duinia, Deepak bharatdeep

ढूंढ नही पाता अपना वजूद

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपनी जरूरतों को पूरा करते हुए कर्ज के पहाड़ पर चढा गया ब्याज की सीढियों पर आसमान की तरह बढ़ता गया अ … more →

Tags: हिन्दी, कविता, व्यंग्य, साहित्य, हास्य, hasya, hindi, Internet

अपनी सोच से रास्ते बनते हैं

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक पत्थर को रंग पोतकर अदभुत बताकर दिखाने की कोशिश लोहे को रंग लगाकर चमत्कारी बताने की कोशिश आदमी के … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कविता, व्यंग्य, शेर, साहित्य, हास्य, हास्य कविता

भूल-भुलैया में फंस जाते हैं

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने दिल के नगीने से सजाकर कितने भी तौह्फे दे दो इस ज़माने को कद्रदान कभी होगा नहीं खुश रहते हैं वही … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, व्यंग्य, शायरी, शेर, साहित्य, हास्य, हास्य कविता

सिगरेट का धुआं छोड़ते हुए 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: मुख से सिगरेट का धुँआ चहुँ और फैलाते हुए करते हैं शहर में फैले पर्यावरण प्रदूषण की शिकायत शराब के कई … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कविता, पर्यावरण, व्यंग्य, शायरी, शेर, साहित्य

सबसे अलग हटकर लिख 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: तू लिख समाज में झगडा बढाने के लिए लिख शांति की बात लिखेगा तो तेरी रचना कौन पढेगा जहां द्वंद्व न होता … more →

Tags: Blogroll, Hindi hasya, Hindi friends, hindi journlism, hindi epatrika, Deepak bharatdeep, hindi bhasakar, hindi jagran, Dashboard

इससे अच्छा तो बुतों पर यकीन कर लें 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अपने लिए बनाते हैं ऐसे सपनों के महल जो रेत के घर से भी कमजोर बन जाते हैं तेज रोशनी को जब देखते देखते … more →

Tags: Blogroll, Hindi Poem, Hindi hasya, Hindi friends, hindi journlism, hindi web, hindi epatrika, web duniya, web dunia

जब अपने मन का सच बोलता है1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब खामोशी हो चारों तरह तब भी कोई बोलता हैं हम सुनते नही उसकी आवाज हम उसे नहीं देखते पर वह हमें बैठा … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कविता, व्यंग्य, साहित्य, हास्य, हिन्दी, Blogroll, Dashboard

गरीबी अपना वजूद नहीं खोती

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: देश में कई लोग अभी भी टाँगे और बैलगाडी चलाते कई जगह हाथ रिक्शा भी खींचे हुए गरीब पसीना बहाते कई लोगो … more →

Tags: Blogroll, अभिव्यक्ति, Thought, संपादकीय, व्यंग्य, bharat, साहित्य, Education, telent

सास-बहू का रिश्ता-हास्य कविता 2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: सास ने बहू से कहा ‘तुम्हें आज मायके जाने की अनुमति पर शाम ढलने से पहले घर लौट आना तेरे ससुर और … more →

Tags: arebic, बिंब-प्रतिबिंब, व्यंग्य, शायरी, शेर, शेर-ओ-शायरी, हिंदी साहित्य, bharat, Blogger


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