Blogs about: Web Pajab Kesari

लड़की, लड़का और गिरगिट की नज़र-हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: शाम का समय था और उन शराब के नशे में धुत उन दोनों लड़कों में एक ने राह पर अकेले जा रही उस लड़की का ह … more →

Tags: कला, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, हंसना, हास्य व्यंग्य, bharat, Dashboard, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

लेखक लिखने के ही नहीं पढने के भी भूखे होते हैं-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: क्या लेखक केवल लिखने के ही भूखे होते हैं? अधिकतर लोग शायद यही कहेंगे कि ‘हां’। यह बात नहीं है। सच त … more →

Tags: writing, Global Dashboard, inglish, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, अनुभूति, आलेख

बड़ा कौन, कलम कि जूता-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: देश के बुद्धिजीवियों का एक गोलमेज सम्मेलन बुलाया गया था। गोलमेज सम्मेलन का विषय था कि ‘जूता बड़ा कि … more →

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हिंदू विचारधारा:भारतीय और अफ़गानी-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: एक बात निश्चित है कि धर्म नितांत एक निजी विषय है और उस पर सार्वजनिक विषय पर चर्चा करना केवल एक दिखाव … more →

Tags: Blogroll, writing, inglish, संपादकीय, India, इंडिया, भारत, अनुभूति, आलेख

इसलिये तो गुरू हैं-लघु हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 8 months ago: गुरुजी टूथपेस्ट कर रहे थे और खास चेला पास में खड़ा था। गुरुजी ने पूछा-‘बाहर की क्या खबर है?’ चेले ने … more →

Tags: writing, inglish, अभिव्यक्ति, सूचना, हास्य व्यंग्य, अनुभूति, आलेख, साहित्य, Internet

बुद्धिजीवी समझाते है,पर समाज समझता नहीं-व्यंग्य आलेख1 comment

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: बहुत दिन से हमारे दिमाग में यह बात नहीं आ रही कि आखिर कौन किसको क्या और क्यों समझा रहा है? कब समझा … more →

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भारतीय भाषा दिवसः एक फ्लाप लेखक का विशेष संपादकीय2 comments

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: लोग आज इसे हिंदी दिवस कह रहे हैं पर एक हिंदी विद्वान का मत है कि इसे भारतीय भाषा दिवस के रूप में मना … more →

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अंतर्जाल पर विधा नहीं बल्कि कथ्य महत्वपूर्ण है-विशेष संपादकीय3 comments

दीपक भारतदीप wrote 9 months ago: आज यह दूसरा ब्लाग/पत्रिका है जिसने 30 हजार पाठ/पाठक संख्या को पार किया। इससे पहले हिंदी पत्रिका ने इ … more →

Tags: abhivyakti, Anubhuti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, कला, चिन्तन, दीपक भारतदीप, मस्तराम

विभिन्न समाजों का पुराने ढर्रे पर चलना अब कठिन-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: जाति, धर्म, भाषा और वर्ण के आधार पर हमारे देश में अनेक वर्षों से संगठित समाज चले आ रहे हैं और इसकी आ … more →

Tags: Blogroll, writing, inglish, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, सूचना, अनुभूति, आलेख

चमत्कार को नमस्कार, सहजता से कोई नहीं सरोकार-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 11 months ago: इस प्रथ्वी पर जीवन अपनी सहज धारा से बहता जाता है। अनेक आपदायें इस प्रथ्वी पर आती हैं पर फिर सब कुछ स … more →

Tags: Blogroll, writing, vyangya, aastha, inglish, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, आस्था, आध्यात्म

जब टूटता है सन्नाटा-हिंदी शायरी2 comments

दीपक भारतदीप wrote 12 months ago: जब जज्बातों में आता ठहराव तब शब्द खामोश हो जाते स्तब्ध मन सन्नाटे में ताकता है उस समय न सोचना अच् … more →

Tags: inglish, कविता, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, साहित्य, हिंदी साहित्य, media, film

इस ब्लाग/पत्रिका की पाठक संख्या 25 हजार के पार-विशेष संपादकीय2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: आज मेरा यह ब्लाग@पत्रिका पाठक संख्या 25 हजार पार कर गया। वेसे देखा जाये कि यह कोई बड़ी बात नहीं है। … more →

Tags: Blogroll, writing, हिन्दी, inglish, संपादकीय, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, सूचना

कीचड़ उछालने पर मिठाई मिलेगी सोचा न था-हास्य व्यंग्य1 comment

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: ब्लागर साइकिल चलाता हुआ घर पहुंचा तो पत्नी ने उसे देखते ही पूछा-‘क्या कहीं कीचड़ में गिर गये थे जो … more →

Tags: vyangya, inglish, अभिव्यक्ति, India, हास्य व्यंग्य, आलेख, साहित्य, हिंदी साहित्य, Internet

मानते नहीं तो फिर पत्थर क्यों उड़ाते-कविता2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: कहते हैं पत्थर के बुतों में भगवान नहीं मानेंगे पर भगवान के बुत उड़ाने पहुंच जाते जवाब नहीं देना इसल … more →

Tags: abhivyakti, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, भारत, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, शायरी, शेर

बनते बिगड़ते हैं रंग और इंसान -कविता3 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: पल रंग बदलती दुनियां में रिश्ते भी बदलते हैं रंंग जो सारी उमर साथ चलने का एलान करते सरेआम वह कभी नही … more →

Tags: abhivyakti, arebic, अभिव्यक्ति, आलेख, कविता, क्षणिका, चिन्तन, दीपक भारतदीप, मस्तराम

ब्लाग गिरा सकता है, भाषा की दीवारें-आलेख2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 year ago: अंतर्जाल पर छद्म मित्रों और आलोचकों ने मेरी सोच को बहुत संकीर्ण बना दिया है। इसलिये अगर अपने ब्लाग/ … more →

Tags: abhivyakti, आलेख, कला, चिन्तन, दीपक भारतदीप, भाषा, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, संपादकीय

कुछ सच कुछ झूठ-लघु कथा

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: शादी में वह बच्चा अपने मां बाप और दादा के साथ गया। शादी उच्च घराने की थी। वहां तमाम तरह का तामझाम थ … more →

Tags: चिन्तन, दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन, सृजन, हंसना, हास्य व्यंग्य

आशीर्वाद-लघुकथा2 comments

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: वह युवक गरीब था तब संत के पास जाता था। वह उनके यहां आश्रम की साफ सफाई करता और फिर अपने काम पर चला ज … more →

Tags: दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, मस्तराम, समाज, साहित्य, सृजन, हिन्दी, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

व्यक्ति में चेतना लाने से ही समाज जागृत होगा-चिंतन

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अक्सर यह सुनने को मिलता है कि ‘महाभारत घर में नहीं रखना चाहिए क्योंकि इससे क्लेश होता है’। हो सकता … more →

Tags: abhivyakti, Anubhuti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, संपादकीय


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