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Blogs about: Wound

हम में जीतने का हौसला है

विनय wrote 1 year ago: हम में जीतने का हौसला है ‘नज़र’ यह बाज़ी भी हम मारकर जायेंगे यह ज़ख़्म जाविदाँ नहीं रहने वा … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, हौसला, इश्क़, दर्द, Love, प्यार, मोहब्बत, Pain, नज़र

ख़लिश को जगह न दो दिल में2 comments

विनय wrote 1 year ago: ख़लिश को जगह न दो दिल में नासूर बन जायेगी मरहम भी न लगा पाओगे साँस घुट के मर जायेगी ज़ीस्त अलग है, ज़ी … more →

Tags: मेरी नज़्म, इश्क़, Heart, Love, दिल, प्यार, मोहब्बत, साँस, मरहम

ज़ख़्मे-जिगर भर आये, कहाँ हो तुम?

विनय wrote 1 year ago: ज़ख़्मे-जिगर भर आये, कहाँ हो तुम? बदरा सावन बुलाये, कहाँ हो तुम? अपने हश्र तक पहुँचा ‘नज़र … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, Heart, Love, सावन, प्यार, मोहब्बत, नज़र, death

ख़राश ज़ख़्म बनेगी, घाव करेगी

विनय wrote 1 year ago: ख़राश ज़ख़्म बनेगी, घाव करेगी और मवाद के दरिये बहेंगे हमने हमेशा ‘वफ़ा’ से लाग रखा एक दिन … more →

Tags: रुबाइयाँ, इश्क़, Love, प्यार, मोहब्बत, वफ़ा, ज़ख़्म, घाव, scar

दिल ख़ुद ख़ला है

विनय wrote 1 year ago: दिल ख़ुद ख़ला है उसमें दूसरी ख़ला क्या होगी मैंने सय्यारों की तरह भटककर देखा है इसमें दूर-दूर तक इसम … more →

Tags: मेरी त्रिवेणी, इश्क़, Heart, Love, दिल, प्यार, मोहब्बत, cheat, ज़ख़्म

और दाँव अपनी जाँ का1 comment

विनय wrote 1 year ago: और दाँव अपनी जाँ का किसने लगाया होगा फिर इश्क़ ने फ़रहाद कोई बुलाया होगा यूँ ही नहीं बिगड़ता है कोई कि … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, Alone, आहट, इश्क़, खटखटाना, ख़बर, ग़लत, छाला, जाँ

इस जानिब य उस जानिब

विनय wrote 1 year ago: इस जानिब य उस जानिब कौन ‘नज़र’ है कौन ‘ग़ालिब’ एक बला है दर्दे-निहाँ कौन बुरा … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ख़ाब, रात, जानिब, नज़र, dream, Night, ज़ख़्म, Silence

वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है

विनय wrote 1 year ago: वह जो मेरे ज़ख़्म गिनता है तो कहता है बस इतने ही! ख़िज़ाँ आयी बहार लौट गयी निशान रह गये इतने ही उसने न … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, ख़ाब, वक़्त, time, Reminisce, याद, दीवाना, बहार, सदा

न रखो वह तस्वीरें हरी जिनसे दिल दुखता हो

विनय wrote 1 year ago: न रखो वह तस्वीरें हरी जिनसे दिल दुखता हो कर दो वह ज़मीनें बंजर जिनमें घाव उगता हो क्यों सीने में साँस … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, amazing!, आँच, इश्क़, ख़ाब, ख़ार, घाव, तस्वीर, दर्द

इम्तिहाँ मेरी मोहब्बत को मुदाम देने हैं

विनय wrote 2 years ago: इम्तिहाँ मेरी मोहब्बत को मुदाम देने हैं दीजिए अगर आपको इल्ज़ाम देने हैं और कौन दूसरा सितम-परस्त होगा … more →

Tags: मेरी ग़ज़ल, Abuse, always, इम्तिहाँ, इल्ज़ाम, इश्क़, इस्लाम, काफ़िर, नज़र


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