यूही शाम ढलते तेरा चुपके से आना परदे के पीछे खड़ी होकर मासूम मुस्कुराना चाय का लुत्फ़ लेता अख़बार में खोया मैं हवाओ संग लफ़्ज़ों का कानो में गुनगुनाना हक़ीक़त थी तुम कभी,आज वक़्त का साया हो याद बह… more →
mehekmehhekk wrote 5 months ago: यूही शाम ढलते तेरा चुपके से आना परदे के पीछे खड़ी होकर मासूम मुस्कुराना चाय का लुत्फ़ लेता अख़बार … more →
mehhekk wrote 1 year ago: चाह कर भी रूक नही सकता अमर वो वक़्त हूँ छाया मिले निज संसार मैं धूप खड़ा दरख़्त हूँ सब कुछ पाकर भी च … more →
Roushan wrote 1 year ago: aaj bhi insaan insaan se nahi karte dosti dosti ke liye bhi woh dekhte hai dharam aur jaati insaan k … more →
mehhekk wrote 1 year ago: खुदा-ए-अज़ीज तेरे दर पे एक ही बड़ी चादर चढ़ाउँ तो काफ़ी होगी न वक़्त के साथ तुझसे माँगनेवालों की दुआ … more →
mehhekk wrote 1 year ago: 1.. जब संग तुम्हारे होती हूँ सनम ज़िंदगी की मंज़िले और भी करीब नज़र आती है | 2,, ये तन्हा … more →
mehhekk wrote 1 year ago: वक़्त की रफ़्तार वक़्त अपनी रफ़्तार में मुझे भी ढलने दो मैं भी एक जर्रा हूँ तेरे लम्हे से गिरा हुआ … more →
mehhekk wrote 1 year ago: वक़्त ही बाकी रह गया है अक्सर सुनती आई हूँ,वक़्त की कमी है | मेरी आँखों में बस, तेरी यादों की नमी है … more →