झूठ ही झूठ हर बार बोलता है

फायदे के तराजू पे सच तोलता है।

जुबां पे उसके प्यार का छलावा

हर जगह नफ़रत टटोलता है।

सर झुकाता है रोज मंदिर में

बेझिझक आस्था से खेलता है।

अमृत पर टिकी नज़र उसकी

हर दिल में ज़हर घोलता है।