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वक्त तय कर लो - We Need Each Other

अपने आने का वक्त तय कर लो,
दिल मिलाने का वक्त तय कर लो,
इससे पहले की दम निकल जाए,
मुस्कुराने का वक्त तय कर लो।

आ गए हो तो ठौर भी चुन लो,
सिर्फ धूनों नहीं, ज़रा सुन लो,
यही बेताब दिल की हशरत है,
मेरी ज़ानिब भी कुछ नज़र कर लो।

जिंदगी ने गुमान में रखा,
तुमको अक्सर उड़ान में रखा,
तेरी दुनियां सँवारनी है मुझे,
सिर्फ दो चार दिन सबर कर लो।

अब तलक है कटा सफ़र तनहा,
जिंदगी यूँ हुई बसर तनहा,
तुमको देखा तो दिल लगा कहने,
‘कम से कम एक हमसफ़र कर लो।’

Hindi Poem

'एक बागबान चाहिए - I Need Your Support'

मुझे फरिश्ता नहीं, इंसान चाहिए,
मैं इक उजड़ा चमन हूँ, एक बागबान चाहिए।

हूँ रास्तों की जद में, मंजिल से बहुत दूर,
मुझको भी एक मुट्ठी, आसमान चाहिए।

अनजान मुकद्दर है, अंजाम की फिकर,
तुम कह रहे हो मुझको आराम चाहिए??

लहज़े में है नज़ाकत, आवाज़ में जादू ,
अब आपको क्योंकर कोई वरदान चाहिए।

कुछ यूँ भटक गया है इंसान आज का,
माँ-बाप को ठुकराया, भगवान चाहिए।

Hindi Poem

कभी आंधी, कभी बवंडर दिखाई देता है - A New Classification Of Poetry

We may classify the poetry as

1- Serious poetry
2- Semi serious poetry
3- Light poetry

With above reference the first one is the outcome of the deep insight of the poet in any subject, incident or any thing else, on the other hand second type starts in light way, may be the imitation of an art. 59 और  शब्द

Hindi Poem

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे

बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे
होता है शब-ओ-रोज़ तमाशा मिरे आगे

इक खेल है औरंग-ए-सुलेमाँ मेरे नज़दीक
इक बात है एजाज़-ए-मसीहा मिरे आगे

जुज़ नाम नहीं सूरत-ए-आलम मुझे मंज़ूर 23 और  शब्द

ग़ज़ल

अच्छी बात - Please Don't Be Angry

बात-बात पर गुस्सा आना
अच्छी बात नहीं होती है,
अपनों को यूँ गैर बताना
अच्छी बात नहीं होती है।

मैं तो पहले से घायल हूँ
उसपर तेरा घात सखे,
चोंट पे चोंट लगाते जाना
अच्छी बात नहीं होती है।

इक तो गर्मी का मौसम है
और भयानक लू भी है
उसपर तेरा आग लगाना
अच्छी बात नहीं होती है।

आज जभी मैं आ पहुँचा हूँ
दूर बहुत उस जीवन से
बीती बातें याद दिलाना
अच्छी बात नहीं होती है।

जो बीत गयी वो बात गयी
पर उसके पीछे सुनो प्रिये
दीवारों से सर टकराना
अच्छी बात नहीं होती है।

‘कौन, कहाँ, कैसे, कबतक,
कितना बाकी है और किधर’
इतने सारे प्रश्न उठाना
अच्छी बात नहीं होती है।

जाकर पूछो दीवारों से
उनके कुछ अरमान भी हैं
बेमतलब उनको तुड़वाना
अच्छी बात नहीं होती है।

दुनियां के दोराहे पर तो
तन्हाई है, महफ़िल भी
दोनों से ही आँख चुराना
अच्छी बात नहीं होती है।

हारोगे इक दिन तुम बाजी
जीवन ट्वेंटी-ट्वेंटी है
बात बात पर शर्त लगाना
अच्छी बात नहीं होती है।

तुमसे ही साकार हुए हैं
सपने सुखमय जीवन के
प्यार दिखाकर यूँ ठुकराना
अच्छी बात नहीं होती है।

दिल मेरा टूटा है मेरे
घाव हरे हैं देखो तो
जख्मों पर मरहम रख जाना
‘अच्छी बात यही होती है।’

कौन सुनेगा ‘कौशल’ तेरी
बातें सब बकवास ही हैं
रात-रात भर कलम चलाना
अच्छी बात नहीं होती है।

Hindi Poem

तूफ़ान की जानिब - The Journey against Storm

चला तूफ़ान की जानिब, मैं खुद को आजमाने को,
संजोकर हौसला दिल में, मैं थोडा डगमगाने को।

न बस में जिंदगी मेरी, न मेरा मौत पर पहरा,
चला इंशानियत के गीत फिर से गुनगुनाने को।

दिया है, तेल है, बाती है फिर भी लौ ये क्यूँ बुझती,
नहीं बाकी बचा क्या हौसला, खुद को जलाने को?

वो लड़का रोज ही, बाजार में रोटी चुराता है,
दिया क्या इस ज़माने ने उसे मिल बाँट खाने को।

बड़े लोगों की ऊँचाई जो दिखती है, नहीं होती,
दिखावे में चले आए हैं जीते, सच छुपाने को।

हमीं हैं अन्न के दाता मगर फिर भी हमीं भूखे,
किसानों ने कहा मायूस हो, अपने फ़साने को।

यहाँ इक शख्स दिखता है कि आवारा हो वह जैसे,
नदी के बीच में लेकर खड़ा नैया डुबाने को।

कहा मैंने, ‘ओ साथी! मुझको भी उस पार लेकर चल
कहा उसने, ‘नहीं है हौसला अब लौट आने को।’

‘मुझे सब दे दिया भगवान ने, था जो उसे देना,
मुझी में हौसला कम था कि हर वह चीज पाने को।’

न आया जो मेरे जीते जी, मेरी मौत पर आया,
खड़ा है मेरे दरवाजे पे दो आँसू बहाने को।

अजब यह जिंदगी का खेल है लेकिन पुराना है,
खड़ा है ‘वक्त का रेफरी’ यहाँ निर्णय सुनाने को।

कहाँ वह आग है, शायर है, फिर वो हौसला मुझमें,
चला हूँ ढूंढने लेकर कलम अपने तराने को।

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इंतहा आज इश्क़ की कर दी

इंतहा आज इश्क़ की कर दी
आपके नाम ज़िन्दगी कर दी

(इंतहा = चरम सीमा, परिणाम, फल)

था अँधेरा ग़रीब ख़ाने में
आपने आ के रौशनी कर दी

देने वाले ने उनको हुस्न दिया
और अता मुझको आशिक़ी कर दी

(अता = दान)

तुमने ज़ुल्फ़ों को रुख़ पे बिखरा कर
शाम रंगीन और भी कर दी

(रुख़ = मुख, मुंह, चेहरा)

-पयाम सईदी

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