Blogs about: Web Nayi Duniya
जो समझ में आया वही लिख दिया-आलेख
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दीपक भारतदीप wrote 13 hours ago: मेरे मित्र और उड़न तश्तरी ब्लाग के लेख … more »
पसीना ही कविता लिखवाता है
दीपक भारतदीप wrote 2 days ago: बदलते मौसम के साथ मन भी यूं बदल जाता है … more »
हिंदी-अंग्रेजी टूल बहुत दिलचस्प लगा-आलेख (2)
दीपक भारतदीप wrote 6 days ago: हिंदी -अंग्रेजी अनुवाद टूल का मैं कल स … more »
यह टूल मुझे तो दिलचस्प लगा-आलेख It is interesting tool, I thought - Stories
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: मेरी आदत है कि आते ही अपने ईमेल पर चिट् … more »
नकली जिंदगी की खातिर-हास्य कविता
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दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: फिल्मों में ही होता है चक दे इंडिया सच … more »
हम कहां जा रहे हैं-आलेख
दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: आज जब हिन्दी ब्लाग दिखाने वाले फोरमों … more »
कभी-कभी ऐसा भी होता है-आलेख
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: अगर देखा जाये तो ब्लागवाणी … more »
कमरे के अंदर-बाहर की राजनीति होती हैं अलग-अलग-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: सभाकक्ष से बाहर निकलते ही फंदेबाज जोर … more »
'मेरा परिचय' में क्या रखा है-आलेख
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: आज वर्डप्रेस के नवीनीकृत डेशबोर्ड पर … more »
वर्डप्रेस के डेशबोर्ड की अब नये ढंग से प्रस्तुति-आलेख
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: वर्डप्रेस के ब्लाग का डेशबोर्ड अब नई … more »
देखते-देखते बीत गया एक साल-आलेख
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मैने आज अपने ब्लाग देखे। 4 अप्रैल 2007 को … more »
अब बंद हो गया हकलाते हुए लिखना
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मुझे लग रहा है कि जैसे आज से अंतर्जाल … more »
अंतर्जाल पर उन्मुक्त जी का छुट-पुट विचरण-समीक्षा
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: क्या आप उन्मुक्त जी को जानते हैं? मैं भ … more »
शब्द ही हमारे मित्र और गुरु-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कलम और दवात लेकर जब निकले थे घर से तो नह … more »
पिछले वर्ष होली पर लिखा अब पढें
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: पिछले वर्ष की होली पर मैं अपने ब्लोग ब … more »
जब आम पाठक ही तय करेंगे अपनी पसंद
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: इस दुनिया में लेखन एक ऐसा कार्य है जिस … more »
ब्लोग पर हिट्स:कितने सच्चे और कितने फर्जी
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दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: मेरे लिए कोई भी हिन्दी ब्लोग का फोरम ख … more »
शब्दों के भाव भी कम रंगीन नहीं होते-हास्य व्यंग्य
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: इसमें कोई संदेह नहीं है की पिछले कुछ द … more »
दिल से सम्मान करे वही है सच्चा वीर-हास्य कविता
दीपक भारतदीप wrote 2 months ago: फटे हुए कपडे पहने चक्षुओं से अश्रु प्र … more »
