ब्लोगर उस दिन एक पार्क में घूम रहा था तो उसकी पुरानी प्रेमिका सामने आकर खडी हो गयी। पहले तो वह उसे पहचाना ही नहीं क्योंकि वह अब खाते-पीते घर के लग रही थी और जब वह उसके साथ तथाकथित प्यार (जिसे अलग होते… more →
दीपक भारतदीप की ई-पत्रिकादीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पहला ब्लोगर घर के दरवाजे से बाहर निकल ही रहा था की दूसरा ब्लोगर वहाँ पहुंच गया। उसे देखकर वह गया औ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ब्लोगर उस दिन एक पार्क में घूम रहा था तो उसकी पुरानी प्रेमिका सामने आकर खडी हो गयी। पहले तो वह उसे प … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक कहे आजादी की जंग दूसरा दे उसे आतंक का रंग आम आदमी ही होता है तंग नहीं होता वह पूर्व और पश्चिम क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज एक चैनल पर विभिन्न मनोरंजक चैनलों पर संगीत कार्यक्रमों में नृत्य और संगीत की प्रतियोगिताओ … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: बीस के शेर पचास में ढ़ेर जीतते हैं तो फुलाते सीना हारें तो कहें’समय का फेर’ समझाया था क्य … more →