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यादे-ग़ज़ालचश्मां - फ़ैज़ अहमद 'फ़ैज़'

यादे-ग़ज़ालचश्मां, ज़िक्रे-समनइज़ारां
जब चाहा कर लिया है कुंजे-क़फ़स बहारां

आंखों में दर्दमंदी, होंठों पे उज़्रख़्वाही
जानाना-वार आई शामे-फ़िराक़े-यारां

नामूसे-जानो-दिल की बाज़ी लगी थी वरना
आसां न थी कुछ ऐसी राहे-वफाशआरां 58 और  शब्द

उर्दू शायरी

वो अहदे-ग़म - फ़ैज़ अहमद 'फ़ैज़'

वो अहदे-ग़म की काहिशहा-ए-बेहासिल को क्या समझे
जो उनकी मुख़्त्सर रूदाद भी सब्र-आज़मा समझे

यहां वाबस्तगी, वां बरहमी, क्या जानिये क्यों है
न हम अपनी नज़र समझे, न हम उनकी अदा समझे 48 और  शब्द

उर्दू शायरी

बहार आई - फ़ैज़ अहमद 'फ़ैज़'

बहार आई तो जैसे एक बार
लौट आये हैं फिर अदम से
वो ख़्वाब सारे, शबाब सारे
जो तेरे होंठों पे मर मिटे थे
जो मिट के हर बार फिर जीये थे

उर्दू शायरी

तेरे ग़म को जाँ की तलाश थी - फ़ैज़ अहमद 'फ़ैज़'

तेरे ग़म को जाँ की तलाश थी तेरे जाँ-निसार चले गये
तेरी राह में करते थे सर तलब सर-ए-राह-गुज़ार चले गये

तेरी कज़ -अदाई से हार के शब-ए-इंतज़ार चली गई 63 और  शब्द

उर्दू शायरी

रक़ीब से - फ़ैज़ अहमद 'फ़ैज़'

आ, के वाबस्तः[1] हैं उस हुस्न की यादें तुझ से
जिसने इस दिल को परीखानः बना रखा था
जिसकी उल्फ़त में भुला रखी थी दुनिया हमने

उर्दू शायरी

आज बाज़ार में पा-ब-जौला चलो - फ़ैज़ अहमद 'फ़ैज़'

आज बाज़ार में पा-ब-जौला चलो

चश्म-ए-नम जान-ए-शोरीदा काफी नहीं
तोहमत-ए-इश्क़ पोशीदा काफी नहीं
आज बाज़ार में पा-ब-जौला चलो

दस्त-अफ्शां चलो, मस्त-ओ-रक़्सां चलो
खाक-बर-सर चलो, खूं-ब-दामां चलो 64 और  शब्द

उर्दू शायरी

निसार मैं तेरी गलियों के अए वतन - फ़ैज़ अहमद 'फ़ैज़'

निसार मैं तेरी गलियों के अए वतन, कि जहाँ
चली है रस्म कि कोई न सर उठा के चले
जो कोई चाहनेवाला तवाफ़ को निकले

उर्दू शायरी