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Blogs about: Web Gwalior

नए अवतार का जाल-हास्य व्यंग्य कविता (naye avtar ka jaal-hindi hasya kavita

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फंदेबाज मिला रास्ते में और बोला ‘चलो दीपक बापू तुम्हें एक सम्मेलन में ले जायें। वहां सर्वशक्तिमान के … more →

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पिंजर से बाहर झांकता ज्ञान-आलेख चिंत्तन

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: उनके चेहरे पर बटन की तरह टंगी आंखें कपड़े और किताबों के पिंजर से बाहर झांकती दिखती है। ऐसा लगता है कि … more →

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भारत के शिक्षित लोगों का बौद्धिक अंतर्द्वंद्व -आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: भारत का शिक्षित वर्ग हमेशा ही मानसिक द्वंद्व में फंसा दिखता है जो पश्चात्य सभ्यता के समर्थन और विरोध … more →

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मधुशाला पसंद है पर मद्यपान नहीं -व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: हिंदी भाषा के महान कवि हरिबंशराय बच्चन ने मधुशाला लिखी थी। अनेक लोगों ने उसे नहीं पढ़ा। कई लोग ऐसे ह … more →

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ऑस्कर से कोई फिल्म दीवार और अभिनेता अमिताभ बच्चन तो नहीं बन सकता-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: भारत में अधिकतर लोगों को फिल्म देखने का शौक है और सभी की अपनी वय और समय के अनुसार पंसदीदा फिल्में और … more →

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अपनों की परवाह नहीं, परायों के लिए दीवानापन -व्यंग्य आलेख

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: मंदी से बाजार के ताकतवर सौदागर अधिक परेशान हो गये हैं। सभी जानते हैं कि प्रचार माध्यमों पर कही अप्रत … more →

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नए टीवी लाने की गलती नहीं करना-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: एक सज्जन ने दूसरे से कहा ‘‘यार, क्या तुम्हारे घर में ळाह सास बहु का रोज होता है झगड़ा हमारे यहां तो … more →

Tags: inglish, हास्य व्यंग्य, हास्य, व्यंग्य, लघुकथा, bharat, India, Friends, web dunia

कभी नहीं लगने देंगे नैया पार-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: बना लिया है पूरी दुनिया को उन्होंने अपना एक बड़ा बाजार चला रहे सभी जगह अपना व्यापार पर टुकड़ों में ब … more →

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कुछ पल आंसू बहाने के बाद सब भूल जाते हैं-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: अच्छा लगता है दूसरों की जंग की बात सुनकर पर आसान नहीं है खुद लड़ना दूसरों के घाव देखकर भले ही दर्द उ … more →

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निरर्थक बहसों में उलझे देश के बुद्धिजीवी-चिंतन आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: देश में आतंक के नाम पर निरंतर हिंसक वारदातें हो रहीं है पर आश्चर्य की बात यह है कि इसे धर्म,जाति,भाष … more →

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ब्रहमाण्ड का रहस्य जानने का प्रयास नाकाम तो होना ही था-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: महामशीन के रूप में चर्चित महादानवीय मशीन का प्रयोग अब रुक गया है। अगर आज के सभ्य समाज में महिमा मंडि … more →

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आतंकी हिंसा पर बुद्धिजीवियों की निरर्थक बहस-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक शवयात्रा में दो आदमी पीछे जा रहे थे एक ने कहा-‘बेकार आदमी था। किसी के काम का नहीं था’ दूसरे ने कह … more →

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किरायदार (भाग-१)

amitayu wrote 1 year ago: अप्रैल का महीना था, सर्दी की बर्फ अभी पूरी तरह पिघली नही थी, कहीं कहीं श्वेत बर्फ की चादर अभी भी पडी … more →

Tags: कहानी, कानपुर, कानपूर, भारत, विदेश, adhyatm, अध्यात्म, अनुभूति, अभिव्यक्ति

सोने का पिंजरा - (उधार भाग -२ - गतांक से आगे) The Golden Cage (Loan part 2)

amitayu wrote 1 year ago: एक माह कब निकल गया पता ही नही चला, हम अपने कार्य मे अत्यन्त मशरूफ रहे,  करते करते २ महीने गुज़र गए, … more →

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अभद्र शब्द संग्रह का विमोचन-हास्य व्यंग्य (hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: उस दिन ब्लागर अपने कमरे में बैठा लिख रहा था तभी उसे बाहर से आवाज सुनाई दी जो निश्चित रूप से दूसरे ब् … more →

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उधार - Loan

amitayu wrote 1 year ago: कडाके की सर्दी थी. बर्फ का साम्राज्य चारो ओर था. तापमान शून्य से १७ डिग्री नीचे था. बर्फ की आंधी चल … more →

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आखिर महादानव क्यों बना रहे हो भई-हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वैसे तो पश्चिम के लोग पूर्व के लोगों की खूब मजाक उड़ाते हैं कि वह शैतान और सर्वशक्तिमान के स्वरूपों … more →

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अध्यात्मिक गुरु जब मायावी ढांचे के बचाव में आगे आते हैं-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कल गुरुपूर्णिमा के दिन था और लोगों ने अपने हृदय में स्थित गुरुओं की पूर्जा अर्चना की। भारत में यह पर … more →

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आम पाठक की प्रतिक्रिया की बन सकती है अंतर्जाल लेखकों की प्रेरणा-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इस सप्ताह मैंने कोई ऐसा पाठ या रचना नहीं लिखी जिसकी चर्चा की जा सके। वजह यह रही कि बरसात के मौसम में … more →

Tags: Kavita, काव्य, कविता, चिन्तन, शायरी, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, hasya, vyangya


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