दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: उनके चेहरे पर बटन की तरह टंगी आंखें कपड़े और किताबों के पिंजर से बाहर झांकती दिखती है। ऐसा लगता है कि … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: हम खड़े हैं जहां छू रहा है चारों तरफ से डीजल और पेट्रोल का धुआं। कोई बात नहीं सब चलता है यह भी चलेगा … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: हर पल लोगों के सामने अपना कद बढाने की कोशिश हर बार समाज में सम्मान पाने की कोशिश आदमी को बांधे रहती … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: हिंदी में विभिन्न कालों की चर्चा बहुत रही है। सबसे महत्वपूर्ण स्वर्णकाल आया जिसमें हिंदी भाषा के लिय … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: अभी हाल ही में दक्षिण एशिया के देशों का एक साहित्यकार सम्मेलन संपन्न हुआ। इसमें भारत, पाकिस्तान,श्री … more →
दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: जब तक लगे न कहीं आग उनको चैन नहीं आता बुझाने के ठेकेदारों को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना होता आदमी अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: हिंदी भाषा के महान कवि हरिबंशराय बच्चन ने मधुशाला लिखी थी। अनेक लोगों ने उसे नहीं पढ़ा। कई लोग ऐसे ह … more →
दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: भारत में अधिकतर लोगों को फिल्म देखने का शौक है और सभी की अपनी वय और समय के अनुसार पंसदीदा फिल्में और … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: मंदी से बाजार के ताकतवर सौदागर अधिक परेशान हो गये हैं। सभी जानते हैं कि प्रचार माध्यमों पर कही अप्रत … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: एक सज्जन ने दूसरे से कहा ‘‘यार, क्या तुम्हारे घर में ळाह सास बहु का रोज होता है झगड़ा हमारे यहां तो … more →
दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: बना लिया है पूरी दुनिया को उन्होंने अपना एक बड़ा बाजार चला रहे सभी जगह अपना व्यापार पर टुकड़ों में ब … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: देश में आतंक के नाम पर निरंतर हिंसक वारदातें हो रहीं है पर आश्चर्य की बात यह है कि इसे धर्म,जाति,भाष … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: महामशीन के रूप में चर्चित महादानवीय मशीन का प्रयोग अब रुक गया है। अगर आज के सभ्य समाज में महिमा मंडि … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: एक शवयात्रा में दो आदमी पीछे जा रहे थे एक ने कहा-‘बेकार आदमी था। किसी के काम का नहीं था’ दूसरे ने कह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: वैसे तो पश्चिम के लोग पूर्व के लोगों की खूब मजाक उड़ाते हैं कि वह शैतान और सर्वशक्तिमान के स्वरूपों … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कल गुरुपूर्णिमा के दिन था और लोगों ने अपने हृदय में स्थित गुरुओं की पूर्जा अर्चना की। भारत में यह पर … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: इस सप्ताह मैंने कोई ऐसा पाठ या रचना नहीं लिखी जिसकी चर्चा की जा सके। वजह यह रही कि बरसात के मौसम में … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: जब आप किसी ऐसे विषय पर लिखते हैं जिसका संबंध लेखकों से होता है तो उसकी प्रतिक्रिया जन सामान्य में कम … more →