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शिशिर –द्वारे ।

1-रचना श्रीवास्तव

1

बिना पात-सी 

सूनी जीवन -डाल

खुशियाँ  झरी

2

आत्मा निकली

शरीर  हुआ माटी

गयी बहार

3… 11 more words

रचना श्रीवास्तव

मन चितेरा

हिन्दी हाइकु परिवार की ओर से आप सबको रंगपर्व की शुभकामनाएँ !

सबके मन प्यार के रंग से रंग जाएँ। द्वेष की परछाई भी पास न आए ! 21 more words

रचना श्रीवास्तव

हौसलों की उड़ान

1-सुशीला श्योराण

1

रेखा न गिन

चमकेगी किस्मत

उद्यमी बन।

2

हौसला कहे-

कामयाबी का ताज

मुझसे  तू  ले।

-0-

2 -सुनीता अग्रवाल

1

चीर के बढ़ी 12 more words

रचना श्रीवास्तव

भोर की मुस्कान

हाइकु और काव्य की संगमस्थली : भोर की मुस्कान’

रामेश्वर काम्बोज ‘हिमांशु’

हाइकु 5-7-5  का वर्णिक गणित नहीं है । काव्य होना इसकी प्रथम और अन्तिम शर्त है। डॉ सत्यभूषण वर्मा से पहले हाइकु की रचना ज़रूर हो रही थी ,किन्तु वह नियमित नहीं थी । इसको नियमित करने का श्रेय यदि वर्मा जी को जाता है ,तो व्यापक रूप  देने  और प्रसार करने का श्रेय डॉ भगवत शरण अग्रवाल जी को जाता है। डॉ अग्रवाल  जी अच्छे हाइकुकार भी हैं ,अत: हाइकु भारती के माध्यम से आपने गुणात्मक रचना कर्म को  समर्पण भाव से आगे बढ़ाया,जो मूलत: कवि थे ,उन्होंने हाइकु रचकर इस विधा का रूप सँवारा । बरसों के अध्यवसाय से देश के प्रसिद्ध रचनाकारों को हाइकु –रचना के लिए प्रेरित किया ।‘हाइकु भारती’ पत्रिका  के साथ अपनी दो अनुपम कृतियों से  हाइकु क्षेत्र को समृद्ध किया । ‘हिन्दी कवयित्रियों की  हाइकु-साधना ‘ संग्रह के माध्यम से  छह प्रमुख कवयित्रियों  का विशद विवेचन एवं 51 कवयित्रियों की  सामान्य जानकारी प्रस्तुत की ;जो अपने आप में बहुत ही श्रमसाध्य कार्य था । ‘हाइकु काव्य विश्वकोश’ इनका दूसरा मुख्य ग्रन्थ है ;जो अपनी तरह  का भारतीय ही नहीं वरन् विश्व की  भाषाओं का पहला ग्रन्थ है । सबको साथ लेकर चलने और सबको प्रोत्साहित करने की जो भावना डॉ भगवत शरण अग्रवाल में थी , उससे हाइकु-जगत् समृद्ध हुआ । … 130 more words

रामेश्वर काम्बोज 'हिमांशु'