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Blogs about: Vyangya Kavita

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फरिश्ते होने का अहसास जताते-व्यंग्य कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: किताबों में लिखे शब्द कभी दुनियां नहीं चलाते। इंसानी आदतें चलती अपने जज़्बातों के साथ कभी रोना कभी ह … more →

Tags: दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, हिन्दी, Deepak bharatdeep, Family, Friends, hasya kavita, hasya vyang

रावण ने राम का नाम जपा-हास्य व्यंग्य कविता (mukh men ram, pas me ravan-hasya vyangya kavita)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सुनते हैं मरते समय रावण ने राम का नाम जपा इसलिये पुण्य कमाने के साथ स्वर्ग और अमरत्व का वरदान पाया। … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Blogging, Bloroll, Deepak bapu

सच का सामना और हास्य कवि-हास्य व्यंग्य कविता (face for trutu and hindi poet-hasya kavita1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: उन सज्जन ने सच की पहचान करने वाली मशीन की दुकान लगाई पर उसके उद्घाटन के लिये कोई तैयार नहीं हुआ भाई। … more →

Tags: abhivyakti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, समाज

जाम,आदर्श और कविता की शाम -हास्य कविता (jaam aur sham-hindi hasya kavita1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: एक पुराने कवि ने अपनी पहली कविता लिखने के दिवस को साहित्यक पदार्पण दिवस के रूप में मनाया। ढेर सारे ह … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, व्यंग्य कविता, Friends, समाज, मातृभाषा, मय, E-patrika, दीपकबापू

हांड़मांस के इंसान-हिंदी हास्य कविताएँ (insan aur nat-hasya kavita)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: पर्दे पर आंखों के सामने चलते फिरते और नाचते हांड़मांस के इंसान बुत की तरह लगते हैं। ऐसा लगता है कि जै … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द, समाज, साहित्य

बहस और बाजार-व्यंग्य कविता (bahas aur bazar-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: सभागार के तले मंच पर चले बहसों के दौर सुबह और शाम। दिन पर चले पर नतीजा सिफर छलकते हैं फिर भी रात को … more →

Tags: inglish, हिन्दी, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, Internet, Bloging, web duniya, web dunia

डरपोक और कमअक्ल -व्यंग्य कविता (akhri sach-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: डरपोक लोगों के समाज में बहादुर बाहर से किराये पर लाये जाते हैं. किसी गरीब को न देना पड़े मुआवजा इसलिए … more →

Tags: कविता, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, इंडिया, bharat, हिंदी साहित्य, Blogger, Blogging, arebic

सविता भाभी और कविता भाभी का झगड़ा-हास्य व्यंग्य (savita bhabhi aur kavita bhabhi ka jhagda) 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: कविता सजधज तैयार हो गयी। उसका पति कवि बाहर स्कूटर पर खड़ा उसका इंतजार कर रहा था। उसे तैयार होता देख स … more →

Tags: मस्त राम, मस्तराम, समाज, हिंदी, हिंदी आलेख, Blogger, Deepak bharatdeep, Friends, hasya vyang

समाज सुधार के लिये प्रचारात्मक प्रयास की आवश्यकता-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: समाज को सुधारने की प्रयास हो या संस्कृति और संस्कारों की रक्षा का सवाल हमेशा ही विवादास्पद रहा है। इ … more →

Tags: aritile in hindi, दीपक भारतदीप, हिंदी आलेख, हिन्दी, Blogger, Deepak bharatdeep, Hindi writing, web bhaskar, web bharat

परीक्षा परिणाम-हास्य व्यंग्य कविता 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: उतरा मूंह लेकर फंदेबाज घर आया और बोला- ‘दीपक बापू, बड़ा बुरा दिन आया हाईस्कूल के इम्तहान में मोहल्ले … more →

Tags: दीपक भारतदीप, समाज, हिन्दी, Family, Friends, hasya kavita, hasya vyang, Hindi writing, India

चांदी के कप की खातिर- हास्य व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: इतिहास में नाम दर्ज करने की अपनी ख्वाहिश पूरी करने के लिये वह किसी भी हद तक जाऐंगे। कहीं जिंदा आदमी … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, इंटरनेट, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, रचना, लेखक, व्यंग्य

गुलामी जैसी आज़ादी-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: नजरें फेरकर वह चले जाते हैं। देखने में लगते हैं हमसे बेपरवाह पर हकीकत यह है कि हमारी आंखों में उनको … more →

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‘‘मैं कुर्सी हूं, किसी की सगी नहीं’’-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: कुर्सी पर चाहे लिपिक लिखा हो या महाप्रबंधक बस वह मिलना चाहिए। अपने घर में जिस पर स्वयं बैठ सकें वह ल … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bharatdeep, E-patrika

चेहरे कब तक बनावटी सामान से सजाओगे-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: शोला कहो या शबनम मोहब्बत के जज्बातों के इजहार में हर लफ्ज़ है कम। मगर जिदंगी में सफर में खूबसूरत हमसफ … more →

Tags: hasya -vyangya, Kavita, Shayri, writer, Hindi writing, hindi kavita, India, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप

अपने अरमानों का बोझ ढोने वाला-व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: बड़े आदमी बनने के लिये सभी इंसान जूझ रहे हैं सदियां बीत गयी हैं पर कौन छोटा है या बड़ा सभी इस पहली स … more →

Tags: हिन्दी, अभिव्यक्ति, India, कविता, अनुभूति, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप, web dunia, web duniya

जोरदार और रंगीन तकदीर वह लिखा लाये-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: आसमान से जमीन पर आते हुए लिखा लाये हैं वह अपनी रंगीन तकदीर। न ख्याल उनका अपना न कोई सोच अपनी पर जमान … more →

Tags: hasya kavita, hasya vyang, aritile in hindi, Hindi writing, समाज, India, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप, web bhaskar

कवि भी अपनी पीड़ाओं से छिपता है-व्यंग्य शायरी

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: उसने कहा कवि से ‘तू क्यों कविता लिखता है सारे जमाने का दर्द समेट कर अपने शब्दों में अपनी ही पीड़ाओं … more →

Tags: writing, vyangya, inglish, व्यंग्य चिंतन, India, साहित्य, Internet, Urdu, क्षणिका

थप्पड़ मारकर सलाम तो किया-तीन क्षणिकायें

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: कुत्ता कहा तो क्या इनाम तो दिया आखिर गोरों ने दिया गुलाम की तरह व्यवहार किया तो क्या थप्पड़ मारकर सल … more →

Tags: hasya -vyangya, Kavita, hasya kavita, Shayri, hasya vyang, vyangya, writer, hindi article, Hindi writing

बेरंग हो गया मन, कैसे खेलते होली-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: पृथ्वी के भ्रुण में पानी की जगह हो गयी पोली । पिचकारी में रंग नहीं भरता, कैसे मनायें प्रियतम होली।। … more →

Tags: hasya kavita, writer, hindi article, Hindi writing, hindi kavita, Friends, Deepak bharatdeep, दीपक भारतदीप, web bhaskar


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