एक के बाद एक सामूहिक ठगी की तीन वारदातें टीवी चैनलों और समाचार पत्रों की सुर्खियां बन गयी हैं। आप यह कहेंगे कि ठगी की हजारों वारदातें इस देश में ं होती हैं इसमें खास क्या है? याद रखिये यह सामूहिक ठगी … more →
*** दीपक भारतदीप की हिंदी सरिता-पत्रिका*** mastram Deepak Bharatdeep ki hindi patrika***दीपक भारतदीप wrote 2 weeks ago: एक के बाद एक सामूहिक ठगी की तीन वारदातें टीवी चैनलों और समाचार पत्रों की सुर्खियां बन गयी हैं। आप यह … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: अख़बारों में छपे बड़े बड़े शख्सों के बयान अब आखों से आगे बढ़कर दिल की गहराई में नहीं जाते. ढेर सारा … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: भर्तृहरि महाराज कहते हैं कि —————— यावत्स्वस्थमिदं शरीरमरुजं याव … more →
दीपक भारतदीप wrote 1 month ago: संत शिरोमणि कबीर दास जी कहते हैं ————————– देख … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: साली और भाभी पर जो कोई ख्याली शेर लिखा पढ़ते हुए उसे लोगों का ढेर दिखा। जो बयान किये दर्द जमाने के उस … more →
दीपक भारतदीप wrote 4 months ago: कविता सजधज तैयार हो गयी। उसका पति कवि बाहर स्कूटर पर खड़ा उसका इंतजार कर रहा था। उसे तैयार होता देख स … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: बंदर चाहे कितना भी बूढ़ा हो जाये गुलाट लगाना नहीं भूलता यही कुछ हालत हम भारतवासियों की है। कोई व्यसन … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: शायद कुछ समाज सुधारकों को यह बुरा लगे पर सच यही है कि इस धरती पर पैदा हर जीव की नस्ल होती है और उसमे … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: आज बैठे ठाले अपने ब्लाग की पैज रैंक देखने का विचार आया तो पता लगा कि एक अन्य ब्लाग/पत्रिका ई7पत्रिका … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: अगर किसी समुदाय का एक जोड़ा अपने किसी दूसरे समुदाय की रीति के अनुसार विवाह करता है तो क्या उस समुदाय … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: चतुराई हरि ना मिलै, ए बातां की बात एक निस प्रेमी निराधार का गाहक गोपीनाथ संत कबीरदास जी का आशय यह है … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: के अनुसार ———————– आस्रावयेदुपचितान् साधु दुष्टऽव्रण … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: समाज को सुधारने की प्रयास हो या संस्कृति और संस्कारों की रक्षा का सवाल हमेशा ही विवादास्पद रहा है। इ … more →
दीपक भारतदीप wrote 5 months ago: भूतपूर्व मजदूर की डायरी से-आलेख जिन लोगों ने जीवन में कभी मजदूरी या मेहनतकश बनकर पैसा नहीं कमाया उनक … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: वहां महफिल जमी हुई थी। अनेक विद्वान समाज की समस्याओं पर विचार करने के लिये एकत्रित हो गये थे। एक विद … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: उतरा मूंह लेकर फंदेबाज घर आया और बोला- ‘दीपक बापू, बड़ा बुरा दिन आया हाईस्कूल के इम्तहान में मोहल्ले … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: नजरें फेरकर वह चले जाते हैं। देखने में लगते हैं हमसे बेपरवाह पर हकीकत यह है कि हमारी आंखों में उनको … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: कमरों में बंद दौलत लूटकर लुटेरे जा सके यहां से कितनी दूर। उसकी चकाचैंध में रौशनी खो बैठे उनके नूर। अ … more →
दीपक भारतदीप wrote 6 months ago: न निर्मितः केन न दृष्टपूर्वः न श्रूयते हेममयः कुरंगः। तथापि तृष्णा रघुनंदनस्य विनाशकाले विपरीत बुद्ध … more →