वो रुलाकर हंस न पाया देर तक, जब मैं रो कर मुस्कुराया देर तक, भूलना चाहा अगर उसको कभी, और भी वो याद आया देर तक, भूखे बच्चों की तसल्ली के लिए, माँ ने फिर पानी पकाया देर तक, गुनगुनाता जा रहा था इक फकीर, … more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: वो रुलाकर हंस न पाया देर तक, जब मैं रो कर मुस्कुराया देर तक, भूलना चाहा अगर उसको कभी, और भी वो याद आ … more →