अपने जब दूर जाते है तो बहुत दर्द देते है पर अपने जब पास रह कर भी दूरिया बना लेते है तो दिल में एक कसक छोड़ जाते हैै… more →
कुछ िदल सेMayur wrote 2 months ago: Zindagi Kyon Bahut Udaas Ho Tum, Khush Raho Aaj Mere Paas Ho Tum. Main Akela Jo Chal Raha Hoon Yahan … more →
mehhekk wrote 4 months ago: लंबी सी रील के जैसी लगे मानसपटल के कैमेरे में क़ैद एक लम्हे का सफ़र ज़िंदगी | ====================== … more →
kmuskan wrote 9 months ago: अपने जब दूर जाते है तो बहुत दर्द देते है पर अपने जब पास रह कर भी दूरिया बना लेते है तो दिल में एक कस … more →
kmuskan wrote 10 months ago: कभी कभी चंद कदमो का फासला दुनिया बदल देता है चंद कदमो का फासला ज़िन्दगी-भर का फासला बन जाता है चंद क … more →
kmuskan wrote 11 months ago: दबे कदमो से सब से छुपते छुपाते आज चाँद उतर आया मेरे आँगन । सुना था कि,चाँद में दाग होता है । हां ,दा … more →
kmuskan wrote 11 months ago: कल्पना की लकीरों से, तेरी एक तस्वीर बनाई है जब भी देखती हूँ उसमे, तेरा ही अक्स नज़र आता है किसी का उद … more →
ambuj wrote 11 months ago: गर्मी की उस दोपहर में हम जा बैठे पेड़ की छाव में वहा हमने देखा ज़मीन पे बिखरे पड़े थे कुछ पत्ते शायद … more →
kmuskan wrote 11 months ago: वो वक्त जैसे बीत कर भी नही बिता मेरे आज में शामिल है वो कुछ इस तरह कहते है वक्त से पहले किसी को कुछ … more →
kmuskan wrote 11 months ago: तन्हाई की ऐसी आदत हो गई है कि महफ़िल से डर लगता है किसी के जाने से तो कभी ना डरे पर किसी के आने … more →
kmuskan wrote 12 months ago: सरकार सोती रही मीठे सपने में खोई रही आंतकी धमाके करते रहे पर वो स्वप्न निद्रा से न जागी खुफिया एजेंस … more →
kmuskan wrote 12 months ago: उन वीरो को नमन जिन्होंने उन आंतकवादियो से लोहा लेते हुए अपनी जान गवां दी है मुंबई में ताज ,नरीमन हाउ … more →
kmuskan wrote 1 year ago: इक सपना टूटा आँख से आंसू बहा कुछ देर तक दिल बेचैन रहा उदास रहा पर फिर जैसे ख़ुद-ब-खुद सब ठीक हो गया … more →
kmuskan wrote 1 year ago: ज़िन्दगी जाने तू क्या चाहती है जाने किस मोड़ पे मुझे लिए जा रही है मेरे खवाबो ,मेरी तम्मनाओ को पीछ … more →
kmuskan wrote 1 year ago: आज बहुत दिनों बाद यहाँ आई। इतने दिनों तक कुछ लिखा ही नही । कुछ लोगो ने मुझे ईमेल भेजकर मुझसे ये जानन … more →
mehhekk wrote 1 year ago: ए ज़िंदगी सुबह तड़के ठंड में सिकुडती बाहें हाथों में दूध की बोतले लिए हर दरवाज़े पर दस्तक देती घूमती … more →
kmuskan wrote 1 year ago: ज़िंदगी की भाग-दोड में जाने वो पल कहाँ खो गए जब कुछ पल बैठ कर चैन से बतिया लिया करते थे एक चाए के प्य … more →
mehhekk wrote 1 year ago: बहुत एहसासो से गुज़रे है ज़िंदगी तेरे इशारों पर नाचते हुए रोटी के एक टुकड़े से प्यारा हमे और कुछ भी … more →
kmuskan wrote 1 year ago: कहने को तो पानी का एक कतरा है पर कितने ही जज्बातों का दरिया है हर सपने को बड़े प्यार से आँखों में छु … more →
kmuskan wrote 1 year ago: फ़िर से लग गई है दुकाने फ़िर से सज गए है बाज़ार दिल्ली फ़िर अपनी रफ़्तार से चल पड़ी है धमाके के मंजर को भू … more →