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समुद्र विषयक पर हाइकु कविताएँ

1
शर्मीला चाँद
सिन्धु तट उतरा
मेघों की ओटI
2
जीव इच्छाएँ
सागर सी अथाह
रही अधूरी/ होती न पूरी
3
आया तूफान
बहा ले गया घर
मौन सागर ।
4
बचा लो पानी
सागर भी है प्यासा
नदी कहानी ।
5
नयनवासी
भवसिंधु में स्वप्न
भविष्यवासी ।
6
नन्हा शैशव
अब्धि सी मोह माया
डूब ही गया ।
7
अंक समेट
नदिया सिन्धु साथ
पाता विस्तार ।
8
कब लौटी है
समाके सागर में
बेचारी नदी ।
9
कल्पना कवि
प्रेम अब्धि में डूबा
ज्वलंत रवि ।

हाइकु

हाइकु

दिई रहन्छे

बेला बेला मुस्कान

मोरीको मन

साहित्य

पूरबी छोर

1 फूटने लगा ललछौंहा उजास पूरबी छोर । 2 प्यासा पादप ताके अंतिम क्षण बरसो मेघ । 3 खिला सुमन प्रेमी सूरज संग /गाल चूमती हवा चूमे किरण / हँसे किरण । 4 मसल नैन सुबह की चौखट जागती रैन । 5 मधुमालिती अलि भरें सागर मधु सागर । 6 कमल-कुञ्ज अलि मधु सौरभ प्रीत का पुञ्ज । 7 प्रेम तुम्हारा खिली मधुमालिती मन फुलौरा । 8 विभा शर्माई धूप ने जो अपनी छटा फैलाई । 9 छेड़े पुरवा तरु से जा लिपटी कोमल लता। 10 सूना शज़र विहग थे गूँजते चारों प्रहर । 11 ठूँठ उदास बीत गया बसंत फूटे न पात । 12 विदा पत्तियाँ शाखों से गले मिल रो पड़ा तरु । 13 हवा-हिंडोले प्रेम-प्रीत का राग सुनाते फिरे । 14 रोये बदरा पगलाई पवन भीगती धरा । 15 धुले है पात झूम उठी है शाखें दरख़्त ह्वास । 16 अमृत वर्षा सहेजती बसुधा पूनम निशा । 17 रात हठीली बैठी पाँव पसारे भोर ने ठेली ।

हाइकु

पिघला सूर्य

पिघला सूर्य
चहु ओर बिछी है
तेजसी धूप ।

रात्रि कपास
सुधा धनुक शशि
मृदु उजास ।

अंग-तरंग
मधुरतम ऋतु
भीगी उमंग ।

सहमे पात
बिछडन का घाव
संदली वात ।

गूँजा वीराना
महकी रात रानी
छेड़े पवन ।

भीगा दड़बा
व्यथित मन पाखी
तुषार हवा ।

धुले है पात
झूम उठी है शाखें
दरख़्त ह्वास ।

दृश्य अदृश्य
रुनझुन बुँदिया
मन सावन ।

झूम ही उठी
गुमसुुम वादियाँ
खिले सुमन ।

बेसुध लता
झकझोरती हवा
फ़ूल लापता ।

निखरा रूप
आ बैठी जो गोद में
प्रकृति धूप ।

दिन है बीते
मुस्काते थे कानन
आज है रीते ।

चौपट खेत
बिन मौसम वर्षा
सपने रेत ।

हाइकु

हाइकु

1
बेसुध लता
हवा संग लिपटी
फ़ूल लापता ।

2
हवा हिंडोले
प्रेम-प्रीत का राग
सुनाते फिरे ।

3
प्रीत न छोड़ी
जड़ चेतन संग
फूली व फली ।

4
विदा पत्तियाँ
शाखों से गले मिल
रो पड़ा तरु ।


5
ठूँठ उदास
बीत गया बसंत
फूटे न पात ।

6
सूना शज़र
विहग थे गूँजते
चारों प्रहर ।

7
हिय वेदना
निधि से बह चले
वज्र नयना ।

8
छेड़े पुरवा
तरु से जा लिपटी
कोमल लता ।

9
झूम ही उठी
गुमसुुम वादियाँ
खिले सुमन ।

हाइकु

सभी मित्रों और रिलेटिव्स को रंगोत्सव की रंगों और उमंगों भरी अशेष शुभकामनाएँ !! HAPPY HOLI ..... grin emoticon grin emoticon

1 भीगी है चोली/सुलगा तन मन/विरही होली ।

2 होली में लाल/रंग नहायी पिया/खुश्बू तू ख्याल ।

3 भीगी चुनर/ज्यों सुधियाँ बरसी/नयन कोर ।

4 बांका है छोरा/रंग डाला है मोरा/मुख था गोरा ।

5 हर्षित मन/होली के रंगों संग/भीगता तन

6 नेह का रंग/लगाया उबटन/रहता संग

7 राधा तरसी/गोपियों संग खेले/कन्हाई होली

8 उड़े गुलाल/खुशियों की बहार/होली है यार

9 प्रकृति बोली/प्राकृतिक रंगों से/खेल तू होली

10 लाख छुपाये/प्रीत के पक्के रंग/ऐसे है भाये

11 कर न तंग/रंगी कान्हा के रंग/सब बेरंग

12 सुन सहेली/राधा-कृष्ण की होली/रंग-रंगीली ।

13 मस्ती के रंग/भांति भाति के सखा/होली के संग ।

14 भीगी है चोली/सुलगा तन मन/विरही होली ।

15 होली में लाल/रंग नहायी पिया/खुश्बू तू ख्याल ।

16 भीगी चुनर/ज्यों सुधियाँ बरसी/नयन कोर ।

17 बांका है छोरा/रंग डाला है मोरा/मुख था गोरा ।

18 बरखा फाग/बाकी न रह जाए/द्वेष के दाग ।

19 घूमि घांघरा/ न मार पिचकारी/ कान्हा बावरा ।

20 बृज की होरी/ छटा इन्द्रधनुषी /रंगी है गोरी ।/

हाइकु

"हम बचेंगे, हम पढेंगे, हम बढ़ेंगे"(औरत के हक में एक संवाद)

निदान फाउंडेशन द्वारा सफी आरा की स्मृति में (जो एक निर्भीक और जुझारू पत्रकार थी दुर्भाग्यपूर्ण एक सड़क दुर्घटना से वो आज हमारे बीच नही है ) आयोजित “हम बचेंगे, हम पढेंगे, हम बढ़ेंगे”  कार्यक्रम 27/2/15  में महिला रचनाकारों द्वारा अनेक विधाओं में सफी आरा को श्रृद्धा सुमन अर्पित किये गए ।

किरण आर्य का तहे दिल से धन्यवाद जिन्होंने मुझे भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने का मौका दिया । मुझे भी हाइकु पाठ करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । यकीनन बहुत ही सुन्दर और सार्थक शाम रही । सभी स्नेहिल रचनाकारों का साथ वही सुशीला दी का गर्मजोशी से गले मिलना और सरिता दी से मिलना अद्भुत क्षण कभी न भुलाने वाली शाम जो सिर्फ और सिर्फ किरण आर्य द्वारा ही सम्भव हो सका । उनका जितना भी आभार किया जाए कम है :) :) :)

मेरे द्वारा प्रस्तुत हाइकू आप सभी के संज्ञान हेतु :-

1

नारी चेतना

टूटेगी हर बेड़ी

दूर वेदना ।

2

शिक्षा की सीढ़ी

स्त्री सशक्तिकरण

शिक्षित पीढ़ी ।

3

शिक्षित सुता

कल का दीप जला

अँधेरा मिटा ।

4

बेटों के तुल्य

सुशिक्षित बेटियाँ

धन अमूल्य ।

5

शिक्षा न छूटे

औरत का गहना

कोई न लूटे ।

6

न कुचलना

आँखें खोलती कली

खिलने देना ।

7

तुला में तुली

चढ़ी दहेज़ सूली

संस्कारी कली ।

8

बेटियाँ भली

दो दो कुल की लाज़

संग ले चली ।

9

अभागी कली

खिलने से पहले

धूल जा मिली ।

10

 वट बनेगी

पली नाजो से कली

पिय घर की ।

11

उडी चिरैया

कतरन सुधियाँ

चौखट धर । सुशीला शिवरान दी, सरिता दी, नेह सुनीता दी, प्रोमिला क़ाज़ी जी, किरणआर्य और मै संगीता जी, सीमा दी, नेह सुनीता दी, मै और किरण आर्य :) मै और नेह सुनीता दी :) :)

हाइकु