Blogs about: Web Times

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जो सभी को पसंद हो वही कहो -हास्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 16 hours ago: प्रवचन करते समय गुरुजी ने भक्तों को समझाया। ‘‘भ्रष्टाचार करना होता बहुत बड़ा शाप दहेज समाज के लिये ह … more →

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आपरेशन तो आसान है -हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 4 days ago: सरकारी अस्पताल में एक सफाई कर्मचारी ने एक तीन साल के बच्चे के गले का आपरेशन कर दिया। उस बच्चे के गले … more →

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छोटा आदमी, बड़ा आदमी-लघुकथा

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: वह शिक्षित बेरोजगार युवक संत के यहां प्रतिदिन जाता था। उसने देखा कि उनके आशीर्वाद से अनेक लोगों की … more →

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फिर छाने लगा है क्रिकेट का बुखार-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: बंदर चाहे कितना भी बूढ़ा हो जाये गुलाट लगाना नहीं भूलता यही कुछ हालत हम भारतवासियों की है। कोई व्यसन … more →

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समाज और खानदान की छबि -दो व्यंग्य क्षणिकायें

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: जिन कहानियों में हर पल क्लेशी पात्र सजाये जाते उसी पर बने नाटक सामाजिक श्रेणी के कहलाते सच है समाज … more →

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नस्लवाद और गुणों का स्वरूप-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 3 weeks ago: शायद कुछ समाज सुधारकों को यह बुरा लगे पर सच यही है कि इस धरती पर पैदा हर जीव की नस्ल होती है और उसमे … more →

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चौथे ब्लाग ने भी अर्जित किये चार अंक-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: आज बैठे ठाले अपने ब्लाग की पैज रैंक देखने का विचार आया तो पता लगा कि एक अन्य ब्लाग/पत्रिका ई7पत्रिका … more →

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समूह की गुलामी से मुक्ति ही है असली आज़ादी-चिंत्तन आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अगर किसी समुदाय का एक जोड़ा अपने किसी दूसरे समुदाय की रीति के अनुसार विवाह करता है तो क्या उस समुदाय … more →

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संत कबीर वाणी-दीनानाथ तो निराधार के ग्राहक हैं

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: चतुराई हरि ना मिलै, ए बातां की बात एक निस प्रेमी निराधार का गाहक गोपीनाथ संत कबीरदास जी का आशय यह है … more →

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कौटिल्य का अर्थशास्त्र-दुष्ट अमीर शासन को परेशान करता है

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: के अनुसार ———————– आस्रावयेदुपचितान् साधु दुष्टऽव्र … more →

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समाज सुधार के लिये प्रचारात्मक प्रयास की आवश्यकता-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: समाज को सुधारने की प्रयास हो या संस्कृति और संस्कारों की रक्षा का सवाल हमेशा ही विवादास्पद रहा है। … more →

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मेहनतकश की कलम से-चिंतन आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भूतपूर्व मजदूर की डायरी से-आलेख जिन लोगों ने जीवन में कभी मजदूरी या मेहनतकश बनकर पैसा नहीं कमाया उन … more →

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टेलीफोन की हड़ताल का तिलिस्म-व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: देश की एक टेलीफोन कंपनी में कर्मचारियों की हड़ताल हो गयी तो उसके इंटरनेट प्रयोक्ताओं को भारी परेशानी … more →

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बदलाव-हास्य व्यंग्य

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: वहां महफिल जमी हुई थी। अनेक विद्वान समाज की समस्याओं पर विचार करने के लिये एकत्रित हो गये थे। एक वि … more →

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दोनों ब्लॉग ज़ब्त होना चिंता का विषय नहीं-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: दूसरे का मामला हो तो दिलचस्प हो जाता है पर जब स्वयं उससे जुड़े हों तो चिंताजनक लगता है। यही इस लेखक … more →

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विदुर नीति-जैसे दिल में ख्याल होते हैं वैसे ही बनता है नज़रिया

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: द्वेषो न साधुर्भवति न मेधावी न पण्डित। प्रिये शुभानि कार्याणि द्वेष्ये पापानि चैव ह।। हिंदी में भावा … more →

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भर्तृहरि शतक-बेइज्जती से भी भूख कहाँ मिटती है

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भ्रान्तं देशमनेकदुर्गविषमं प्राप्तं न किंचित्फलं त्यकत्वा जातिकुलाभिमानमुचितं सेवा कृता निष्फला। भुक … more →

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गूगल ने दो हिन्दी ब्लाग जब्त किये-आलेख

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: गूगल ने इस लेखक के दो ब्लाग को बिना किसी पूर्व चेतावनी और सूचना के हटा दिया है। यह दो ब्लाग हैं सिंध … more →

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बिना मेकअप के अभिनय-हास्य व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: फिल्म का नाम था ‘नौकरानी ने बनी रानी’ जोरदार थी कहानी। निर्देशक ने अभिनेत्री से कहा ‘आधी फिल्म में म … more →

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