Blogs about: Wind
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खिली-खिली महकी बहारें हैं
खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहते शिकारें हैं ठण्डी-ठण्डी सौंधी हवाएँ … more »
तख़लीक़-ए-नज़र
खिली-खिली महकी बहारें हैं
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विनय प्रजापति wrote 6 days ago: खिली-खिली महकी बहारें हैं झीलों पर बहत … more »
नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: नित उड़ता हूँ तेरी कजरारी अँखियों में … more »
तन्हाई मिटाने दो
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विनय प्रजापति wrote 2 months ago: तन्हाई मिटाने दो किस्से सुनाने दो सुब … more »
मैं हूँ चाँद है तुम भी होगी कहीं
विनय प्रजापति wrote 2 months ago: मैं हूँ, चाँद है, तुम भी होगी कहीं मैं द … more »
बारिश जैसी हो तुम
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: खिली हुई शाम की बिखरी हुई धूप में बारि … more »
तुम आज ही लौट आओ
विनय प्रजापति wrote 8 months ago: कहाँ है वो चेहरा, गुलाबी चेहरा जिसको द … more »
