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पता ही नही चला...❤

पता ही नही चला, इतना प्यार कब कर बैठी मैं तुमसे! ❤

तुम एक उम्मीद हो मेरे लिये… 

उस हताश से पल मे…!

तुम एक खुशी हो मेरे लिये…

उस दुखभरे सैलाब मे…! 

तुम वो छाया हो मेरे लिये…

उस तपती रेगिस्तान मे…! 

तुम एक आरजू हो मेरे जीने के लिये…

उस आखिरी सांस मे…! 

तुम सहारा हो मेरे लिये…

समस्याओ के भंवर मे…! 

तुम जीने कि ठोस वजह हो मेरे लिये…

इस जिंदगी के घमासान मे…!

पता ही नही चला, इतना प्यार कब कर बैठी मैं तुमसे! ❤

– सुवर्णा (मेघा).

Love

मोहब्बत... ❤

तेरे होने से इस दिल को राहत मिलती है…

तेरे ना होने पर खुद हि से बगावत होती है…

जिसमे तु ना हो उस लम्हे से नफरत होती है…

ए खुदा, क्या यही मोहब्बत होती है??? 


– सुवर्णा (मेघा).

Love

842 कैसे जिंदा रहोगे मरने के बाद

कैसे रहोगे जिंदा मरने के बाद ?

सवाल है क्या हम चाहते है

मरने के बाद जिंदा रहेना ?

चाह है तो राह है, मंझ़िल है ।

POEM

हद से ज्यादा

हद से ज्यादा, बस तुम्ही को चाहा है
पल भर भी हम जुदा हो, ऐसी सजा न देना

मोहब्बत

चाहत -कविता

गर चाहत हो, ईमानदारी हो,

कमजोर की हिफाजत में भी चीजें  महफूज रह सकती हैं

जैसे मिट्टी के गुल्लक में

 लोहे के सिक्के