mehhekk wrote 1 year ago: फ़िज़ा यूँ ही आज ख़याल आया , देखु रूप पलटकर कुछ पल महसूस करू , फ़िज़ा में बदलकर | फ़िज़ा बनकर मैं , … more →
mehhekk wrote 1 year ago: फ़ासले हे दोनो में इतने फिर भी दिल से ये हे पास दूरियाँ है अनगिनत इन में मन में लिए मिलन की आस निहार … more →