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"हम बचेंगे, हम पढेंगे, हम बढ़ेंगे"(औरत के हक में एक संवाद)

निदान फाउंडेशन द्वारा सफी आरा की स्मृति में (जो एक निर्भीक और जुझारू पत्रकार थी दुर्भाग्यपूर्ण एक सड़क दुर्घटना से वो आज हमारे बीच नही है ) आयोजित “हम बचेंगे, हम पढेंगे, हम बढ़ेंगे”  कार्यक्रम 27/2/15  में महिला रचनाकारों द्वारा अनेक विधाओं में सफी आरा को श्रृद्धा सुमन अर्पित किये गए ।

किरण आर्य का तहे दिल से धन्यवाद जिन्होंने मुझे भी इस कार्यक्रम का हिस्सा बनने का मौका दिया । मुझे भी हाइकु पाठ करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ । यकीनन बहुत ही सुन्दर और सार्थक शाम रही । सभी स्नेहिल रचनाकारों का साथ वही सुशीला दी का गर्मजोशी से गले मिलना और सरिता दी से मिलना अद्भुत क्षण कभी न भुलाने वाली शाम जो सिर्फ और सिर्फ किरण आर्य द्वारा ही सम्भव हो सका । उनका जितना भी आभार किया जाए कम है :) :) :)

मेरे द्वारा प्रस्तुत हाइकू आप सभी के संज्ञान हेतु :-

1

नारी चेतना

टूटेगी हर बेड़ी

दूर वेदना ।

2

शिक्षा की सीढ़ी

स्त्री सशक्तिकरण

शिक्षित पीढ़ी ।

3

शिक्षित सुता

कल का दीप जला

अँधेरा मिटा ।

4

बेटों के तुल्य

सुशिक्षित बेटियाँ

धन अमूल्य ।

5

शिक्षा न छूटे

औरत का गहना

कोई न लूटे ।

6

न कुचलना

आँखें खोलती कली

खिलने देना ।

7

तुला में तुली

चढ़ी दहेज़ सूली

संस्कारी कली ।

8

बेटियाँ भली

दो दो कुल की लाज़

संग ले चली ।

9

अभागी कली

खिलने से पहले

धूल जा मिली ।

10

 वट बनेगी

पली नाजो से कली

पिय घर की ।

11

उडी चिरैया

कतरन सुधियाँ

चौखट धर । सुशीला शिवरान दी, सरिता दी, नेह सुनीता दी, प्रोमिला क़ाज़ी जी, किरणआर्य और मै संगीता जी, सीमा दी, नेह सुनीता दी, मै और किरण आर्य :) मै और नेह सुनीता दी :) :)

हाइकु

आला रे आला ऋतुराज आला

1
पीला घांघरा
पहन इतराई
बाँवरी धरा ।

2
धूप मंजरी
बिखरी धरा पर
फूटे अंकुर ।

3
गोद भराई
किलक पड़े पुष्प
धरा हर्षाई ।

4
ओस क्षणिका
अद्भुत सृजनता
सुख क्षणिका ।

5
अमुवा बौर
कोयल की हुंकार
वनवा शोर ।
6
ऋतु वसंत
खिलखिलाई क्यारी
उजले कन्त ।
7
प्रेम सन्देश
उड़े पवन संग
पिया विदेश ।
8
भौरें की धुन
सुन कली महकी
फगुआ गाती ।
9
आये न तुम
वासन्ती सरगम
विरही धुन ।
10
हे मधुमास !
अवनी का श्रृंगार
टेशू पलाश ।
11
नव पल्लव
विहग कलरव
प्रेम उत्सव ।
12
नव कलियाँ
देख के इतराया
भौंरा छलिया
13
हो गया रिहा
धुँध की गिरफ्त से
रवि वसंत ।
14
भूली सुधियाँ
वसंत विरहन
स्व से बतियाँ ।
15
वसंत दौरा
महकती कलियाँ
बौराया भौंरा ।
16
हवा के काँधे
सैर करती फिरे
पुष्प सुगंध ।
17
छाया वसंत
उत्सवों की बहार
विदा हेमंत ।
18
नव है पात
वसंत आगमन
हर्षित धरा ।
19
दिव्य दिगंत
अलि छंद गुंजन
मन वसंत ।
20
खिली कलियाँ
देख ऊषा किरण
हँसा वसंत ।
21
मृदु छुअन
सुवासित सुमन
रवि किरण ।
22
वसंत पुंज
आलोकित दिशाएँ
पलाश कुञ्ज ।
23
बरसी वृष्टि
नन्हा बीज समेटे
सम्पूर्ण सृष्टि ।
24
हँसा वसंत
कुम्हलाये सुमन
हुए जीवंत ।

हाइकु

सरस्वती पूजन

1
मात शारदे
विद्या बुद्धि संयम
झोली भर दे ।
2
वसंतोत्सव
सरस्वती वन्दन
प्रकृति पर्व ।
3
अवतरण
विद्या बुद्धि प्रदाता
वसंतोत्सव ।
4
माँ शारदाम
कमलं पद्मासनं
बुद्धिप्रदाम ।
5
सदैव स्तुति
ब्रह्मा विष्णु महेश
माँ सरस्वती ।

हाइकु