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खिली-खिली महकी बहारें हैं
खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहते शिकारें हैं ठण्डी-ठण्डी सौंधी हवाएँ … more »
तख़लीक़-ए-नज़र
खिली-खिली महकी बहारें हैं
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विनय प्रजापति wrote 5 days ago: खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहत … more »
तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन
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विनय प्रजापति wrote 1 month ago: तुम्हारी ख़ुशबू से महक उठा है मन तुम्ह … more »
नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में … more »
तेरी जगह कौन ले सकता है
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तेरी जगह कौन ले सकता है मेरे जीवन में त … more »
मैं हूँ चाँद है तुम भी होगी कहीं
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मैं हूँ, चाँद है, तुम भी होगी कहीं मैं द … more »
तुमको सबसे सच्ची दोस्ती मिले
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: तुमको ज़िन्दगी की हर ख़ुशी मिले तेरे लब … more »
हाल तेरा कहीं मैंने तुझसे बेहतर जाना
विनय प्रजापति wrote 5 months ago: हाल तेरा कहीं मैंने तुझसे बेहतर जाना प … more »
बेक़रार है उदास है बिन तुम्हारे...
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: मेरी ज़िन्दगी में धूप थी मगर तेरी यादों … more »
