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आदमी वो, जो,,,,

आदमी वो, जो आबाद रहे और
बरबादी से बच के रहे ।
आदमी वो, जो आनंद में रहे,
उदास और हताश न रहे ।
आदमी वो, जो अहिंसा को अपनाए

POEM

आदमी

अँधा-धुंध दौड़ता आदमी,
क्या पा लेगा।
ठोकर लगेगी,
और सब बिखर जाएगा।

परमीत सिंह धुरंधर

Life