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मुहम्मद ﷺ का जीवन और संदेश

इस्लाम इस दुनिया में उस समय से है जब से दुनिया पर अल्लाह ने इंसान को पैदा किया।अल्लाह ने सबसे पहले इंसान हज़रत आदम अलैहिस्सलाम को जब ज़मीन पर भेजा तो नबुव्वत देकर भेजा। और जिस तरह ज़माना बीतता रहा नबी दुनिया में आते रहे। क़ुरआन कहता है कि कोई इलाका और कोई बस्ती ऐसी नहीं बची है जिसमें अल्लाह ने किसी रसूल या नबी को न भेजा हो। हदीस की किताबों में आता है कि अल्लाह ने दुनिया में तकरीबन 125000 नबी भेजे। क़ुरआन में कुछ नबियों का ही नाम आया है जैसे आदम, नूह, सालेह, हुद, इब्राहीम, लूत, इसहाक़, इस्माईल, याकूब, युसुफ, अय्यूब, यहया, ज़करिया, मूसा, हारून, जुलकिफ्ल, उज़ैर, ईसा मसीह और अंत में हज़रत मुहम्मद अलैहिस्सलातु वस्सलाम इत्यादि। बाक़ी सारे नबी कौन हैं, कहां भेजे गए, उनकी कौम का नाम क्या था यह अल्लाह बेहतर जनता है। यह सारे अंबिया (नबी का बहुवचन) मुसलमानों के भी नबी हैं। जब तक इन सब पवित्र लोगों को नबी न माना जाएगा तब तक एक आदमी मुसलमान नहीं हो सकता। इसलिए यह कहना ग़लत होगा कि इस्लाम सबसे पहले मक्काे से 6वीं सदी में शुरू हुआ। हज़रत मुहम्मद साहब अल्लाह के इस्लाम के आखिरी नबी और रसूल हैं जो मक्का में पैदा हुए और जिनपर क़ुरआन नज़िल हुआ। इन्होंने किसी नए धर्म की नींव नहीं रखी थी न ही किसी नए खुदा को पूजने के लिए कहा बल्कि उसी पुराने धर्म और खुदा की तरफ बुलाया जिसकी तरफ उनके दादा इब्राहीम ने बुलाया था और उनके दादा सालेह, हूद और आदम अलै.

इतिहास

सलतनत उस्मानिया

अरतग़रल

उस्मानी सुल्तान (Ottomans) तुर्कमान काबिले से ताल्लुक रखते हैं यह एक चरवाहा काबीला था, जो 13 सदी ई. में कुर्दिस्तान में बसे हुए थे।

उर खान या ओरहान

बुरुसा पर क़ब्जा

उर खान या ओरहान गाज़ी बुरूसा में 6 अप्रैल 1326 ई. को दाखिल हुआ। बूरूसा एशिया माइनर में स्थित बैज़नटाइन शासन का एक शहर था। उर खान के पिता उस्मान गाज़ी ने 1317 में बुरुसा का घेराव शुरू किया था। तकरीबन 10 साल के बाद इस घेराव से तंग आकर शहर के लोगों ने हथियार डाल दिए। बुरूसा में ही उस्मान गाज़ी की मृत्यु हुई और उसकी वसीयत के मुताबिक़ वहीं पर दफन किया गय। उर खान उस्मानिया सल्तनत का नया सुल्तान बना और बुरूसा को ही अपनी राजधानी बनाया।

इतिहास

GOPAL SINGH NEPALI BIOGRAPHY IN HINDI

‪गोपाल सिंह नेपाली(GOPAL SINGH NEPALI)‬


‪#‎जिनका_बिहारी_होने_पर_हमें_गर्व_है‬


‪#‎गोपाल_सिंह_नेपाली‬

कलम की स्वाधीनता के लिए आजीवन संघर्षरत रहे ‘गीतों के राजकुमार’ गोपाल सिंह नेपाली लहरों की धारा के विपरीत चलकर हिन्दी साहित्य, पत्रकारिता और फिल्म उद्योग में ऊंचा स्थान हासिल करने वाले छायावादोत्तर काल के विशिष्ट कवि और गीतकार थे।साहित्यिक कविताओं, जन कविताओं के साथ-साथ हिन्दी फिल्मों के लिए भी इन्होने 400 से अधिक गीत लिखे। 11 और  शब्द

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