विगत कई वर्षोंसे मैं सृजन के बारे में सोचती रहीहूँ लेकिन उसे सही शब्द नहीं दे पा रही थी । तभी ओशो को पढते हुए निम्न वाक्य सटीक प्रतित हुए : कभी आपने नही सोचा होगा ,इतने पेंटर हुए, इतने मूर्तिकार हुए, … more →
सहचरीMeena Jain wrote 2 weeks ago: विगत कई वर्षोंसे मैं सृजन के बारे में सोचती रहीहूँ लेकिन उसे सही शब्द नहीं दे पा रही थी । तभी ओशो को … more →
Meena Jain wrote 1 month ago: स्त्री पूरी मानवता का आधा हिस्सा होते हुए भी एक जाति नही वह गुलामो की तरह जीती है। स्त्री भिन्न-भिन् … more →
Meena Jain wrote 1 month ago: कौरव सभा में पाण्डवो के जुऐ में हारने पर द्रौपदी को घसीट कर लाया जाता है। तब द्रौपदी भरी सभा में प … more →
Krishna Kumar Mishra wrote 1 month ago: कुकरबिटेसी परिवार के फ़लॊं के साथ हमारे ग्रामीण जीवन में जो बाते कही जाती है उनका बयान मै यहां कर रह … more →
Ajad Panchhi wrote 10 months ago: Emma Brady said a friend called her after seeing the website A woman found out her six-year marriage … more →
अनिल कुमार wrote 1 year ago: औरत और भगवान सब कुछ कर सकते हैं. Woman and God can do everything. … more →
Ami Jha wrote 1 year ago: (pic source: flickr) तू ही प्रथम, तू ही जगजानी तू ही प्रतक्ष प्रेरणारुपणी तू ही शक्ति, तू ही सहार … more →
प्रेमलता पांडे wrote 1 year ago: स्त्री ने आवाज उठायी है, उसने पुनः ऊँचाई पायी है, पर उससे पहले पार की एक खाई है। पहले भी वह ऊँची थी, … more →