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Rutba-E-Mohabbat - रुतबा-ऐ-मोहब्बत

उस पाक हुस्न की हर तारीफ, नापाक शरारत नही होती

हर बार सनम पे हक जतला देना, कोई हिमाकत नही होती

 

रहता है आशिकों के दिल में मोहब्बत का रुतबा बहुत ऊँचा

The Ghost

ताजमहल

ताजमहल

ताज तेरे लिए इक मज़हर-ए-उल्‍फ़त ही सही
तुमको इस वादी-ए-रंगीं से अक़ीदत ही सही
मेरी महबूब कहीं और मिला कर मुझसे

बज़्म-ए-शाही में ग़रीबों का गुज़र, क्या मानी ? 18 more words