Blogs about: Web Nav Bharat

आपरेशन तो आसान है -हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: सरकारी अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी ने एक तीन साल के बच्चे के गले का आपरेशन कर दिया। उस बच्चे के गले … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मनोरंजन, मस्तराम, समाज, साहित्य

क्यों नहीं लिखते आत्मकथा-व्यंग्य 1 comment

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: बरसों पहले कृश्न चंदर का उपन्यास देख ‘एक गधे की आत्मकथा’। पूरा नहीं पढ़ा क्योंकि उसमें गधे का बोलना- … more →

Tags: हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, bharat, ताल-बेताल, अनुभूति, media, Education, Internet, Blogger

आंखों से परे का आकर्षण-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: पता नहीं कब कैसे इस देश में यह परंपरा शुरू हुई कि बाहर से जब तक आदमी प्रमाण पत्र नहीं मिले उसे घर मे … more →

Tags: Blogroll, inglish, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, साहित्य, Education, Friends, Blogging

भर्तृहरि शतक-बेइज्जती से भी भूख कहाँ मिटती है

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भ्रान्तं देशमनेकदुर्गविषमं प्राप्तं न किंचित्फलं त्यकत्वा जातिकुलाभिमानमुचितं सेवा कृता निष्फला। भुक … more →

Tags: आलेख, इंडिया, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, हिंदी साहित्य, हिन्दी, Blogger, Blogging

इन्सान जमीन पर कटते रहे-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: लुटता रहा पूरा शहर मगर लोग देखते रहे। ‘खराब ज़माना आ गया है’ एक दूसरे से बस यही कहते रहे। ‘बचाने के ल … more →

Tags: कविता, नज़रिया, शायरी, व्यंग्य, भारत, Education, Internet, शब्द, web duniya

इस ब्लाग/पत्रिका ने पार की 50 हजार पाठक संख्या पार-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: इस लेखक के वर्डप्रेस के इस ब्लाग द्वारा पचास हजार पाठ/पाठक संख्या पार करने पर बस इतना ही कहा जा सकता … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मनोरंजन, मस्तराम, संपादकीय, हिंदी आलेख

भर्तृहरि शतकः बेइज्जत होने पर भी भूख कहाँ मिटती है

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: राजा भर्तृहरि कहते हैं कि —————– भ्रान्तं देशमनेकदुर्गविषमं प्रा … more →

Tags: अभिव्यक्ति, आध्यातम, आलेख, कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, संस्कार, सत्संग, समाज

भर्तृहरि शतकः बुढ़ापे में भले काम की आदत नहीं पड़ सकती

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ———————– यावत्स्वस्थमिदं … more →

Tags: दीपक भारतदीप, दीपकबापू, शब्द, सत्संग, समाज, साहित्य, हिंदी आलेख, हिंदी साहित्य, हिन्दी

दूसरे के घर में लगी आग पर हाथ तापने का प्रयास-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: कुछ लोग हैं जो महिलाओं को अपने पुरुषों के अनाचारों के विरुद्ध भड़काते रहते हैं। यह मामला दायर कर दो। … more →

Tags: दीपकबापू, मस्तराम, शब्द, साहित्य, हिन्दी पत्रिका, Blogger, Blogging, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

पत्थर का बोझ-हास्य व्यंग्य कवितायेँ

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: प्रस्तर की इमारतों को दिखाकर वह उसका इतिहास बताते हैं सुनने वाले निहारते हुए स्वयं भी पत्थर हो जाते … more →

Tags: क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द, साहित्य, हास्य व्यंग्य

पहचान किसे चाहिये और क्यों? (चिंतन)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: ———————- भीड़ में पहचान बनाने की कोशिश! बिल्कुल निरर्थक है। … more →

Tags: inglish, India, yakeen, हिंदी साहित्य, media, Internet, Blogger, Blogging, शब्द

बहस की बजाय लोग लड़ना चाहते हैं -आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बहस होना जरूरी है क्योंकि किसी भी सामाजिक,आर्थिक और धार्मिक विषय पर प्रस्तुत निष्कर्ष अंतिम नहीं होत … more →

Tags: inglish, नज़रिया, अभिव्यक्ति, India, अनुभूति, हिंदी साहित्य, media, Education, Internet

ब्रेकिंग न्यूज (हास्य व्यंग्य)

दीपक भारतदीप wrote 3 months ago: चंदा लेकर समाज सेवा करने वाली उस संस्था के समाजसेवी बरसों तक अध्यक्ष रहे। पहले जब वह युवा थे तब उनक … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, हास्य व्यंग्य, हिंदी आलेख, हिंदी साहित्य, हिन्दी

शराब पीकर पिटा तो हीरो हो जायेगा -व्यंग्य कविता1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: पड़ौसन ने कहा उस औरत से ‘तुम्हारा आदमी रात को रोज शराब पीकर आता है पर तुम कुछ नहीं कहती वह आराम से … more →

Tags: दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, bharat, Blogger


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