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दीपोत्सव हाइकु

प्रत्येक मन

रहे प्रकाशमय

शुभ दीवाली ।

दीप जलाएँ

मन के आँगन में,

तम भगाएँ ।

हो आलोकित

दिल के प्रकाश से

जीवन सारा ।

राह दिखाए

ह्रदय प्रकाशमय

न भटकाए ।

फ़ीकी लगती

दुनिया की दिवाली

यूँ बिन तेरे ।

जो तू दिल में

न छाए अँधियारा

हो उजियारा ।

जय हो !

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हाइकु - धूप

लो दिन बीता
जोहता रहा बाट
धूप न आई ।

बंद कमरे
रहें अंधकार में
खोल दो उन्हें ।

धूप की कमी
बंद गलियारों में
रहती सदा ।

धूप बग़ैर
ये जग थम जाए
अँधेरा छाए ।

खोलो कमरे
आने दो धूप हवा
मिटे सीलन ।

बहे पवन
छँट जाएँ बादल
छा जाए धूप ।

हाइकु

शिकंजा सख्त

नियति के हाथों का,

हिल न पाऊँ ।

 

भ्रम का जाल

सख्त डोर से बुना,

काट न पाऊँ ।

 

दर्द दवा का 190 और  शब्द

हाइकु

हाइकु

मीठा सा रस

तेरी प्यारी बातों में,

सुनता रहूँ ।



गुनता रहूँ

वो अनकही बातें

जो मैंने सुनीं ।



आँखों ने कही

वाणी कह न पाई

गहरी बातें ।



दिल की बातें

जो दिल से समझी

लगी सरल ।



जब से चखा

तेरी बातों का रस

झूम रहा मैं  ।
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हाइकु

जीवन सूखा

दिन दिन बीतता

अंधेरी शाम |


दिल बेचैन

कटती नहीं रैन

दूर सवेरा |


बेबस हम

तम न होता कम

सूरज गुम |


मंद रौशनी

बढ़ता अंधियारा

निर्जन पथ |


जीवन मेला

अजब गजब सा

ढेर तमाशे |
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हाइकु

छुपा रावण
हर-एक मन में,
करें दहन ।

दुःख व सुख
रहते आते-जाते
रहें मगन ।

बढ़े दिव्यता
हर-एक दिल में
करें जतन ।

प्रत्येक आत्मा
है अंश परमात्मा
करें नमन ।

माँ की ममता
अतुल प्रेम मय
करें नमन ।

स्वर्ग नरक
हैं इसी जगत में
करें चयन ।

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