टीवी पर सुनने को को मिला कि इंसाफ नाम का कोई वास्तविक शो चल रहा है जिसमें शामिल हो चुके एक सामान्य आदमी का वहां हुए अपमान के कारण निराशा के कारण निधन हो गया। फिल्मों की एक अंशकालिक नर्तकी और गायिका इस… more →
दीपकबापू कहिनwrote 2 years ago: भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने को सभी तैयार हैं पर उसके रहने की जगह तो कोई बताये, पैसा देखकर सभी की आंख बं … more →
wrote 3 years ago: होली हमारे देश का एक परंपरागत त्यौहार है जो उल्लास से मनाया जाता रहा है। यह अलग बात है कि इसे मनाने … more →
wrote 3 years ago: पति ने पत्नी से कहा ‘ बहुत कोशिश पर भी इतने दिनों में अपने बेटे की शादी नहीं करवा पाये, कमाता … more →
wrote 3 years ago: भ्रष्टाचार, अत्याचार और व्याभिचार को भी जाति, भाषा और धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश जारी है, अक्लमं … more →
wrote 3 years ago: अमेरिकन लोगों का विश्वास है कि अगला बिल गेट्स भारत या चीन में पैदा होगा। यह एक सर्वे करने वाली एक ऐज … more →
wrote 3 years ago: गरीब और भूखे के लिये रोटी एक सपना होती है, मगर भरे हैं जिनके पेट भूख भी भूत बनकर उनके पीछे होती है। … more →
wrote 3 years ago: वह हमारा मित्र है बचपन का! कल हम पति पत्नी उसे घर देखने गये। कहीं से पता लगा कि वह बहुत बीमार है और … more →
wrote 3 years ago: यह पेज पता नहीं उस लेखक के उपन्यास पर फिल्म बनी हैं या नहीं-जैसा कि वह दावा कर रहा है। बहरहाल फिल्म … more →
wrote 3 years ago: दिन भर अपने लिए साहब शब्द सुनकर वह रोज फूल जाते हैं। मगर उनके ऊपर भी साहब हैं जिनकी झिड़की पर व … more →
wrote 3 years ago: हांड़मांस के बुत हैं इंसान भी कहलाते हैं, चेहरे तो उनके अपने ही है पर दूसरे का मुखौटा बनकर सामने आते … more →
wrote 3 years ago: धरती के सितारों को अपने सितारों की फिक्र नहीं जितनी कि उनके चेहरे, अदायें और मुद्रायें बेचने वालों क … more →
wrote 3 years ago: बड़े लोगों की होती है बड़ी बातें। छोटा तो दिन में भी छोटी शर्म का काम करते भी घबड़ाये बड़ा आदमी गरियाता … more →
wrote 3 years ago: धरती का खुदा नहीं है बंदों से जुदा। फिर भी धरती को बचाने के लिये चंद लोग एकत्रित हो जाते हैं क … more →
wrote 3 years ago: धर्म बन गयी है शय बेचा जाता है इसे बाज़ार में, सबसे बड़े सौदागर पीर कहलाते हैं. भूख, गरीबी, बे … more →
wrote 3 years ago: जे गरीब पर हित करै, ते रहीम बड़लोग कहाँ सुदामा बापुरो, कृष्ण मिताई जोग कविवर रहीम कहते हैं जो छोटी औ … more →
wrote 3 years ago: एक चीनी ने अपना ऐसा धंधा प्रारंभ किया है जो यकीनन अनोखा है। ऐसा अनोखा धंधा तो कोई दूसरा हो ही नहीं स … more →
wrote 3 years ago: इंसान के चेहरे बदल जाते हैं नहीं बदलती चाल। खून खराबा करने वाले हाथ बदल जाते हैं वही रहती तलवार और ढ … more →
wrote 3 years ago: अब यह फिल्मों का ही प्रभाव कहा जा सकता है कि रास्ते पर गाड़ी चलाने वाले लड़के लड़कियां अपने आपको नायक न … more →
wrote 3 years ago: गिला शिकवा खूब किया दिन भर पूरे जमाने का फिर भी दिल साफ हुआ नहीं। इतने अल्फाज मुफ्त में खर्च किये फि … more →