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ज़माने का दौर - कविता

News – Blast at Chinese kindergarten was a bomb attack

  Nursery blast kills seven in China’s Xuzhou

हमारे स्कूल पर बम गिरते हुए …..
क्या उनके जेहन में एक बार भी, 
अपने घरों, बच्चों का ख़याल आया था ?

लोग इतने क्रूर क्यों है ?
हमने उनका क्या बिगाडा था ?
हम इस कठोर दुनिया के लिये नहीँ बने ……

इसलिये दुनिया से विदा हो गये ।
पर , इतने बड़े  अपराध बोध के साथ ……
क्या ऐसे लोग चैन से जी सकेगें ??

“ज़माने के जिस दौर से हम गुज़र रहे हैं, अगर आप उससे वाकिफ़ नहीं हैं तो मेरे अफसाने पढ़िये और अगर आप इन अफसानों को बरदाश्त नहीं कर सकते तो इसका मतलब है कि ज़माना नाक़ाबिले-बरदाश्त है। मेरी तहरीर(लेखन) में कोई नुक़्स नहीं । जिस नुक़्स को मेरे नाम से मनसूब किया जाता है, वह दरअसल मौजूदा निज़ाम का एक नुक़्स है। मैं हंगामा-पसन्द नहीं हूं और लोगों के ख्यालात में हैज़ान पैदा करना नहीं चाहता। मैं तहज़ीब, तमद्दुन, और सोसाइटी की चोली क्या उतारुंगा, जो है ही नंगी। मैं उसे कपड़े पहनाने की कोशिश भी नहीं करता, क्योंकि यह मेरा काम नहीं, दर्ज़ियों का काम है ।”
― Saadat Hasan Manto

खुले मैन हाल दे रहे हादसों को न्यौता

पुन्हाना, (गुरूदत्त भारद्वाज): पुन्हाना में सीवर लाईन डालने का काम तकरीबन पूरा हो चुका है। लेकिन अधिकारियों की लापरवाही के कारण कई जगहो पर खुले मैन हॉल हादसों को न्यौता दे रहे है। ऐसा ही सीवर का एक मैन हॉल मेवात मॉडल स्कूल के पास खुला हुआ है। जिसके कारण कभी भी कोई बड़ा हादसा […]

लंच बॉक्स

एकदिन फेसबुक पर एक फेसबुक मित्र की पोस्ट थी, जिसमे उन्होंने पूछ रखा था कि “आप स्कूल के टिफिन में ज्यादातर क्या ले जाते थे?”

जरा हो जाये फीलिंग नोस्टेल्जिक 

चलो आज फिर से थोडा और नोस्टेल्जिक हो लिया जाये। वो दिन कितने खूबसूरत थे जब हम बच्चे हुआ करते थे और ख़ुशी ख़ुशी स्कूल चले जाया करते थे और मेरी तरह आप सबने भी शायद कुछ ऐसे ही चैप्टर पढ़े होंगे जो मैं यहां नीचे पोस्ट करने जा रहा हूँ। तो चलिए बैठते है टाइम मशीन में और हो आते है बचपन के शहर में ।

कक्षा द्वितीय

विषय सामाजिक ज्ञान

अध्याय 1 “उठो जागो”

मगन जागो। दिन निकल आया। सूरज उगा। चिड़िया चहक रही है। पिताजी के चरण छुओ। शौच जाकर हाथ मुंह धोओ और दाँत साफ़ करो। मल मल कर नहाओ। नहा कर खाना खाओ। खाना खाते समय बातें मत करो। खाना खाकर हाथ मुँह साफ़ करो।

साफ़ कपड़े पहनो। बालों में कंघा करो। जुराब जूते पहनो। बस्ता संभालो। देखो मगन ! रतन भी आ गई। दोनों समय पर विद्यालय जाओ। रास्ते में सावधानी से चलो। सड़क पर बाई ओर पटरी पर चलो। सड़क पार करते समय अपने दाएं बाएं देखो। रास्ते में मत खेलो।

दिल से ☺☺

यादें

यादों में 'काबुलीवाला'

​दोस्तों नमस्कार…

हमने स्कूल के समय में कई कहानियां पढ़ी थी। जिनमें से कुछ कहानियां हमारे जेहन में हमेशा के लिए बस गयी, लेकिन समय बीतने के साथ ही उन कालजयी कहानियों की तस्वीर हमारी यादों में धुंधलाने लगती है। ऐसी ही एक कहानी हमने पढ़ी थी काबुलीवाला, रवीन्द्रनाथ टैगोर रचित रिश्तों को बयां करती महान कृति। चलिए…आज उसी कहानी की यादों को फिर से जीते है।

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