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इश्क रूहानी

बेशक,
कैद दी मुझे,
अपने ही अंश ने,
लाल पत्थरों,
और झरोंखों की,
तन्हाइयों,
के दरमियान,
तो क्या ?
मुहब्बत की थी,
बेपनाह मैंने तो,
इश्क मेरा,
उस रूह में,
क़ाबिज है पुरसकूँ,
गिला नहीं कोई,
इन बेड़ियों से मुझको,
मैंने रच दी है,
मुहब्बत की तवारीख,
एक नायाब निशानी देकर,
सोया है इश्क मेरा अब,
संग-ए-मरमर के,
हसीं आगोश में,
और तुम ?
मुंह पर तुमने,
पोत ली है कालिख
बरखुरदार मेरे,
जब भी जिक्र होगा,
मुहब्बत का,
अदब देंगे कद्रदान मुझको,
और दर्ज होगा,
नाम तुम्हारा
कुफ्र और बेगैरत से,
दगाबाजों में,
फख्र है मुझको,
अपनी पाक मुहब्बत पे,
नाज़ है,
इश्क़-ए-ताजमहल पर,
करता हूँ सजदा जिसका मैं,
सुबह और शाम,
हर रोज़,
इन दरो-दीवारों से,
जी रहा हूँ इस इश्क को,
अपनी रूह में भी मैं !

कविता

दुखांत

ताजमहल,
और नज़ारा,
कैद से,
शाहजहाँ-सी किस्मत,
किसको चाहिये,
भरपूर प्यार,
और निशानी मुहब्बत की,
…..फिर,
अँधेरे ही अँधेरे,
कालकोठरी,
तन्हाई,
एक दुखांत,
प्रेम-कथा.
….यह ताज है,
जी हां,
प्रेम का पर्याय.

–राजगोपाल सिंह वर्मा 

कविता

सच्चा इतिहास : ताजमहल नहीं 854 वर्ष पुराना भगवान शिवजी का मंदिर था ..

 सच्चा इतिहास : ताजमहल  नहीं 854 वर्ष पुराना भगवान शिवजी का मंदिर था ।

‘ताजमहल’
वास्तु मुसलमानों की नहीं, अपितु वह मूलतः #हिंदुओं की है । वहां इससे

Hindus

सच्चा इतिहास : ताजमहल नहीं 854 वर्ष पुराना भगवान शिवजी का मंदिर था ..

 सच्चा इतिहास : ताजमहल  नहीं 854 वर्ष पुराना भगवान शिवजी का मंदिर था ।

‘ताजमहल’
वास्तु मुसलमानों की नहीं, अपितु वह मूलतः #हिंदुओं की है । वहां इससे

Hindus Outraged ( हिन्दुओं पर अत्याचार )