मेरे आशियाने में , तेरी कसम तेरी ही कमी थी । थे चांद तारे , खुदा और तेरी तस्वीरें लगी थी । बहुत कम थे गम , वहाँ तो बस खुशीयाँ ही पल रही थी । अन्धियारे की दावत हुई , उजालों की महफ़िल सजी थी । जो आँखे ख… more →
लम्हें जिन्दगी केShubhashish Pandey wrote 1 year ago: (ये कविता मैंने २००५ में अपने seniours के लिए उनके farewell पे लिखी थी, जिसे आज यहाँ publish कर रहा … more →
mehhekk wrote 1 year ago: 1.. जब संग तुम्हारे होती हूँ सनम ज़िंदगी की मंज़िले और भी करीब नज़र आती है | 2,, ये तन्हा र … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: मेरे आशियाने में , तेरी कसम तेरी ही कमी थी । थे चांद तारे , खुदा और तेरी तस्वीरें लगी थी । बहुत कम … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: मेरे आशियाने में , तेरी कसम तेरी ही कमी थी । थे चांद तारे , खुदा और तेरी तस्वीरें लगी थी । बहुत कम … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: कुछ रंगो को तुलिका की ज़रूरत नहीं होती हर बात को कहने के लिए जुबां की ज़रूरत नहीं होती हम वो राही … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: कुछ रंगो को तुलिका की ज़रूरत नहीं होती हर बात को कहने के लिए जुबां की ज़रूरत नहीं होती हम वो राही … more →
Ami Jha wrote 1 year ago: धूप की रोशिनी मे बागो के फूलो मे चाँद की चाँदनी मे घर की पूजा मे प्राथमिक की परीक्षा मे दशहरे के मे … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: नए रगों से हुई फिर यारी, खिल गई हर फुलवारी, भूल ले बीते पतझड़ को, शुरू नए सृजन की तैयारी। हर ओर खिली … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: नए रगों से हुई फिर यारी, खिल गई हर फुलवारी, भूल ले बीते पतझड़ को, शुरू नए सृजन की तैयारी। हर ओर खिली … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: एक गीत बेख़बर जिंदगी से जी रहे थे के तुम आ गये | कहुँ कैसे मरे जा रहे थे के तुम आ गये | हे मजिंल क … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: एक गीत बेख़बर जिंदगी से जी रहे थे के तुम आ गये | कहुँ कैसे मरे जा रहे थे के तुम आ गये | हे मजिंल क … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: आँगन की तपती दोपहरी में , खाट के जैसे तपता सा अपनो के चेहरो में ही , अपनो की राहें तकता सा | चेहरे क … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: आँगन की तपती दोपहरी में , खाट के जैसे तपता सा अपनो के चेहरो में ही , अपनो की राहें तकता सा | चेहरे क … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: आती है पश्चिम से ये तूफ़ानी हवाएँ , घनघोर अंधेरा , छत पर आकर बादल लाएँ , मेरे कमरे को रोशन करता , द … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: आती है पश्चिम से ये तूफ़ानी हवाएँ , घनघोर अंधेरा , छत पर आकर बादल लाएँ , मेरे कमरे को रोशन करता , द … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: जो गम देके तुमने सिखाया हमें । जिन्दगी में बहुत काम आया हमें । जब लगी ठोकर , गिर के बैठ गये , तब लग … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: जो गम देके तुमने सिखाया हमें । जिन्दगी में बहुत काम आया हमें । जब लगी ठोकर , गिर के बैठ गये , तब लग … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: एक नज़्म भीड़ में भी जब कोई तुम्हें तन्हा दिखाई दे , सबके साथ होकर भी जब कोई अकेला दिखाई दे | हँसते … more →
hemjyotsana "Deep" wrote 1 year ago: एक नज़्म भीड़ में भी जब कोई तुम्हें तन्हा दिखाई दे , सबके साथ होकर भी जब कोई अकेला दिखाई दे | हँसते … more →