जो इश्क़ की आग भड़क उठी है जैसे मैं शोलों में जल रहा हूँ तेरे बदन की कशिश का है जादू देखकर तुझ को मचल रहा हूँ मुझे है ख़ाहिशो-तमन्ना1 तेरी मैं उम्मीद को मसल रहा हूँ एक यह ख़ाब मैं देखता हूँ कि तेरी मरम… more →
तख़लीक़-ए-नज़रSumit Vijayvargiya wrote 2 months ago: however scary the path may be however hazy the situation may be there’s always a glimmer at th … more →
विनय wrote 6 months ago: I am sitting beneath the sunset and looking for your love (love) ’cause there’s no reaso … more →
विनय wrote 6 months ago: गोरी, आज यह सिंगार किसके लिए है गुलाबी अंगों में निखार किसके लिए है क्या सजन जी से मिलने का कोई वादा … more →
Himanshu Pandey wrote 8 months ago: As i am a new user at WordPress, i am now unknown to write in Hindi, I am starting my blogging throu … more →
विनय wrote 8 months ago: तुम आये क्यों जब तुम्हें जाना ही था मुझसे दूर जाकर मुझे भुलाना ही था बदली-बदली फ़िज़ा में कुछ अपना लगा … more →
विनय wrote 12 months ago: I’m walking on the misty road but still have faith in your love this seems warm as the rising … more →
विनय wrote 1 year ago: वक़्त का पहना उतार आये कुछ लम्हे मरके गुज़ार आये ख़ाबों में सही अपना तो माना दिल को मेरे अपना तो जाना … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं सबसे बुरा था सबसे बुरा हूँ सबसे बुरा ही रहूँगा मैं जी रहा था जी रहा हूँ ऐसे ही जीता रहूँगा उसने … more →
विनय wrote 1 year ago: मैं मर जाऊँ तो अपनी हद से गुज़र जाऊँ तो क्या तुम जी सकोगी, बोलो…! सीने जो एक दिल है इसमें तेरा … more →
विनय wrote 1 year ago: उम्मीद जागी है इक बार फिर तुम्हें पाने की बचाये ख़ुदा! नज़र न लग जाये ज़माने की तेरी जुस्त-जू को न मिट … more →
विनय wrote 1 year ago: वह मौसम इक बार फिर सजा दे प्यार करने की मुझको सज़ा दे दीवानों की तरह तुझको देखे जाऊँ हाथों की लकीरों … more →
विनय wrote 1 year ago: जब कभी वह शाम मुझे याद आयी मेरी जाने-बहाराँ तू बहुत याद आयी माना आज शाम का वह रंग नहीं और मेरी जान त … more →
विनय wrote 1 year ago: मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहाँ खो गया है जबसे तुझे देखा दिल बेग़ाना हो गया है मेरी राह के मुसाफ़िर तू कहा … more →
विनय wrote 1 year ago: आज हो या कल हो हम आपको ही चाहेंगे कहता है जो कुछ मन उसको ही मानेंगे आज हो या कल हो हम आपको ही चाहेंग … more →
विनय wrote 1 year ago: इस पल से उस पल तक तुमको ही चाहेंगे कहता है जो कुछ दिल उसको ही मानेंगे इस पल से उस पल तक तुमको ही चाह … more →
विनय wrote 1 year ago: कब कहाँ रुकें, कब तक चलें ठहर जायें जहाँ दो पल के लिए वह मंज़िल है कहाँ? तुम जहाँ कहानियाँ कहती हों व … more →
विनय wrote 1 year ago: हमने अबस की आरज़ू छोड़ दी तुमको पाने की जुस्तजू छोड़ दी चाक़ जिगर को गरेबाँ में छिपाके हमने हसरते-रफ़ू … more →
विनय wrote 1 year ago: तुमसे चाहत है तुमसे इबादत है मुझे इश्क़ है तुमसे … तुमको देखा तो जाना प्यार क्या है ज़िन्दगी क्य … more →
Rakesh wrote 2 years ago: To IIITians, To my friends and To Everyone else who is reading this post. May peace break into your … more →