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पैसे से गाडी खरीदी है रास्ता नहीं-व्यंग्य चिंतन

दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: अब यह फिल्मों का ही प्रभाव कहा जा सकता है कि रास्ते पर गाड़ी चलाने वाले लड़के लड़कियां अपने आपको नायक न … more →

Tags: अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य कविता, संपादकीय, हास्य व्यंग्य, हिन्दी, Deepak bapu

ईमानदारी में गज़ब कैसा-हिन्दी हास्य व्यंग्य (imandari men gazab- hindi vyangya)

दीपक भारतदीप wrote 5 days ago: सप्ताह में उस दुकान से एक बार तो बेकरी का सामान जरूर खरीदते हैं। ऐसा बरसों से चल रहा है। वह दुकानदार … more →

Tags: abhivyakti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य चिंतन

वादा और इंतजार-व्यंग्य कविता (vada aur intzar-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: गिला शिकवा खूब किया दिन भर पूरे जमाने का फिर भी दिल साफ हुआ नहीं। इतने अल्फाज मुफ्त में खर्च किये फि … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, व्यंग्य कविता, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

युद्ध और सत्संग-व्यंग्य कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: धर्म के लिए अब नहीं होता सत्संग हर कोई लड़ रहा है, उसके नाम पर जंग. किताबों के शब्द का सच अब तलवार स … more →

Tags: अभिव्यक्ति, कविता, ताल-बेताल, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, दृश्य, मस्तराम, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका

सामूहिक ठगी का मतलब-व्यंग्य चिंत्तन (samuhik thagi ka matlab-vyangya lekh)

दीपक भारतदीप wrote 1 week ago: एक के बाद एक सामूहिक ठगी की तीन वारदातें टीवी चैनलों और समाचार पत्रों की सुर्खियां बन गयी हैं। आप यह … more →

Tags: aritile in hindi, दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, समाज, हिन्दी, Deepak bharatdeep, hasya -vyangya, hindu thinking

प्रजातंत्र में ब्लॉग की महत्वपूर्ण भूमिका-हिंदी लेख (democracy and hindi blog-hindi article)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: भारत में इंटरनेट प्रयोक्ताओं की संख्या सात करोड़ से ऊपर है-इसका सही अनुमान कोई नहीं दे रहा। कई लोग इस … more →

Tags: Anubhuti, अनुभूति, अभिव्यक्ति, आलेख, दीपक द्वारा, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, साहित्य

समाज को नकली नायकों के महिमा मंडन बचना होगा-चिंत्तन आलेख (nakali naykon ka mahim mandan-hindi lekh)

दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: भारतीय अध्यात्मिक ज्ञान में व्यक्ति को सदैव सकारात्मक सोच की प्रेरणा दी जाती है। इसके पीछे मुख्य कार … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, संपादकीय

रौशनी करने का सदियों पुराना अभियान-व्यंग्य कविता (raushni ka abhiyan-vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: दीपावली पर घर में आले में बने मंदिर से लेकर गली के नुक्कड़ तक प्रकाश पुंज सभी ने जला दिये। अंतर्मन मे … more →

Tags: दीपक भारतदीप, दीपकबापू, व्यंग्य कविता, शायरी, सूचना, हिन्दी, हिन्दी पत्रिका, Deepak bapu, Deepak bharatdeep

गुलाम कर रहे राज़-त्रिपदम (gulam kar rahe raj-tripadam)

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: गुलाम राज कर रहे हैं यहां गुलाम पर। कोई छोटा है कोई उससे बड़ा यूं नाम भर। हुक्म चले नहीं पहुंचता है म … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, साहित्य, सृजन, हिन्दी

असली नकली पुरस्कार-हिंदी हास्य व्यंग्य (hindi comedy satire on prize)1 comment

दीपक भारतदीप wrote 4 weeks ago: समाज सेवाध्यक्ष जी ने अपनी बाहें टेबल पर टिकाई अपना मूंह हथेलियों पर रखने को बाद अपने सात सभासदों की … more →

Tags: arebic, अभिव्यक्ति, आध्यात्म, आलेख, इनाम, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भाषा

ऐसे ही अफसाने-हिंदी व्यंग्य कविता (bade log-hindi vyangya kavita)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: जब बहता था दरिया में पानी तब भला कौन वादा करता था उसे लाने का। कहीं बांध बनाये कहीं रास्ता बदला पानी … more →

Tags: कला, कविता, क्षणिका, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य, शब्द

हिंदी अध्यात्म सन्देश-बुरे काम से दूर होकर ही अच्छाई समझना संभव (hindu adhyatm sandesh)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अर्थसिद्धि परामिच्छन् धर्ममेवादितश्चरेत्। न हि धर्मदपैत्यर्थः स्वर्गलोकादिवामृतम्।। हिंदी में भावार् … more →

Tags: arebic, अनुभूति, अभिव्यक्ति, चिन्तन, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, मस्तराम, समाज, हिन्दी

शोर और शांति-हिन्दी कविता (shor aur shanti)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: शोर कर रही भीड़ में शांति कराने के लिये बहुत तेज आवाज में शोर मचाओगे तो तुम भी शांति के मसीहा हो जाओग … more →

Tags: अनुभूति, अभिव्यक्ति, कला, कविता, दीपक भारतदीप, दीपकबापू, भारत, मस्तराम, व्यंग्य

सौदागरों के बुत-व्यंग्य शायरी

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अख़बारों में छपे बड़े बड़े शख्सों के बयान अब आखों से आगे बढ़कर दिल की गहराई में नहीं जाते. ढेर सारा … more →

Tags: दीपक भारतदीप, मस्त राम, मस्तराम, समाज, हिन्दी, Deepak bharatdeep, India, inglish, web bhaskar

कड़वा सच बोलकर क्यों संताप सहो-हिंदी कविता

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: कहो कुछ भी करो कुछ और। बन जाओगे जमाने के सिरमौर। सभी को सुनने में अच्छा लगे ऐसे शब्द अपने मुख से कहो … more →

Tags: inglish, हिन्दी, अभिव्यक्ति, शायरी, व्यंग्य, Life, Internet, Blogging, समाज

नोबल और ग्लोबल-व्यंग्य आलेख (noble and global-hindi satire)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अमेरिका के राष्ट्रपति श्री बराक ओबामा को शांति के लिये नोबल पुरस्कार मिलने पर स्वयं उनको ही बहुत बड़ा … more →

Tags: हिन्दी, inglish, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, अनुभूति, आलेख, हिंदी साहित्य

बुढ़ापे में कुछ नहीं सीख सकते-हिन्दू अध्यात्मिक संदेश (In old age can not learn anything - Hindu spiritual message)

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————— यावत्स्वस्थमिदं शरीरमरुजं याव … more →

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शिशुओं का क्रीड़ाश्रम और मिठाई-हिन्दीहास्य व्यंग (child story and sweats-hindi vyanga

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: सुबह दीपक बापू सड़कों पर पानी से भरे गड्ढों में गिरने से बचते हुए जल्दी जल्दी ही आलोचक महाराज के घर प … more →

Tags: writing, हिन्दी, vyangya, inglish, व्यंग्य चिंतन, अभिव्यक्ति, India, हास्य व्यंग्य, अनुभूति

द्युतक्रीड़ा से पूरा विश्व शिकार-हास्य व्यंग्य (jua ke shikar duniyan

दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: राजा नल ने जुआ खेली और उसमें हारने पर राज्य और परिवार त्यागकर वन में जाकर दूसरे की सेवा करनी पड़ी। अत … more →

Tags: हिन्दी, inglish, अभिव्यक्ति, चिन्तन, India, हास्य व्यंग्य, आलेख, हिंदी साहित्य, Internet


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