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Blogs about: Without Reason

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तेरी तीरे-नज़र किस अदा से यार उठती है7 comments

विनय wrote 9 months ago: तेरी तीरे-नज़र किस अदा से यार उठती है रह-रहकर रुक-रुककर बार-बार उठती है हम बीमारि-ए-इश्क़ के मारे हुए … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, इश्क़, ज़िबह, Love, प्यार, मोहब्बत, यार, जानिब, बेवजह

शीशाए-अश्क आते रहे

विनय wrote 2 years ago: शीशाए-अश्क आते रहे क़तरा-क़तरा लहू रुलाते रहे हम दीवानों की ख़ैर भला कौन पूछे लोग आते-जाते रहे हम रखते … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ज़िन्दगी, दर्द, Blame, Friendship, Pain, दीवाना, मीठी, बेवजह


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