अश्लीलता और श्लीतता में अंतर कितना रह गया है बस छह इंच के कपड़े का। क्यों इतना रोज छोड़ मचता है खत्म कर दो हर कायदा कोई पहने या न पहने लगा दो एक नारा चौराहे पर अपनी इज्जत की रक्षा खुद करें दूसरे में तब … more →
***दीपक भारतदीप की हिंदी पत्रिका*** ***Deepak Bharatdeep ki Hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: अश्लीलता और श्लीतता में अंतर कितना रह गया है बस छह इंच के कपड़े का। क्यों इतना रोज छोड़ मचता है खत्म क … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जब बहता था दरिया में पानी तब भला कौन वादा करता था उसे लाने का। कहीं बांध बनाये कहीं रास्ता बदला पानी … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अंतर्जाल पर लिखने के अलग ही अनुभव है। इनमें से कुछ अनुभव ऐसे हैं जो समाज की गतिविधियों से इस तरह परि … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आशिक ने माशुका को समझाया ‘‘मोबाईल पर इतनी बात मत करो मैं नहीं उठा सकता खर्चा हर हफ्ते कपड़े भी न मांग … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: सच बोलना कभी कभी ठीक नहीं लगता कड़वा जो होता। सोचता भी नहीं कोई दिमाग की हलचल को सुन न ले दीवारों के … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बरसात में सड़क पर चलते हुए जब पानी से भरे छोटे छोटे समंदर और कीचड़ के पहाड़ों से गिरता टकराता हूं। तब य … more →
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बरसात की बूंदें जैसे ही आकाश से जमीन पर आई। अकाल राहत सहायता समिति के सदस्यों के चेहरे पर चिंता घिर … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: किसी समय फिल्मों में पाश्र्व संगीत की सहायता से दृश्यों को भावपूर्ण बनाया जाता था। सामान्य स्थिति मे … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: भारतीय भाषाओं में सिंधी भाषा का भी अग्रणी स्थान रहा है पर किसी एक प्रदेश की भाषा न होने के कारण अब ल … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: सरकारी अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी ने एक तीन साल के बच्चे के गले का आपरेशन कर दिया। उस बच्चे के गले … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: भ्रान्तं देशमनेकदुर्गविषमं प्राप्तं न किंचित्फलं त्यकत्वा जातिकुलाभिमानमुचितं सेवा कृता निष्फला। भुक … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: लुटता रहा पूरा शहर मगर लोग देखते रहे। ‘खराब ज़माना आ गया है’ एक दूसरे से बस यही कहते रहे। ‘बचाने के ल … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: इस लेखक के वर्डप्रेस के इस ब्लाग द्वारा पचास हजार पाठ/पाठक संख्या पार करने पर बस इतना ही कहा जा सकता … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: राजा भर्तृहरि कहते हैं कि —————– भ्रान्तं देशमनेकदुर्गविषमं प्रा … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ———————– यावत्स्वस्थमिदं … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: कुछ लोग हैं जो महिलाओं को अपने पुरुषों के अनाचारों के विरुद्ध भड़काते रहते हैं। यह मामला दायर कर दो। … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: प्रस्तर की इमारतों को दिखाकर वह उसका इतिहास बताते हैं सुनने वाले निहारते हुए स्वयं भी पत्थर हो जाते … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: ———————- भीड़ में पहचान बनाने की कोशिश! बिल्कुल निरर्थक है। … more →
दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: बहस होना जरूरी है क्योंकि किसी भी सामाजिक,आर्थिक और धार्मिक विषय पर प्रस्तुत निष्कर्ष अंतिम नहीं होत … more →