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आँखें पारखी


चाँद को धक्का

अम्बर पर छाये

सूरज कक्का​

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रहीं ताकती

टिमटिमाते दीप

आँखें पारखी

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कहानी किस्से

तमाम उलझनें

मेरे ही हिस्से

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चन्द अल्फाज

अंतर्मन छू बैठे

बोले वो आज

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चढ़ा अटारी

रोशन मन आले

अँधेरा भारी

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झाड़ दो धूल

पोखर नाले सूखे

गंदे है पूल

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जवाबदेही

लांछित हरपल

प्यारी वैदेही

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हाइकु

हाइकु

उपलब्धियाँ

चुपके से दे जातीं

ढेरों खुशियाँ

हाइकु