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हाइकु

ज़िंदगी बीती
सपनों के जाल में
नींद न टूटी।

विस्तृत नभ
सिमटा टुकड़े में
मेरे आँगन।

घर है सीला
बाहर खिली धूप
विचित्र लीला।

हैं अजनबी
ख़ुद से हम सभी
जानें ख़ुद को।

स्वच्छंद मन
कहना कब माने
उड़ना जाने।

लो, फूँका घर
ले ली लुकाठी हाथ
चलेंगे साथ।

हाइकु

दीपोत्सव हाइकु

प्रत्येक मन

रहे प्रकाशमय

शुभ दीवाली ।

दीप जलाएँ

मन के आँगन में,

तम भगाएँ ।

हो आलोकित

दिल के प्रकाश से

जीवन सारा ।

राह दिखाए

ह्रदय प्रकाशमय

न भटकाए ।

फ़ीकी लगती

दुनिया की दिवाली

यूँ बिन तेरे ।

जो तू दिल में

न छाए अँधियारा

हो उजियारा ।

जय हो !

Hindi

हाइकु - धूप

लो दिन बीता
जोहता रहा बाट
धूप न आई ।

बंद कमरे
रहें अंधकार में
खोल दो उन्हें ।

धूप की कमी
बंद गलियारों में
रहती सदा ।

धूप बग़ैर
ये जग थम जाए
अँधेरा छाए ।

खोलो कमरे
आने दो धूप हवा
मिटे सीलन ।

बहे पवन
छँट जाएँ बादल
छा जाए धूप ।

हाइकु

हाइकु

शिकंजा सख्त

नियति के हाथों का,

हिल न पाऊँ ।

 

भ्रम का जाल

सख्त डोर से बुना,

काट न पाऊँ ।

 

दर्द दवा का 190 और  शब्द

हाइकु