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अश्लीलता और श्लीतता में अंतर-हिंदी हास्य व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: अश्लीलता और श्लीतता में अंतर कितना रह गया है बस छह इंच के कपड़े का। क्यों इतना रोज छोड़ मचता है खत्म क … more →

Tags: कला, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी, bharat, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

ऐसे ही अफसाने-हिंदी व्यंग्य कविता (bade log-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जब बहता था दरिया में पानी तब भला कौन वादा करता था उसे लाने का। कहीं बांध बनाये कहीं रास्ता बदला पानी … more →

Tags: कला, कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द

क्रिकेट मैच और हिंदी ब्लाग का आपसी रिश्ता-हास्य व्यंग्य (cricket match and hindi blog-hindi hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: अंतर्जाल पर लिखने के अलग ही अनुभव है। इनमें से कुछ अनुभव ऐसे हैं जो समाज की गतिविधियों से इस तरह परि … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

इश्क,मोबाइल और मंदी -हास्य व्यंग्य कविता (ishq mobil and economy-hindi comedy satire poem

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: आशिक ने माशुका को समझाया ‘‘मोबाईल पर इतनी बात मत करो मैं नहीं उठा सकता खर्चा हर हफ्ते कपड़े भी न मांग … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, शायरी, शेर, हिंदी साहित्य

सच बोलना कभी कभी ठीक नहीं होता-हिन्दी व्यंग्य कविता(truth and friends-hindi poem

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: सच बोलना कभी कभी ठीक नहीं लगता कड़वा जो होता। सोचता भी नहीं कोई दिमाग की हलचल को सुन न ले दीवारों के … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, India, अनुभूति, media, Internet, Blogger, शब्द

कल्पना से परे-हिंदी व्यंग्य कविता (kalpna se pare-hindi vyangya kavita

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बरसात में सड़क पर चलते हुए जब पानी से भरे छोटे छोटे समंदर और कीचड़ के पहाड़ों से गिरता टकराता हूं। तब य … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, व्यंग्य, India, अनुभूति, चिन्तन, Blogger, Blogging, क्षणिका

समाज सेवा में सदाबहार-हिन्दी हास्य कविता (social service-hindi comedy satire poem)

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: बरसात की बूंदें जैसे ही आकाश से जमीन पर आई। अकाल राहत सहायता समिति के सदस्यों के चेहरे पर चिंता घिर … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, हिन्दी शायरी

संगीत से सोच का अपहरण-आलेख(music in hindi film and tv)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: किसी समय फिल्मों में पाश्र्व संगीत की सहायता से दृश्यों को भावपूर्ण बनाया जाता था। सामान्य स्थिति मे … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, चरित्र, हिंदी साहित्य, साहित्य, Internet, Blogging

सिंधी भाषा का लिपि विवाद खत्म करना होगा-आलेख (hindi article on sindhi bhasha)

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: भारतीय भाषाओं में सिंधी भाषा का भी अग्रणी स्थान रहा है पर किसी एक प्रदेश की भाषा न होने के कारण अब ल … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मनोरंजन, मस्तराम, शब्द

आपरेशन तो आसान है -हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: सरकारी अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी ने एक तीन साल के बच्चे के गले का आपरेशन कर दिया। उस बच्चे के गले … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मनोरंजन, मस्तराम, समाज, साहित्य

भर्तृहरि शतक-बेइज्जती से भी भूख कहाँ मिटती है

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: भ्रान्तं देशमनेकदुर्गविषमं प्राप्तं न किंचित्फलं त्यकत्वा जातिकुलाभिमानमुचितं सेवा कृता निष्फला। भुक … more →

Tags: inglish, इंडिया, India, हिंदी साहित्य, Internet, Blogger, Blogging, web duniya, hindi sahitya

इन्सान जमीन पर कटते रहे-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: लुटता रहा पूरा शहर मगर लोग देखते रहे। ‘खराब ज़माना आ गया है’ एक दूसरे से बस यही कहते रहे। ‘बचाने के ल … more →

Tags: कविता, नज़रिया, शायरी, व्यंग्य, भारत, Education, Internet, शब्द, web duniya

इस ब्लाग/पत्रिका ने पार की 50 हजार पाठक संख्या पार-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: इस लेखक के वर्डप्रेस के इस ब्लाग द्वारा पचास हजार पाठ/पाठक संख्या पार करने पर बस इतना ही कहा जा सकता … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, संपादकीय, India, bharat, अनुभूति, Internet, web duniya, hindi thougnt

भर्तृहरि शतकः बेइज्जत होने पर भी भूख कहाँ मिटती है

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: राजा भर्तृहरि कहते हैं कि —————– भ्रान्तं देशमनेकदुर्गविषमं प्रा … more →

Tags: glogbal dashborad, अभिव्यक्ति, bharat, हिंदी साहित्य, media, Blogger, web duniya, hindi thougnt, web dunia

भर्तृहरि शतकः बुढ़ापे में भले काम की आदत नहीं पड़ सकती

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि ———————– यावत्स्वस्थमिदं … more →

Tags: inglish, India, हिंदी साहित्य, साहित्य, media, Education, Internet, Friends, शब्द

दूसरे के घर में लगी आग पर हाथ तापने का प्रयास-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: कुछ लोग हैं जो महिलाओं को अपने पुरुषों के अनाचारों के विरुद्ध भड़काते रहते हैं। यह मामला दायर कर दो। … more →

Tags: दीपकबापू, मस्तराम, शब्द, साहित्य, हिन्दी पत्रिका, Blogger, Blogging, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

पत्थर का बोझ-हास्य व्यंग्य कवितायेँ

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: प्रस्तर की इमारतों को दिखाकर वह उसका इतिहास बताते हैं सुनने वाले निहारते हुए स्वयं भी पत्थर हो जाते … more →

Tags: inglish, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, भारत, हिंदी साहित्य, साहित्य, media, Internet, Friends

पहचान किसे चाहिये और क्यों? (चिंतन)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: ———————- भीड़ में पहचान बनाने की कोशिश! बिल्कुल निरर्थक है। … more →

Tags: आध्यातम, आलेख, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, शब्द, हिंदी आलेख, हिंदी कहानी, हिंदी साहित्य

बहस की बजाय लोग लड़ना चाहते हैं -आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: बहस होना जरूरी है क्योंकि किसी भी सामाजिक,आर्थिक और धार्मिक विषय पर प्रस्तुत निष्कर्ष अंतिम नहीं होत … more →

Tags: inglish, नज़रिया, अभिव्यक्ति, India, अनुभूति, हिंदी साहित्य, media, Education, Internet


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