Blogs about: Web Navbharat

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जो सभी को पसंद हो वही कहो -हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 2 days ago: प्रवचन करते समय गुरुजी ने भक्तों को समझाया। ‘‘भ्रष्टाचार करना होता बहुत बड़ा शाप दहेज समाज के लिये ह … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, लघुकथा, व्यंग्य, व्यंग्य कविता, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

छोटा आदमी, बड़ा आदमी-लघुकथा

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: वह शिक्षित बेरोजगार युवक संत के यहां प्रतिदिन जाता था। उसने देखा कि उनके आशीर्वाद से अनेक लोगों की … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, लघुकथा, व्यंग्य, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी

समाज और खानदान की छबि -दो व्यंग्य क्षणिकायें

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: जिन कहानियों में हर पल क्लेशी पात्र सजाये जाते उसी पर बने नाटक सामाजिक श्रेणी के कहलाते सच है समाज … more →

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सर्वशक्तिमान नहीं पैसा बनाता है जोड़ी-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: कौन कहता है ऊपर वाला ही बनाकर भेजता इस दुनियां में जोड़ी पचास साल के आदमी के साथ कैसे जम सकती है बा … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, Blogging, Blogroll, Deepak bapu

जज्बात की पतली धारा-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: पड़ौसन ने कहा उस औरत से ‘तुम्हारा आदमी रात को रोज शराब पीकर आता है पर तुम कुछ नहीं कहती वह आराम से … more →

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पाठ नंबर 3013-विशेष संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: अगर चिट्ठाजगत पर दर्ज आंकड़ों को सही मान लिया जाये तो इस लेखक का अंतर्जाल पर यह 3013वां पाठ होना चा … more →

Tags: inglish, अभिव्यक्ति, media, Internet, Bloging, Education, Blogging, मातृभाषा, bharat

ज़िंदगी के होते है अलग अलग रूप-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: हंसने की चाहत है जिसमें उसे चुटकुले सुनने का इंतजार नहीं होता अपनी करतूतों में ही छिपे होते है हंसने … more →

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यह बाजार के विज्ञापन का खेल-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: नववर्ष की पूर्व संध्या पर फंदेबाज अग्रिम बधाई देने घर आया और बोला ‘‘दीपक बापू, इधर कई बरसों से सांता … more →

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प्रतियोगिता से कहीं अधिक वजन जंग में आता है-लघु व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: अपने वाद्ययंत्रों के साथ सजधजकर वह घर से बाहर निकला और अपनी मां से बोला-‘‘मां, आशीर्वाद दो जंग पर जा … more →

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इससे तो उनकी यादें ही बेहतर थीं-हिंदी शायरी

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: उनके साथ गुजरे दिनों की याद पल पल सताती रही ख्वाबों में कई बार चेहरा आता और जाता रहा जब वह सामने आये … more →

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क्या आतंकी हिंसा अपराध शास्त्र से बाहर का विषय है-संपादकीय

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: एक शवयात्रा में दो आदमी पीछे जा रहे थे एक ने कहा-‘बेकार आदमी था। किसी के काम का नहीं था’ दूसरे ने कह … more →

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खास वर्ग के सुझाये मुद्दों से परे हटे बिना एकता संभव नहीं-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 10 months ago: उस दिन अफलातून जी ने अंतर्जाल पर सीधे वार्तालाप के दौरान उन्होंने अपने शैशव ब्लाग का एक पाठ पढ़ने के … more →

Tags: inglish, संपादकीय, Life, media, Internet, Education, online jurnalism, Family, Love

ब्लागवाणी जैसे हिट किसी के लिये भी सपना-आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: ब्लागवानी के लोग सही कहते हैं कि वह लोग शौकिया हैं पर उनको नहीं मालुम वह कई व्यवसायिक लोगों के लिये … more →

Tags: alekh, अभिव्यक्ति, कला, ताल-बेताल, मस्तराम, व्यंग्य, संपादकीय, समाज, हिन्दी

अपनी कविताओं से दूसरों के ईमेल कूड़ेदान की तरह नहीं सजाते-हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: दनदनाता आया फंदेबाज और बोला ‘दीपक बापू, आज मिल गया तुम्हारे हिट होने का मंतर अपने फ्लाप होने का दर्द … more →

Tags: inglish, कविता, हास्य व्यंग्य, व्यंग्य, Internet, क्षणिका, Urdu, Education, online jurnalism

एक ब्लाग गायब हुआ तो दूसरा प्रकट हो गया-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: अपने साफ्टवेयर की सहायता से वर्डप्रेस की पांच श्रेणियों को अपने यहां खिसकाकर ले जाने वाला ब् … more →

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आखिर वह ब्लाग परिदृश्य से गायब हो गया-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: आज वह ब्लाग गायब हो गया जो दूसरों के ब्लाग के पाठ चालाकी से अपने यहां ले जाकर अपने यहां सजा रहा था। … more →

Tags: alekh, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, मस्तराम, व्यंग्य, समाज, हास्य व्यंग्य, हिन्दी पत्रिका, Blogging

ब्लाग के पाठों पर ही अपनी पहचान लिखनी होगी-आलेख2 comments

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: आज मैं एक ब्लाग लेखक का ब्लाग पड़ रहा था जिसमें ब्लाग चोरों के साथ कुछ सहानुभुति दिखाने का आग्रह था। … more →

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अंतर्जाल पर चालाकियों का मुकाबला तो करना ही होगा-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ही अंतर्जाल लेखक ब्लागरों की शोषण की तैयारी पूरी हो चुकी है। इस काम में जुट … more →

Tags: inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, Internet, Bloging, Urdu, Education, Blogging, Friends

टेलीफोन की हड़ताल का तिलिस्म-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: देश की एक टेलीफोन कंपनी में कर्मचारियों की हड़ताल हो गयी तो उसके इंटरनेट प्रयोक्ताओं को भारी परेशानी … more →

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