ये जो ज़िन्दगी की किताब है, ये किताब भी क्या खिताब है, कहीं एक हसीं सा ख्वाब है, कही जान-लेवा अज़ाब है, कहीं छांव है, कहीं धूप है, कहीं और ही कोई रूप है, कई चेहरे हैं इसमे छिपे हुये, एक अजीब सा ये निकाब… more →
कुछ पल जगजीत सिंह के नामAmarjeet Singh wrote 2 years ago: ये जो ज़िन्दगी की किताब है, ये किताब भी क्या खिताब है, कहीं एक हसीं सा ख्वाब है, कही जान-लेवा अज़ाब है … more →