चढ़ गयी रे मस्ती चढ़ गयी रे चढ़ गयी रे तेरे हुस्न की मस्ती चढ़ गयी रे मस्ती चढ़ गयी रे तेरे हुस्न की मस्ती चढ़ गयी रे लग गया काँटा फँस गया बाँका बन्धु बात तेरी तो बन गयी रे चढ़ गयी रे मस्ती चढ़ गयी रे… more →
तख़लीक़-ए-नज़रविनय wrote 1 year ago: चढ़ गयी रे मस्ती चढ़ गयी रे चढ़ गयी रे तेरे हुस्न की मस्ती चढ़ गयी रे मस्ती चढ़ गयी रे तेरे हुस्न की … more →
विनय wrote 1 year ago: I feel your love n’ the flames of love It just the first time When I am in love I feel your lo … more →
विनय wrote 1 year ago: धीरे-धीरे उतरती है साँस सीने में यह दर्द बड़ा बेदर्द है सीने में लुत्फ़ जीने क सब ख़त्म हो गया … more →