श्री वशिष्ठ जी राम से कहते हैं - परंतप राम, संतोष ही परम श्रेय है. संतोषयुक्त पुरूष (आत्मा) ही परम विश्राम को प्राप्त होता है. जो संतोषरूपी ऐश्वर्य के सुख से संपन्न है तथा जिनका चित्त निरंतर विश्राम … more →
अलखबाड़ाalakh niranjan wrote 2 years ago: श्री वशिष्ठ जी राम से कहते हैं - परंतप राम, संतोष ही परम श्रेय है. संतोषयुक्त पुरूष (आत्मा) ही परम व … more →
alakh niranjan wrote 2 years ago: जो पुरूष (सनातन साहित्य में जहां भी पुरूष शब्द का उल्लेख मिलता है उसका आशय है-आत्मा.) प्रिय और अप्रि … more →