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कुछ बेहतरीन शेर

बजाहिर मेरे पास लफ्ज़ों के सिवा कुछ भी नहीं।
कुछ पुरानी यादों, कुछ रिस्तों के सिवा कुछ भी नहीं।।
लोग कहते हैं, मैं तन्हाँ क्यों, मैं, अकेला क्यों हूँ,

चाहत

तेरे हिज्र में अपना दामन भिगोता रहा

तेरे हिज्र में अपना दामन भिगोता रहा।
मैं शब-ए-ग़म की तन्हाई में रोता रहा।।

ग़ज़ल

हमारे गीत भी दुनिया हमारे बाद गायेगी

अभी तक जो अधूरी है, कहानी मैं सुनाता हूँ।
लिखे जो गीत हैं अब तक, उन्हें अब गुनगुनाता हूँ।
ज़रा तुम गौर से सुनना, हमारे दिल की फरियादे,
अभी तक जो दबी थीं अब, उन्हें होठों पे लाता हूँ।।

?प्यार

चाहत के परदे पे मेरी उम्मीदों के सितारे हैं

चाहत के परदे पे, मेरी उम्मीदों के सितारे हैं।
कुछ ख्वाब हैं दिल में, कुछ पलकों पे नजारे हैं।।

ग़ज़ल

मै चाहता हूँ

सारे बंधन वफाओ के अब तोड़ना चाहता हूँ

ये दिल तड़पना छोड़ दे उसके लिए मै चाहता हूँ

 

आते है ख्वाब उसके शब् भर यूं के

नींद को ही मै अब भुलाना चाहता हूँ

 

नसीब में है नहीं वो जानकर ये

हाथो की लकीरों को मिटाना चाहता हूँ

 

चाहतो की हवा चलती नहीं यहाँ अब

गमो का रुख ही अपनी ओर मोड़ना चाहता हूँ

कुछ ग़ज़ल जैसा

हर कोई चाहता है ।

हर कोई चाहता है प्रेम मगर,
क्या हर कोई करता है प्यार ?
अगर करोगे प्यार तो पाओगे प्यार ।

हर कोई चाहता है सहारा आपत्तिमें,

POEM