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होगा...

उनकी आंखों में भी बहता इक समंदर होगा
जिनके सीने में अपनो का कोई खंज़र होगा

इत्तिफ़ाक़न आ बैठते होंगे वो मंज़िलों पे
मुक़द्दर जिनका बेहिसाब सितमगर होगा

ग़ज़ल

एक ग़ज़ल 

जिस रोज़ मिलना मेरे सिरहाने,
आँखों में काजल मत लगाना
और ना ही दिल पर ताले।
फैल जाएगा काजल तुम्हारा
इन झील जैसी आँखों के किनारे ,
और टूट जाएँगे सारे ताले
चाहे दिल के हों या ज़ुबाँ पर।

– सहर

Shayri

नही होता

चले आओ के अब हमसे इंतज़ार नही होता
मसाफ़त-ए-हस्ती का सामना यार नही होता

मसअले इस दिल के इसलिए भी उलझे हैं
कभी इज़हार कभी इकरार कभी इनकार नही होता 6 और  शब्द

ग़ज़ल

और है

वो दुनिया और थी , ज़माना अब और है
इस दौर के खुदाओं का मज़हब और है

वो जो कहते हैं बातें उन बातों पे न जाईये

ग़ज़ल

कौन देगा

जले हैं घर कितने हिसाब कौन देगा
उठ रहे सवालों का जवाब कौन देगा

हुक्मरानों के जहन से हटती नही कुर्सियाँ
नौजवानों के हाथ में किताब कौन देगा

ले कर बैठे हैं सब मज़हबों के परचम
नस्ल-ए-नौ को अब इंकलाब कौन देगा

बहती है रगों में जिनके मय की बोतलें
उन सोये तूफानों को सैलाब कौन देगा

ढल गया है दिन बुझ रही है लौ
श्याह रात को महताब कौन देगा

ग़ज़ल

जहां तक

चलेंगे हम भी चलेगी अब ये राह जहां तक
दिल में दबी रहेगी दिल की आह जहां तक

वो बुत भी फ़रेबी उसकी नीयत भी है धोखा
सुनता है वो भी कहते हैं लिल्लाह जहां तक

जुगनुओं में मिलूँगी मैं कभी तारों में मिलूँगी
तेरे ही साथ रहूँगी, है रात सियाह जहां तक

खारिज़ है तेरी अर्ज़ी तेरा सर भी कलम है
गुनहगार ही रहेगा है तू बे-गुनाह जहां तक

महफ़िल से उठ जायेंगे इक रोज़ ‘पाकीज़ा’
बैठे हैं हम भी तहसीन में है वाह जहां तक

#पाकीज़ा

लिल्लाह-परमात्मा के नाम पर
सियाह-काली
तहसीन-प्रशंसा

ग़ज़ल

ट्विटर शायरी

तुम इतना जो ट्विटवा रहे हो
किसका लिखा चुरा रहे हो

फॉलो बैक के लिए, फॉलो करी
क्या मकड़ जाल बिछा रहे हो

न बनोगे शायर यूँ लिख लिख के,
क्यों फरे को ग़ज़ल बता रहे हो

जिन लोगों को म्यूट कर रखा है
उनको ही डीएम में चाटे जा रहे हो

फॉलोवर का खेल है ये ट्विटर
फोल्लोविंग अपनी बढ़ा रहे हो

ग़ज़ल