Blogs about: Web Navbharat

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भ्रष्टाचार एक अदृश्य राक्षस--हिन्दी हास्य कविताएँ/शायरी (bhrashtachar ek adrishya rakshas-hindi hasya kavitaen)5 comments

दीपक भारतदीप wrote 2 years ago: भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने को सभी तैयार हैं पर उसके रहने की जगह तो कोई बताये, पैसा देखकर सभी की आंख बं … more →

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होली के अवसर पर विशेष लेख (special article on holi festival)11 comments

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: होली हमारे देश का एक परंपरागत त्यौहार है जो उल्लास से मनाया जाता रहा है। यह अलग बात है कि इसे मनाने … more →

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स्वयंवर का नया रूप-हिंदी हास्य कविता (svyanvar ka naya roop-hasya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: पति ने पत्नी से कहा ‘ बहुत कोशिश पर भी इतने दिनों में अपने बेटे की  शादी नहीं करवा पाये, कमाता … more →

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किसके चिल्लाने की बारी है-हिन्दी व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: भ्रष्टाचार, अत्याचार और व्याभिचार को भी जाति, भाषा और धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश जारी है, अक्लमं … more →

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कंप्यूटर विज्ञान का ज्ञाता कैसा हो-हिन्दी व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: अमेरिकन लोगों का विश्वास है कि अगला बिल गेट्स भारत या चीन में पैदा होगा। यह एक सर्वे करने वाली एक ऐज … more →

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यकीन बेचने वाले फरिश्ते-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: गरीब और भूखे के लिये रोटी एक सपना होती है, मगर भरे हैं जिनके पेट भूख भी भूत बनकर उनके पीछे होती है। … more →

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हिन्दी के ब्लाग क्रिकेट मैच से पिट जाते हैं-व्यंग्य चिंत्तन

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: वह हमारा मित्र है बचपन का! कल हम पति पत्नी उसे घर देखने गये। कहीं से पता लगा कि वह बहुत बीमार है और … more →

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मुद्दा कथा चोरी का-व्यंग्य आलेख (mudda katha chori ka-hindi lekh)

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: यह पेज पता नहीं उस लेखक के उपन्यास पर फिल्म बनी हैं या नहीं-जैसा कि वह दावा कर रहा है। बहरहाल फिल्म … more →

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कामयाबी का खिताब-हिन्दी व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago:  दिन भर अपने लिए साहब शब्द सुनकर वह रोज फूल जाते हैं। मगर उनके ऊपर भी साहब हैं जिनकी झिड़की पर व … more →

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इशारों के बंधन-हिन्दी व्यंग्य शायरी

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: हांड़मांस के बुत हैं इंसान भी कहलाते हैं, चेहरे तो उनके अपने ही है पर दूसरे का मुखौटा बनकर सामने आते … more →

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ज्योतिष, नववर्ष और सितारे- नये वर्ष पर विशेष लेख (hindi satire on new year 2010)

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: धरती के सितारों को अपने सितारों की फिक्र नहीं जितनी कि उनके चेहरे, अदायें और मुद्रायें बेचने वालों क … more →

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अमीर की विलासिता और गरीब की हाय-हिन्दी व्यंग कवितायें(amir ki vilasita-hindi vyang kavita)

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: बड़े लोगों की होती है बड़ी बातें। छोटा तो दिन में भी छोटी शर्म का काम करते भी घबड़ाये बड़ा आदमी गरियाता … more →

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विज्ञान और ज़माना-हिन्दी व्यंग्य शायरी (vigyan aur zamana)

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: धरती  का खुदा नहीं है बंदों से जुदा। फिर भी धरती को बचाने के लिये चंद लोग एकत्रित हो जाते हैं क … more →

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धर्म और कमाई-हास्य साहित्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago:   धर्म बन गयी है शय बेचा जाता है इसे बाज़ार में, सबसे बड़े सौदागर पीर कहलाते हैं. भूख, गरीबी, बे … more →

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हिन्दू धर्म संदेश-बड़ा वही है जो गरीब पर कृपा करे (garib par kripa karen-hindu dharm sandesh)2 comments

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: जे गरीब पर हित करै, ते रहीम बड़लोग कहाँ सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग कविवर रहीम कहते हैं जो छोटी औ … more →

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पिटने का व्यापार-हिन्दी व्यंग्य (pitne ka vyapar-hindi vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: एक चीनी ने अपना ऐसा धंधा प्रारंभ किया है जो यकीनन अनोखा है। ऐसा अनोखा धंधा तो कोई दूसरा हो ही नहीं स … more →

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चेहरा बदल जाता है, चाल नहीं-व्यंग्य कविता (Face turns, not tricks - satirical hindi poem)

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: इंसान के चेहरे बदल जाते हैं नहीं बदलती चाल। खून खराबा करने वाले हाथ बदल जाते हैं वही रहती तलवार और ढ … more →

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पैसे से गाडी खरीदी है रास्ता नहीं-व्यंग्य चिंतन

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: अब यह फिल्मों का ही प्रभाव कहा जा सकता है कि रास्ते पर गाड़ी चलाने वाले लड़के लड़कियां अपने आपको नायक न … more →

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वादा और इंतजार-व्यंग्य कविता (vada aur intzar-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 3 years ago: गिला शिकवा खूब किया दिन भर पूरे जमाने का फिर भी दिल साफ हुआ नहीं। इतने अल्फाज मुफ्त में खर्च किये फि … more →

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