झोंके हवा के उसका रूख़सार चूमते हैं फूल उसकी आँखों को देख यार झूमते हैं तेरे हुस्नो-शबाब के बारे क्या कहूँ मैं तेरे आगे-पीछे दीवाने हज़ार घूमते हैं तेरी लटें उड़ती हैं किस अदा के साथ देखकर आशिक़ अपना नि… more →
तख़लीक़-ए-नज़रश्रीकाँत सोनी की कवितायें wrote 7 months ago: युवा मँज़िल तक पहुँचने की चाहत करीब पहुँचकर थक जाने कीआदत वो आदर्श दुनिया के सपने हर पत्थर तरासने की … more →
विनय wrote 11 months ago: झोंके हवा के उसका रूख़सार चूमते हैं फूल उसकी आँखों को देख यार झूमते हैं तेरे हुस्नो-शबाब के बारे क्य … more →
Rakesh wrote 1 year ago: The first month of the new year is close to its end now.. and no new post from me… while frien … more →
विनय wrote 1 year ago: आदाब तुझे ऐ मेरे वतन लखनऊ आदाब तुझे मेरे जानो-तन लखनऊ है कभी आईना कभी शराब-सा तू है मेरी शोख़ी मेरा … more →