Blogs about: Web Navabharat

पिंजर से बाहर झांकता ज्ञान-आलेख चिंत्तन

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: उनके चेहरे पर बटन की तरह टंगी आंखें कपड़े और किताबों के पिंजर से बाहर झांकती दिखती है। ऐसा लगता है क … more →

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क्यों जंग का बिगुल बजा रहे हो-हिन्दी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अ … more →

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सब चलता है-हास्य व्यंग्य कविताएँ

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हम खड़े हैं जहां छू रहा है चारों तरफ से डीजल और पेट्रोल का धुआं। कोई बात नहीं सब चलता है यह भी चलेगा … more →

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झूठ भी सच की तरह सजाते-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हर पल लोगों के सामने अपना कद बढाने की कोशिश हर बार समाज में सम्मान पाने की कोशिश आदमी को बांधे रहती … more →

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इंटरनेट पर हिंदी का वैश्विक काल प्रारंभ हो चुका है-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: हिंदी में विभिन्न कालों की चर्चा बहुत रही है। सबसे महत्वपूर्ण स्वर्णकाल आया जिसमें हिंदी भाषा के लि … more →

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आदमी ख़ुद ही खिलौना बन जाता -हिंदी व्यंग्य शायरी

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: जब तक लगे न कहीं आग उनको चैन नहीं आता बुझाने के ठेकेदारों को ज्यादा देर इंतजार नहीं करना होता आदमी अ … more →

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मधुशाला पसंद है पर मद्यपान नहीं -व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: हिंदी भाषा के महान कवि हरिबंशराय बच्चन ने मधुशाला लिखी थी। अनेक लोगों ने उसे नहीं पढ़ा। कई लोग ऐसे ह … more →

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ऑस्कर से कोई फिल्म दीवार और अभिनेता अमिताभ बच्चन तो नहीं बन सकता-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: भारत में अधिकतर लोगों को फिल्म देखने का शौक है और सभी की अपनी वय और समय के अनुसार पंसदीदा फिल्में और … more →

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अपनों की परवाह नहीं, परायों के लिए दीवानापन -व्यंग्य आलेख

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: मंदी से बाजार के ताकतवर सौदागर अधिक परेशान हो गये हैं। सभी जानते हैं कि प्रचार माध्यमों पर कही अप्र … more →

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कुछ पल आंसू बहाने के बाद सब भूल जाते हैं-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 7 months ago: अच्छा लगता है दूसरों की जंग की बात सुनकर पर आसान नहीं है खुद लड़ना दूसरों के घाव देखकर भले ही दर्द उ … more →

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निरर्थक बहसों में उलझे देश के बुद्धिजीवी-चिंतन आलेख

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: देश में आतंक के नाम पर निरंतर हिंसक वारदातें हो रहीं है पर आश्चर्य की बात यह है कि इसे धर्म,जाति,भा … more →

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ब्रहमाण्ड का रहस्य जानने का प्रयास नाकाम तो होना ही था-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: महामशीन के रूप में चर्चित महादानवीय मशीन का प्रयोग अब रुक गया है। अगर आज के सभ्य समाज में महिमा मंडि … more →

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शायद ऐसे ही सजता है अखबार-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: हादसों की ख़बरों से भरा हुआ अख़बार ढूंढ रहे हैं शब्द लोग अपने दिल को लुभाने वाले विज्ञापनों से सजा र … more →

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श्रीगीता की अन्य धार्मिक ग्रंथों से तुलना करना ठीक नहीं-चिंतन hindu religion

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: धर्म को लेकर अब अधिक चर्चा हो रही है पर उसके मूल तत्वों के बारे में कम उससे मानने वाले लोगों के आचर … more →

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किरायदार (भाग-१)

amitayu wrote 9 months ago: अप्रैल का महीना था, सर्दी की बर्फ अभी पूरी तरह पिघली नही थी, कहीं कहीं श्वेत बर्फ की चादर अभी भी पडी … more →

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सोने का पिंजरा - (उधार भाग -२ - गतांक से आगे) The Golden Cage (Loan part 2)

amitayu wrote 9 months ago: एक माह कब निकल गया पता ही नही चला, हम अपने कार्य मे अत्यन्त मशरूफ रहे,  करते करते २ महीने गुज़र गए, … more →

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अभद्र शब्द संग्रह का विमोचन-हास्य व्यंग्य (hasya vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: उस दिन ब्लागर अपने कमरे में बैठा लिख रहा था तभी उसे बाहर से आवाज सुनाई दी जो निश्चित रूप से दूसरे ब् … more →

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उधार - Loan

amitayu wrote 10 months ago: कडाके की सर्दी थी. बर्फ का साम्राज्य चारो ओर था. तापमान शून्य से १७ डिग्री नीचे था. बर्फ की आंधी चल … more →

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आखिर महादानव क्यों बना रहे हो भई-हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: वैसे तो पश्चिम के लोग पूर्व के लोगों की खूब मजाक उड़ाते हैं कि वह शैतान और सर्वशक्तिमान के स्वरूपों … more →

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