अजब जाला है डोरियों का एक डोर का छोर जाने और कितनी डोरियों से जुड़ा है… डोरियाँ कुछ मानूस जानी-पहचानी-सी मगर फिर भी अंजान जाने मुझसे उलझ जायें या सुलझा दें मुझे जो भी हो मुझे तो उनसे इक बार बँधक… more →
तख़लीक़-ए-नज़रउन्मुक्त wrote 4 months ago: इस चिट्ठी में वेब के इतिहास, उसके आविष्कार, उसके भविष्य, उसके कारण उठ रही मुश्किलों, सवालों, कानूनी … more →
उन्मुक्त wrote 5 months ago: अन्तरजाल पर कॉपीराइट का उल्लंघन रोकना मुश्किल है। इसको रोकने के लिये नये नये तरीके ढूंढे जा रहे नये … more →