नारी स्वतंत्रता समिति की बैठक आनन फानन में बुलाई गयी। अध्यक्षा का फोन मिलते ही कार्यसमिति की चारों सदस्य उनके घर बैठक करने पहुंच गयी। चारों को देखकर अध्यक्षा बहुत खुश हो गयी और बोली-‘इसे कहते हैं सक्र… more →
*** दीपक भारतदीप की जागरण-पत्रिका*** ***mastram Deepak Bharatdeep ki hindi Jagran Patrika***दीपक भारतदीप wrote 11 hours ago: संतत संपति जानि कै, सबको सब कुछ देत दीन बंधु बिन दीन की, कौ रहीम सुधि लेत कविवर रहीम कहते हैं कि जिन … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: सरकारी अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी ने एक तीन साल के बच्चे के गले का आपरेशन कर दिया। उस बच्चे के गले … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: देश में प्रतिदिन ही महिलाओं के प्रति किये गये अपराध समाचारों की सुर्खियां बन रहे हैं। हालत यह हो ग … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: बंदर चाहे कितना भी बूढ़ा हो जाये गुलाट लगाना नहीं भूलता यही कुछ हालत हम भारतवासियों की है। कोई व्यसन … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: ‘एक के तीन’, और ‘दो के छह’ की आवाज कहीं भी सुन लें तो हम भारतीयों के कान खड़े हो जाते हैं यह सोचकर कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: शायद कुछ समाज सुधारकों को यह बुरा लगे पर सच यही है कि इस धरती पर पैदा हर जीव की नस्ल होती है और उसमे … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: आज बैठे ठाले अपने ब्लाग की पैज रैंक देखने का विचार आया तो पता लगा कि एक अन्य ब्लाग/पत्रिका ई7पत्रिका … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अगर किसी समुदाय का एक जोड़ा अपने किसी दूसरे समुदाय की रीति के अनुसार विवाह करता है तो क्या उस समुदाय … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: चतुराई हरि ना मिलै, ए बातां की बात एक निस प्रेमी निराधार का गाहक गोपीनाथ संत कबीरदास जी का आशय यह है … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: के अनुसार ———————– आस्रावयेदुपचितान् साधु दुष्टऽव्र … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: नीति विशारद चाणक्य कहते हैं कि ————————- हर्त ज्ञार … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: समाज को सुधारने की प्रयास हो या संस्कृति और संस्कारों की रक्षा का सवाल हमेशा ही विवादास्पद रहा है। … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: पीर सबन की एकसी, मूरख जाने नांहि अपना गला कटाक्ष के , भिस्त बसै क्यौं नांहि संत शिरोमणि कबीरदास जी क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: प्रारब्धानि यथाशास्त्रं कार्याण्यासनबुद्धिभिः। बनानीय मनोहारि प्रयच्छन्त्यचिसत्फलम्।। हिंदी में भावा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भूतपूर्व मजदूर की डायरी से-आलेख जिन लोगों ने जीवन में कभी मजदूरी या मेहनतकश बनकर पैसा नहीं कमाया उन … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: ‘जो जो कथै सुनै हरि कीरतन ता की दुरमति नासु।’ सगन मनोरथ पावै नानक पूरन होवै आसु।।’’ हिंदी में भावार् … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: क्यों डरे हो काफिला लुट गया फिर बनेगा। यह तूफान उड़ा ले गया तंबू फिर तनेगा। हार या जीत का चक्र चलता ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: वहां महफिल जमी हुई थी। अनेक विद्वान समाज की समस्याओं पर विचार करने के लिये एकत्रित हो गये थे। एक वि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भ्रान्तं देशमनेकदुर्गविषमं प्राप्तं न किंचित्फलं त्यकत्वा जातिकुलाभिमानमुचितं सेवा कृता निष्फला। भुक … more →